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पिता की सहमति के बिना भी एकल माता अपने नाबालिग बच्चे का पासपोर्ट बनवाने की हकदार: आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय

CB News Desk

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने पासपोर्ट अधिकारियों को निर्देश दिया कि सिंगल मदर द्वारा नाबालिग बेटी के लिए दायर पासपोर्ट आवेदन पर पिता की सहमति या तलाक डिक्री की मांग किए बिना निर्णय लें। - शेख शबाना बनाम भारत संघ और अन्य

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पिता की सहमति के बिना भी एकल माता अपने नाबालिग बच्चे का पासपोर्ट बनवाने की हकदार: आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय
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आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि यदि कोई मां अपने नाबालिग बच्चे की अकेले देखभाल कर रही है और उसने पासपोर्ट नियमों के तहत आवश्यक घोषणा-पत्र जमा कर दिए हैं, तो केवल पिता की सहमति न होने के आधार पर पासपोर्ट आवेदन लंबित नहीं रखा जा सकता।

न्यायमूर्ति बट्टू देवानंद ने यह आदेश शेख शबाना की ओर से दायर रिट याचिका पर सुनाया।

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मामले की पृष्ठभूमि

याचिकाकर्ता शेख शबाना ने अपनी चार वर्षीय बेटी आयरा मुल्ला के लिए 28 अगस्त 2025 को पासपोर्ट आवेदन किया था। उन्होंने अदालत को बताया कि वैवाहिक विवादों के कारण वह वर्ष 2022 से अपने पति से अलग रह रही हैं और बेटी की देखभाल स्वयं कर रही हैं।

याचिका के अनुसार, पासपोर्ट आवेदन में उन्होंने स्वयं को "सिंगल पैरेंट" बताया था और आवश्यक Annexure-C तथा Annexure-D भी जमा किए थे। इसके बावजूद पासपोर्ट अधिकारियों ने कथित रूप से उनसे तलाक, न्यायिक पृथक्करण (Judicial Separation) या किसी अदालत के आदेश की मांग की।

क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी की ओर से कहा गया कि सामान्यतः नाबालिग के पासपोर्ट के लिए दोनों अभिभावकों की सहमति आवश्यक होती है। चूंकि पिता की सहमति उपलब्ध नहीं थी, इसलिए आवेदन को होल्ड पर रखा गया।

विभाग का कहना था कि याचिकाकर्ता ने अपने दावों के समर्थन में आवश्यक कानूनी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए थे।

सुनवाई के दौरान अदालत ने इस प्रश्न पर विचार किया कि क्या किसी नाबालिग बच्चे को उसकी मां के आवेदन पर, पिता की सहमति के बिना, पासपोर्ट जारी किया जा सकता है जब कोई निषेधात्मक आदेश (prohibitory order) मौजूद न हो।

अदालत ने बॉम्बे, तेलंगाना, मध्य प्रदेश और मद्रास हाईकोर्ट के विभिन्न फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि कानून ऐसे मामलों को मान्यता देता है जहां सिंगल पैरेंट आवश्यक घोषणा-पत्र देकर बच्चे के लिए पासपोर्ट प्राप्त कर सकता है।

न्यायालय ने कहा,

"याचिकाकर्ता एक सिंगल पैरेंट होने के नाते अपने नाबालिग बच्चे के पासपोर्ट के लिए बिना पति की सहमति या हस्ताक्षर के आवेदन करने की हकदार है।"

अदालत ने यह भी माना कि विदेश यात्रा का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत संरक्षित व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हिस्सा है और पासपोर्ट अधिकारियों को कानून से परे अतिरिक्त शर्तें नहीं लगानी चाहिए।

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सभी तथ्यों और रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने रिट याचिका स्वीकार कर ली।

अदालत ने क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता द्वारा अपनी नाबालिग बेटी के लिए दायर पासपोर्ट आवेदन पर आदेश की प्रति प्राप्त होने की तारीख से दो सप्ताह के भीतर विचार कर आवश्यक कार्रवाई करें।

Case Details:

Case Title: Shaik Shabana v. Union of India & Another

Case Number: W.P. No. 2768 of 2026

Judge: Justice Battu Devanand

Decision Date: 1 May 2026

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