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‘चार साल तक साथ रहे, बाद में संबंध बिगड़ने से हर मामला रेप नहीं बनता’: सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी को राहत देते हुए हाईकोर्ट का आदेश पलटा

Rajan Prajapati
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लंबे समय तक सहमति से चले संबंधों को केवल शादी न होने पर रेप का मामला नहीं माना जा सकता। - शैलेशभाई गोविंदभाई मकवाना बनाम महाराष्ट्र राज्य एवं अन्य।

‘चार साल तक साथ रहे, बाद में संबंध बिगड़ने से हर मामला रेप नहीं बनता’: सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी को राहत देते हुए हाईकोर्ट का आदेश पलटा

सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र के एक व्यक्ति के खिलाफ दर्ज रेप, अप्राकृतिक यौन संबंध और धमकी के मामले को रद्द करते हुए कहा कि लंबे समय तक चले संबंधों और परिस्थितियों को देखते हुए यह मामला “शादी का झूठा वादा कर धोखा देने” का नहीं बनता। अदालत ने माना कि दोनों पक्ष कई वर्षों तक रिश्ते में रहे और शिकायत में लगाए गए आरोपों का तत्काल विरोध या शिकायत भी दर्ज नहीं कराई गई थी।

मामले की पृष्ठभूमि

शिकायतकर्ता महिला ने फरवरी 2021 में एफआईआर दर्ज कर आरोप लगाया था कि आरोपी ने शादी का भरोसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए और बाद में शादी से इनकार कर दिया।

रिकॉर्ड के अनुसार, महिला की पहली शादी 1998 में हुई थी, लेकिन 2012 से वह अपने पति से अलग रह रही थी। अदालत ने नोट किया कि 2017 में तलाक अंतिम रूप से होने से पहले ही महिला ने दूसरी शादी के लिए मैट्रिमोनियल वेबसाइट पर प्रोफाइल बनाया था। वहीं आरोपी भी पहले से विवाहित था और तलाक की प्रक्रिया में होने की बात कही गई थी।

महिला ने आरोप लगाया कि अक्टूबर 2017 में आरोपी उसके घर आया और उसकी इच्छा के विरुद्ध शारीरिक संबंध बनाए। हालांकि, रिकॉर्ड में यह भी सामने आया कि इसके बाद दोनों कई वर्षों तक संपर्क में रहे, साथ यात्रा की, होटल में ठहरे और उनके बीच शारीरिक संबंध जारी रहे। शिकायत के मुताबिक महिला ने आरोपी को लगभग ₹2.5 लाख भी ट्रांसफर किए थे।

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न्यायमूर्ति के. वी. विश्वनाथन और न्यायमूर्ति मनमोहन की पीठ ने कहा कि रिकॉर्ड से यह स्पष्ट है कि दोनों पक्ष अपने-अपने वैवाहिक स्थिति से परिचित थे और कई वर्षों तक संबंध में रहे।

अदालत ने कहा,

“यह ऐसा मामला नहीं है जहां शादी के वादे के जरिए शिकायतकर्ता को धोखा दिया गया हो। दोनों 2017 से 2020 तक साथ रहे और बाद में संबंध खराब हुए।”

पीठ ने यह भी कहा कि हर टूटे हुए विवाह वादे को झूठा वादा मानकर दुष्कर्म का मामला नहीं बनाया जा सकता। अदालत ने अपने पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि यह देखना जरूरी है कि क्या शुरुआत से ही आरोपी की मंशा धोखा देने की थी या बाद में परिस्थितियों के कारण विवाह नहीं हो सका।

सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस दृष्टिकोण से भी असहमति जताई जिसमें दूसरी बार दाखिल की गई क्वैशिंग याचिका को स्वीकार नहीं किया गया था। अदालत ने कहा कि पहली याचिका बिना मेरिट पर विचार किए वापस ली गई थी, इसलिए दूसरी याचिका पर सुनवाई रोकी नहीं जा सकती थी।

सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद पीठ का 3 सितंबर 2025 का आदेश रद्द करते हुए तुलजापुर की ट्रायल कोर्ट में लंबित RCC No. 328/2021 की पूरी आपराधिक कार्यवाही समाप्त कर दी। साथ ही आरोपी के बेल बॉन्ड भी निरस्त कर दिए गए।

Case Details:

Case Title: Shaileshbhai Govindbhai Makwana v. The State of Maharashtra & Anr.

Case Number: Criminal Appeal arising out of SLP (Crl.) No. 2260/2026

Judges: Justice K.V. Viswanathan and Justice Manmohan

Decision Date: April 20, 2026

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