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सुप्रीम कोर्ट ने पितृत्व विवाद में डीएनए साक्ष्य को माना निर्णायक, बच्चे का मेंटेनेंस खारिज, मां के दावे पर फिर सुनवाई

Rajan Prajapati
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सुप्रीम कोर्ट ने डीएनए रिपोर्ट के आधार पर बच्चे के भरण-पोषण से इनकार बरकरार रखा, लेकिन मां के मामले में पुनर्विचार के लिए ट्रायल कोर्ट को मामला लौटाया। - निकहत परवीन @ खुशबू खातून बनाम रफीक @ शिल्लू

सुप्रीम कोर्ट ने पितृत्व विवाद में डीएनए साक्ष्य को माना निर्णायक, बच्चे का मेंटेनेंस खारिज, मां के दावे पर फिर सुनवाई

दिल्ली से जुड़े एक पारिवारिक विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश देते हुए मां के भरण-पोषण (मेंटेनेंस) के अधिकार पर पुनर्विचार के लिए मामला ट्रायल कोर्ट को वापस भेज दिया। हालांकि, बच्चे के लिए भरण-पोषण से इनकार को बरकरार रखा गया।

मामले की पृष्ठभूमि

मामले में अपीलकर्ता महिला ने आरोप लगाया कि वह प्रतिवादी के घर में काम करती थी, जहां शादी का वादा कर उसके साथ संबंध बनाए गए। बाद में दोनों ने विवाह किया और एक बच्चा हुआ। रिश्तों में जल्द ही तनाव आ गया और महिला ने घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत शिकायत दाखिल करते हुए अपने और बच्चे के लिए अंतरिम भरण-पोषण की मांग की।

प्रतिवादी ने आरोपों से इनकार करते हुए बच्चे की पितृत्व जांच के लिए डीएनए टेस्ट की मांग की। ट्रायल कोर्ट ने डीएनए जांच की अनुमति दी, जिसकी रिपोर्ट में यह सामने आया कि प्रतिवादी बच्चे का जैविक पिता नहीं है। इसके आधार पर ट्रायल कोर्ट ने भरण-पोषण की मांग खारिज कर दी, जिसे अपील में भी बरकरार रखा गया।

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 112 पर विस्तार से विचार किया। यह धारा विवाह के दौरान जन्मे बच्चे को वैध मानने की कानूनी धारणा देती है।

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पीठ ने कहा,

“कानून का उद्देश्य बच्चे को अवैध ठहराए जाने के सामाजिक कलंक से बचाना है।” अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि वैज्ञानिक प्रगति के बावजूद यह कानूनी धारणा अब भी प्रासंगिक है।

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हालांकि, अदालत ने माना कि इस मामले में डीएनए रिपोर्ट पहले ही रिकॉर्ड में है और अंतिम हो चुकी है, इसलिए बच्चे के पितृत्व को लेकर कानूनी धारणा लागू नहीं हो सकती।

सुप्रीम कोर्ट ने बच्चे के लिए भरण-पोषण से इनकार के फैसले को सही ठहराया। वहीं, मां के मामले में अदालत ने पाया कि ट्रायल कोर्ट ने अंतरिम भरण-पोषण देने से इनकार करते समय गलती की थी।

अदालत ने निर्देश दिया कि मां के भरण-पोषण के दावे पर नए सिरे से विचार किया जाए। इसके लिए मामला ट्रायल कोर्ट को वापस भेज दिया गया।

Case details

Case Title: Nikhat Parveen @ Khusboo Khatoon vs. Rafique @ Shillu

Judge: Justice Sanjay Karol and Justice Nongmeikapam Kotiswar Singh

Decision Date: April 21, 2026

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