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सुप्रीम कोर्ट में केस लिस्टिंग और बेंच आवंटन के लिए AI लाने की तैयारी, पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने की पहल

Shivam
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सुप्रीम कोर्ट में केस लिस्टिंग और बेंच आवंटन के लिए AI लाने की तैयारी, पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने की पहल

सुप्रीम कोर्ट न्यायिक प्रशासन में तकनीक के उपयोग की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रहा है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के नेतृत्व में अदालत केस लिस्टिंग और बेंच आवंटन की प्रक्रिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को शामिल करने की योजना बना रही है।

वर्तमान व्यवस्था में मुख्य न्यायाधीश को “मास्टर ऑफ द रोस्टर” माना जाता है, यानी वही तय करते हैं कि कौन-सा मामला किस जजों की बेंच के सामने सुना जाएगा। प्रस्तावित AI प्रणाली का उद्देश्य इस प्रशासनिक प्रक्रिया में मानव हस्तक्षेप को कम करना और पारदर्शिता बढ़ाना है।

यह पहल उस समय चर्चा में आई जब एक याचिका में उत्तर प्रदेश गुंडागर्दी और असामाजिक गतिविधियों की रोकथाम अधिनियम, 1986 की कुछ धाराओं को चुनौती दी गई। याचिका में तर्क दिया गया कि यह प्रावधान भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 111 के साथ असंगत हैं।

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इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने की, जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल पंचोली भी शामिल थे।

सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार ने अदालत को बताया कि इसी प्रकार की चुनौती पहले ही दिसंबर 2022 में तीन जजों की पीठ द्वारा खारिज की जा चुकी है। इसके बावजूद उसी मुद्दे से जुड़ी नई याचिका किसी अन्य पीठ के समक्ष सूचीबद्ध हो गई।

इस स्थिति पर मुख्य न्यायाधीश ने गंभीर चिंता जताई और पूछा कि पहले से तय हो चुके मुद्दे पर फिर से सुनवाई कैसे सूचीबद्ध हो गई।

मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता शोएब आलम ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी, लेकिन अदालत ने इसे तुरंत बंद करने से इनकार कर दिया।

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पीठ ने कहा,

“मामले को तार्किक निष्कर्ष तक पहुँचने तक लंबित रखा जाएगा।”

इसके बाद अदालत ने सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री के कामकाज की प्रशासनिक जांच के निर्देश दिए। प्रारंभिक समीक्षा में यह सामने आया कि कुछ अधिकारी लंबे समय से एक ही पद पर तैनात थे और अदालत की तकनीकी व्यवस्था भी पुरानी थी, जिससे प्रक्रियागत गड़बड़ियों की संभावना बनी रहती थी।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने हाल ही में कहा कि न्यायपालिका में AI का उपयोग सावधानी और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ किया जाएगा।

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उन्होंने कहा,

“हम AI का आशावादी, सकारात्मक और रचनात्मक उपयोग कर रहे हैं। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट की एक अलग AI समिति बनाई गई है। इसका उद्देश्य तेज, सुलभ और सच्चा न्याय सुनिश्चित करना है।”

सुप्रीम कोर्ट ने विभिन्न हाईकोर्ट की तकनीकी पहलों का भी अध्ययन किया है। विशेष रूप से केरल उच्च न्यायालय द्वारा विकसित डिजिटल केस मैनेजमेंट सिस्टम की अदालत ने सराहना की है।

सुनवाई के दौरान उठे सवालों के बाद सुप्रीम कोर्ट ने रजिस्ट्री के कामकाज की प्रशासनिक जांच के निर्देश दिए और केस लिस्टिंग तथा बेंच आवंटन के लिए AI आधारित प्रणाली लागू करने की दिशा में कदम उठाने की प्रक्रिया शुरू की।

संबंधित याचिका को आगे की कार्यवाही तक लंबित रखने का निर्देश दिया गया।

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