Logo

सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि सरकारी नौकरियों में अनिवार्य कार्य अनुभव को उच्च योग्यता से प्रतिस्थापित नहीं किया जा सकता।

Rajan Prajapati
Add Court Book as a preferred source on Google

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अनिवार्य अनुभव के बिना सरकारी नियुक्ति अवैध है और केवल उच्च डिग्री या मेरिट के आधार पर चयन नहीं किया जा सकता। - हिमाक्षी बनाम राहुल वर्मा एवं अन्य।

सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि सरकारी नौकरियों में अनिवार्य कार्य अनुभव को उच्च योग्यता से प्रतिस्थापित नहीं किया जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि सरकारी नौकरी में निर्धारित “अनिवार्य योग्यता” को नजरअंदाज कर चयन नहीं किया जा सकता। अदालत ने हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड द्वारा किए गए कंप्यूटर हार्डवेयर इंजीनियर के चयन को अवैध ठहराते हुए रद्द कर दिया।

मामले की पृष्ठभूमि

मामला वर्ष 2016 की भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा है, जिसमें हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड ने कंप्यूटर हार्डवेयर इंजीनियर के पद के लिए आवेदन मांगे थे। विज्ञापन में स्पष्ट रूप से 5 वर्ष का अनुभव अनिवार्य योग्यता के रूप में निर्धारित था।

चयन प्रक्रिया में तीन प्रमुख उम्मीदवार शामिल थे हिमाक्षी, राहुल वर्मा और गौरव। हिमाक्षी ने लिखित परीक्षा और इंटरव्यू में सबसे अधिक अंक हासिल किए, लेकिन उनके पास केवल लगभग एक वर्ष का अनुभव था। दूसरी ओर, राहुल वर्मा ने लगभग 6 वर्षों का अनुभव होने का दावा किया।

चयन के बाद राहुल वर्मा ने नियुक्ति को चुनौती दी, यह कहते हुए कि चयनित उम्मीदवार आवश्यक योग्यता पूरी नहीं करती थीं।

Court Book subscription: bare acts, legal drafts, court judgments and ad-free legal news, plans from ₹30/month

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भर्ती नियमों में दी गई “अनिवार्य योग्यता” केवल औपचारिकता नहीं होती, बल्कि यह न्यूनतम पात्रता की शर्त होती है।

अदालत ने स्पष्ट किया:

“अनिवार्य योग्यता पूरी किए बिना किसी उम्मीदवार को केवल उच्च डिग्री या अधिक अंक के आधार पर योग्य नहीं माना जा सकता।”

कोर्ट ने यह भी कहा कि “प्राथमिकता” (preference) और “अनिवार्य योग्यता” (essential qualification) में स्पष्ट अंतर है। M.Tech जैसी उच्च डिग्री केवल तभी महत्व रखती है जब उम्मीदवार पहले से अनिवार्य शर्तें पूरी करता हो।

इसके अलावा, अदालत ने पाया कि भर्ती एजेंसी ने अनुभव की शर्त में किसी प्रकार की छूट (relaxation) देने का कोई रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं किया।

“छूट का अधिकार होने मात्र से यह नहीं माना जा सकता कि उसे लागू भी किया गया है; इसके लिए स्पष्ट और लिखित कारण आवश्यक हैं।”

अदालत ने कहा कि यदि किसी उम्मीदवार को नियमों में छूट दी जाती है, तो उसका निर्णय स्पष्ट रूप से रिकॉर्ड में होना चाहिए।

इस मामले में:

• कोई लिखित निर्णय नहीं था कि अनुभव की शर्त को शिथिल किया गया

• चयन समिति ने इस मुद्दे पर विचार भी नहीं किया

इससे अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि चयन प्रक्रिया में आवश्यक योग्यता का पालन ही नहीं किया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने माना कि चयनित उम्मीदवार आवश्यक 5 वर्ष के अनुभव की शर्त पूरी नहीं करती थीं, और बिना वैध छूट के उनकी नियुक्ति नियमों के विपरीत थी।

अदालत ने कहा कि:

• चयन और नियुक्ति को कानूनी रूप से बनाए नहीं रखा जा सकता

• केवल लंबे समय तक सेवा करने के आधार पर राहत (equity) नहीं दी जा सकती

• अन्य उम्मीदवार को भी सीधे नियुक्ति देने का आदेश नहीं दिया जा सकता क्योंकि पूरी चयन प्रक्रिया ही त्रुटिपूर्ण थी

अंततः, अदालत ने हाई कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए दोनों अपीलों को खारिज कर दिया और बोर्ड को नियमों के अनुसार नई भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की स्वतंत्रता दी।

Case Details

Case Title: Himakshi v. Rahul Verma & Ors.

Case Number: Civil Appeal No. 5942 of 2023 & 5943 of 2023

Bench: Justice J.K. Maheshwari and Justice Atul S. Chandurkar

Decision Date: April 20, 2026

Download Judgment

Take CourtBook Everywhere

Access your account on the go with our mobile app.

Get it on Google PlayDownload on the App Store
Join the Court Book WhatsApp channel for latest judgments, notifications, legal news and exam updates