Logo

IBC में ‘क्लीन स्लेट’ पूर्ण नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने आर्बिट्रेशन में Set-Off की सीमित अनुमति दी, काउंटरक्लेम पर रोक

Shivam
Add Court Book as a preferred source on Google

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि IBC के तहत काउंटरक्लेम खत्म हो सकता है, लेकिन Set-Off को बचाव के रूप में आर्बिट्रेशन में उठाया जा सकता है। - उजास एनर्जी लिमिटेड बनाम पश्चिम बंगाल विद्युत विकास निगम लिमिटेड।

IBC में ‘क्लीन स्लेट’ पूर्ण नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने आर्बिट्रेशन में Set-Off की सीमित अनुमति दी, काउंटरक्लेम पर रोक

सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि दिवाला प्रक्रिया (IBC) के तहत स्वीकृत रेज़ोल्यूशन प्लान सभी पुराने दावों को समाप्त जरूर करता है, लेकिन कुछ परिस्थितियों में Set-Off (समायोजन) को बचाव के रूप में उठाने की अनुमति दी जा सकती है।

यह फैसला उजास एनर्जी लिमिटेड और वेस्ट बंगाल पावर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड के बीच चल रहे विवाद में आया, जहां कोर्ट ने अपील को आंशिक रूप से स्वीकार किया।

मामले की पृष्ठभूमि

यह विवाद वर्ष 2017 के एक टेंडर से जुड़ा है, जिसमें पश्चिम बंगाल में रूफटॉप सोलर प्रोजेक्ट लगाने का काम उजास एनर्जी लिमिटेड को मिला था। बाद में 2020 में कंपनी को IBC के तहत कॉरपोरेट इनसॉल्वेंसी रिज़ॉल्यूशन प्रोसेस (CIRP) में डाल दिया गया।

इस दौरान 2021 में आर्बिट्रेशन शुरू हुआ, जहां वेस्ट बंगाल पावर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन ने काउंटरक्लेम दाखिल किया। हालांकि, यह दावा CIRP के दौरान रेज़ोल्यूशन प्रोफेशनल के सामने पेश नहीं किया गया था।

Court Book subscription: bare acts, legal drafts, court judgments and ad-free legal news, plans from ₹30/month

Read also:- बिजवासन रेलवे प्रोजेक्ट को सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी: ‘डीम्ड फॉरेस्ट’ नहीं, मास्टर प्लान को मिली प्राथमिकता

अक्टूबर 2023 में NCLT ने रेज़ोल्यूशन प्लान को मंजूरी दे दी, जिससे CIRP समाप्त हो गया।

आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल ने यह कहते हुए काउंटरक्लेम खारिज कर दिया कि जो दावे रेज़ोल्यूशन प्लान में शामिल नहीं होते, वे समाप्त हो जाते हैं।

कलकत्ता हाई कोर्ट के सिंगल जज ने इस फैसले को सही ठहराया। लेकिन डिवीजन बेंच ने इसे पलटते हुए आर्बिट्रेशन जारी रखने और काउंटरक्लेम पर विचार करने की अनुमति दी।

इसी आदेश को उजास एनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।

जस्टिस दीपांकर दत्ता की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि IBC की धारा 31 के तहत रेज़ोल्यूशन प्लान को अंतिम और बाध्यकारी माना जाता है।

बेंच ने कहा,

“रेज़ोल्यूशन प्लान के बाहर के सभी दावे समाप्त माने जाएंगे और उन पर कोई कार्यवाही नहीं की जा सकती।”

Read also:- ‘कहानी-2’ पर कॉपीराइट केस खत्म: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- “शिकायत निराधार और परेशान करने वाली”

कोर्ट ने “क्लीन स्लेट” सिद्धांत को दोहराते हुए कहा कि प्लान की मंजूरी के बाद पुराने दावों का कोई अस्तित्व नहीं रहता।

हालांकि, कोर्ट ने यह भी माना कि काउंटरक्लेम (जो भुगतान मांगता है) और Set-Off (जो केवल बचाव है) में फर्क है।

बेंच ने कहा,

“रेज़ोल्यूशन प्लान में भुगतान या सेटलमेंट के दावों पर रोक है, लेकिन Set-Off को बचाव के रूप में स्पष्ट रूप से नहीं रोका गया है।”

कोर्ट ने यह भी नोट किया कि काउंटरक्लेम पहले ही आर्बिट्रेशन में उठाया जा चुका था और इसकी जानकारी रेज़ोल्यूशन प्रोफेशनल को थी।

Read also:- क्या अदालत में अपने वकील द्वारा कही गई बात को पलट सकते हैं? हरियाणा हत्याकांड मामले में हाई कोर्ट ने कड़ा फैसला सुनाया।

सुप्रीम कोर्ट ने डिवीजन बेंच के आदेश में संशोधन करते हुए निम्न निर्देश दिए:

• रेज़ोल्यूशन प्लान के बाद काउंटरक्लेम स्वतंत्र रूप से जारी नहीं रखा जा सकता

• लेकिन Set-Off को केवल बचाव (defence) के रूप में उठाया जा सकता है

• इस आधार पर कोई सकारात्मक राहत (recovery) नहीं दी जाएगी

• यदि Set-Off के बाद भी राशि उजास एनर्जी के पक्ष में रहती है, तो उसे वसूल किया जा सकता है

• यदि प्रतिवादी के पक्ष में अतिरिक्त राशि निकलती है, तो वह वसूल नहीं की जा सकेगी

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह फैसला मामले के विशेष तथ्यों पर आधारित है और उसी सीमा तक लागू होगा।

Case Title: Ujaas Energy Ltd. v. West Bengal Power Development Corporation Ltd.

Case Number: Civil Appeal arising out of SLP (C) No. 29651 of 2024

Judges: Justice Dipankar Datta & Justice Augustine George Masih

Decision Date: March 20, 2026

Download Judgment

Take CourtBook Everywhere

Access your account on the go with our mobile app.

Get it on Google PlayDownload on the App Store
Join the Court Book WhatsApp channel for latest judgments, notifications, legal news and exam updates