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इसरो के दिहाड़ी मजदूरों को बड़ी राहत: सुप्रीम कोर्ट ने स्थायी दर्जा देने का आदेश दिया

Rajan Prajapati
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सुप्रीम कोर्ट ने दैनिक वेतनभोगियों को स्थायी दर्जा देने का आदेश दिया और 2012 की स्कीम को आंशिक रूप से रद्द कर सरकार को निर्देश जारी किए। - आर. अय्यप्पन और अन्य बनाम भारत संघ और अन्य।

इसरो के दिहाड़ी मजदूरों को बड़ी राहत: सुप्रीम कोर्ट ने स्थायी दर्जा देने का आदेश दिया

नई दिल्ली में सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में केंद्र सरकार की 2012 की “Gang Labourers Scheme” को आंशिक रूप से रद्द कर दिया और वर्षों से काम कर रहे दैनिक वेतनभोगियों के हक में बड़ा आदेश दिया। अदालत ने साफ कहा कि लंबे समय तक काम लेने के बाद कर्मचारियों को स्थायी दर्जा न देना न्यायसंगत नहीं है।

मामले की पृष्ठभूमि

मामला उन कर्मचारियों से जुड़ा है जो 1991 से 1997 के बीच महेंद्रगिरि यूनिट में दैनिक वेतन पर काम कर रहे थे। 1993 में केंद्र सरकार ने एक योजना बनाई थी, जिसके तहत अस्थायी कर्मचारियों को कुछ अधिकार दिए जाने थे।

कर्मचारियों ने समय-समय पर अपनी सेवाओं को नियमित (regularise) करने की मांग की। जब इस पर कार्रवाई नहीं हुई, तो उन्होंने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) का रुख किया।

2010 में ट्रिब्यूनल ने सरकार को निर्देश दिया था कि ऐसे कर्मचारियों के लिए स्थायी नियुक्ति का ढांचा तैयार किया जाए। यह आदेश हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में भी बरकरार रहा।

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इसके बाद 2012 में सरकार ने “Gang Labourers Scheme” लागू की, लेकिन कर्मचारियों का कहना था कि यह योजना ट्रिब्यूनल के आदेश के अनुरूप नहीं है।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार का रवैया न्यायसंगत नहीं था।

अदालत ने टिप्पणी की,

“राज्य ऐसे श्रमिकों के साथ मनमाना व्यवहार नहीं कर सकता, जिन्होंने राष्ट्रीय महत्व के कार्यों में योगदान दिया है। उन्हें सेवा का मान्यता प्राप्त दर्जा न देना निष्पक्षता के सिद्धांत के खिलाफ है।”

कोर्ट ने यह भी माना कि 2012 की स्कीम ट्रिब्यूनल के पहले दिए गए स्पष्ट निर्देशों के अनुरूप नहीं थी, क्योंकि उसमें कर्मचारियों को स्थायी आधार पर शामिल करने के बजाय अस्थायी व्यवस्था रखी गई थी।

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मुख्य विवाद यह था कि क्या सरकार द्वारा बनाई गई 2012 की स्कीम ट्रिब्यूनल के आदेश का सही पालन करती है या नहीं, और क्या कर्मचारियों को स्थायी दर्जा मिलना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा:

• 2012 की “Gang Labourers Scheme” को उस हद तक रद्द किया जाता है, जहां वह ट्रिब्यूनल के निर्देशों के विपरीत है।

• सरकार को निर्देश दिया गया कि सभी अपीलकर्ताओं को स्थायी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए।

• यह स्थायी दर्जा 9 सितंबर 2010 से प्रभावी माना जाएगा।

• यह प्रक्रिया चार सप्ताह के भीतर पूरी करने का आदेश दिया गया।

• स्कीम की वह धारा, जो अस्थायी नियुक्ति की बात करती थी, उसे भी निरस्त कर दिया गया।

• कोर्ट ने यह भी कहा कि यह लाभ अन्य समान परिस्थितियों वाले कर्मचारियों पर भी लागू होगा।

अंत में, अदालत ने मद्रास हाई कोर्ट के 8 जुलाई 2024 के फैसले को रद्द करते हुए अपील को स्वीकार कर लिया।

Case Details

Case Title: R. Iyyappan & Ors. vs Union of India & Ors.

Case Number: Civil Appeal arising out of SLP (C) No. 7138 of 2025

Judges: Justice Vikram Nath, Justice Sandeep Mehta

Decision Date: April 29, 2026

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