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सुप्रीम कोर्ट ने दिव्यांग कैदियों के अधिकारों पर सख्त रुख अपनाया, सभी राज्यों को 6 हफ्ते में रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दीया

Rajan Prajapati
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सुप्रीम कोर्ट ने दिव्यांग कैदियों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने और नई कार्ययोजना बनाने का आदेश दिया। -सत्यन नरवूर बनाम भारत संघ एवं अन्य।

सुप्रीम कोर्ट ने दिव्यांग कैदियों के अधिकारों पर सख्त रुख अपनाया, सभी राज्यों को 6 हफ्ते में रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दीया

सुप्रीम कोर्ट ने देशभर की जेलों में बंद दिव्यांग कैदियों के अधिकारों और सुविधाओं को लेकर अहम आदेश जारी किया है। अदालत ने कहा कि जेल में होने का मतलब यह नहीं कि किसी व्यक्ति के संवैधानिक अधिकार खत्म हो जाएं। कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को छह सप्ताह के भीतर अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।

मामले की पृष्ठभूमि

याचिकाकर्ता ने अदालत के सामने यह मुद्दा उठाया था कि जेलों में दिव्यांग कैदियों के लिए पर्याप्त सुविधाएं, सहायक उपकरण, शिक्षा, शिकायत निवारण व्यवस्था और सम्मानजनक जीवन के साधन उपलब्ध नहीं हैं। इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने L. Muruganantham मामले में कई दिशा-निर्देश जारी किए थे, लेकिन उनके पालन को लेकर सवाल बने हुए थे।

सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि अब तक केवल 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने ही अपनी अनुपालन रिपोर्ट दाखिल की है। इस पर कोर्ट ने चिंता जताई।

पीठ ने कहा,

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“दिव्यांग कैदियों के अधिकारों को मानवीय और अधिकार-आधारित दृष्टिकोण से लागू किया जाना चाहिए। कारावास किसी व्यक्ति के मूल अधिकारों को कम नहीं कर सकता।”

अदालत ने यह भी कहा कि संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के तहत समानता, गरिमा और न्याय का संरक्षण जेलों के भीतर भी उतना ही आवश्यक है।

सुप्रीम Court ने मामले की निगरानी के लिए पहले से गठित हाई-पावर्ड कमेटी को यह अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी। यह कमेटी अब देशभर की जेलों में दिव्यांग कैदियों की स्थिति, नियमों और सुविधाओं की समीक्षा करेगी।

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कोर्ट ने निर्देश दिया कि:

• सभी राज्य छह हफ्ते में अपनी रिपोर्ट कमेटी के सामने रखें

• दिव्यांग कैदियों के लिए सहायक उपकरण और मोबिलिटी एड्स पर कार्ययोजना बने

• राज्यों के सामाजिक न्याय विभाग के सचिव कमेटी की कार्यवाही में शामिल हों

• कैदियों और हस्तक्षेपकर्ताओं को भी अपनी बात रखने की अनुमति होगी

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाई-पावर्ड कमेटी चार महीने के भीतर विस्तृत स्थिति रिपोर्ट दाखिल करे, जिसमें प्रगति, चुनौतियां और आगे के कदम बताए जाएं। अदालत ने मामले को 1 सितंबर 2026 के लिए सूचीबद्ध किया है, जहां अगली सुनवाई होगी।

Case Details:

Case Title: Sathyan Naravoor vs Union of India & Ors.

Case Number: Writ Petition (Civil) No. 182 of 2025

Judge: Justice Vikram Nath and Justice Sandeep Mehta

Decision Date: 21 April 2026

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