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सुप्रीम कोर्ट: हारने वाली पार्टी भी मांग सकती है अंतरिम राहत, आर्बिट्रेशन कानून पर स्पष्टता

Rajan Prajapati
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आर्बिट्रेशन में हारने वाली पार्टी भी धारा 9 के तहत अंतरिम राहत मांग सकती है, हालांकि ऐसे मामलों में सख्त मानदंड लागू होंगे। - होम केयर रिटेल मार्ट प्रा. लिमिटेड बनाम हरेश एन. सांघवी और संबंधित मामला

सुप्रीम कोर्ट: हारने वाली पार्टी भी मांग सकती है अंतरिम राहत, आर्बिट्रेशन कानून पर स्पष्टता

नई दिल्ली में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने आर्बिट्रेशन कानून की एक अहम कानूनी उलझन को सुलझाते हुए स्पष्ट किया कि आर्बिट्रेशन में हारने वाली पार्टी भी कुछ परिस्थितियों में अंतरिम राहत (interim relief) मांग सकती है। अदालत ने कहा कि कानून में “पार्टी” शब्द का अर्थ सभी पक्षों से है, न कि केवल जीतने वाले से।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला होम केयर रिटेल मार्ट्स प्राइवेट लिमिटेड बनाम हरेश एन. संघवी सहित कई याचिकाओं से जुड़ा था। मुख्य सवाल यह था कि क्या आर्बिट्रेशन में हारने वाली पार्टी, अवॉर्ड के बाद, मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 9 के तहत अदालत से अंतरिम राहत मांग सकती है।

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विभिन्न हाई कोर्ट्स के फैसलों में इस मुद्दे पर मतभेद था। कुछ अदालतों ने कहा था कि केवल सफल पक्ष ही ऐसी राहत मांग सकता है, जबकि अन्य अदालतों ने सभी पक्षों को यह अधिकार दिया था।

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न्यायमूर्ति मनमोहन और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा कि कानून की भाषा स्पष्ट है और इसमें “पार्टी” शब्द को सीमित नहीं किया जा सकता।

अदालत ने कहा,

“धारा 9 में ‘पार्टी’ शब्द का अर्थ सभी पक्षों से है और इसे परिणाम के आधार पर बदला नहीं जा सकता।”

पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि कानून में कहीं भी यह नहीं लिखा है कि केवल सफल पक्ष ही अंतरिम राहत मांग सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि धारा 9 का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने तक सभी पक्ष अपने अधिकारों की रक्षा कर सकें।

अदालत ने माना कि धारा 34 (अवॉर्ड को चुनौती) और धारा 36 (अवॉर्ड के प्रवर्तन) अलग-अलग क्षेत्र में काम करते हैं, जबकि धारा 9 का उद्देश्य विवाद की वस्तु या राशि की सुरक्षा करना है।

कोर्ट ने कहा कि यदि हारने वाली पार्टी को अंतरिम राहत से वंचित किया जाए, तो वह बिना किसी सुरक्षा के रह जाएगी, खासकर तब जब अवॉर्ड को चुनौती दी गई हो।

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साथ ही, अदालत ने यह भी माना कि ऐसे मामलों में राहत देने का मानदंड (threshold) अधिक सख्त होगा और केवल “दुर्लभ और गंभीर परिस्थितियों” में ही राहत दी जानी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि आर्बिट्रेशन में हारने वाली पार्टी भी, अवॉर्ड के बाद, धारा 9 के तहत अंतरिम राहत के लिए आवेदन कर सकती है।

अदालत ने बॉम्बे, दिल्ली, मद्रास और कर्नाटक हाई कोर्ट के उन फैसलों को गलत बताया, जिनमें हारने वाली पार्टी को यह अधिकार नहीं दिया गया था। वहीं, तेलंगाना, गुजरात और पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट के दृष्टिकोण को सही माना गया।

अंत में, अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में अदालतों को सावधानी और संतुलन के साथ निर्णय लेना होगा।

Case Details:

Case Title: Home Care Retail Marts Pvt. Ltd. v. Haresh N. Sanghavi & connected matter

Case Number: Civil Appeals arising out of SLP (C) Nos. 29972/2015, 26876/2014, 11139/2020

Judge: Justice Manmohan and Justice Manoj Misra

Decision Date: April 24, 2026

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