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इंजीनियरिंग छात्र की मौत पर सुप्रीम कोर्ट ने बढ़ाया मुआवजा, कहा- मेधावी छात्र की आय को अकुशल मजदूर जैसा नहीं माना जा सकता

Rajan Prajapati
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सुप्रीम कोर्ट ने इंजीनियरिंग छात्र की सड़क दुर्घटना में मौत के मामले में मुआवजा बढ़ाकर ₹19.25 लाख किया और कहा कि मेधावी छात्र की आय का आकलन न्यूनतम मजदूरी से नहीं किया जा सकता। - मोहिंदर कौर (डी) एल.आर. के माध्यम से बनाम बृज लाल अरोरा और अन्य।

इंजीनियरिंग छात्र की मौत पर सुप्रीम कोर्ट ने बढ़ाया मुआवजा, कहा- मेधावी छात्र की आय को अकुशल मजदूर जैसा नहीं माना जा सकता

सुप्रीम कोर्ट ने एक मोटर दुर्घटना मामले में मृत इंजीनियरिंग छात्र के परिवार को राहत देते हुए मुआवजे की राशि बढ़ा दी। अदालत ने कहा कि किसी प्रतिभाशाली इंजीनियरिंग छात्र की संभावित आय का आकलन केवल न्यूनतम मजदूरी के आधार पर नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा तय ₹13.44 लाख के मुआवजे को बढ़ाकर ₹19.25 लाख कर दिया।

हादसे का पृष्ठभूमि

मामला वर्ष 2000 का है। 22 वर्षीय करण पाल सिंह, जो मैकेनिकल इंजीनियरिंग का छात्र था, अपने सहपाठी के साथ मोटरसाइकिल से कॉलेज जा रहा था। इसी दौरान तेज रफ्तार ट्रक ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। गंभीर रूप से घायल करण पाल सिंह की बाद में इलाज के दौरान मौत हो गई।

मृतक की मां मोहिंदर कौर ने मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) के समक्ष मुआवजे की मांग की थी। ट्रिब्यूनल ने ₹2.23 लाख का मुआवजा दिया था, जिसे बाद में हाईकोर्ट ने बढ़ाकर ₹13.44 लाख कर दिया।

याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि मृतक एक होनहार छात्र था। उसने प्लास्टिक इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया था, AutoCAD का प्रमाणपत्र भी हासिल किया था और कंप्यूटर ट्रेनिंग देकर कुछ आय भी अर्जित कर रहा था। परिवार का कहना था कि इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद उसकी आय काफी अधिक हो सकती थी।

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सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मोटर दुर्घटना मामलों में मुआवजे का उद्देश्य केवल आर्थिक नुकसान की भरपाई नहीं, बल्कि परिवार को “न्यायसंगत और उचित राहत” देना भी है।

पीठ ने कहा,

“एक इंजीनियरिंग छात्र की संभावित आय को अकुशल मजदूर की न्यूनतम मजदूरी के बराबर नहीं माना जा सकता।”

कोर्ट ने माना कि मृतक छात्र के पास बेहतर शैक्षणिक योग्यता और उज्ज्वल भविष्य की संभावना थी। इसी आधार पर अदालत ने उसकी मासिक संभावित आय ₹12,000 तय की।

अदालत ने आगे कहा कि हाईकोर्ट ने भविष्य की आय वृद्धि (future prospects) नहीं जोड़कर गलती की। सुप्रीम कोर्ट ने 40% भविष्य संभावनाएं जोड़ते हुए कुल निर्भरता हानि की गणना की।

सुप्रीम कोर्ट ने कुल मुआवजा ₹19,25,070 तय किया। इसमें आश्रितों की आय हानि, संपत्ति हानि, माता-पिता के स्नेह और साथ के नुकसान का मुआवजा, अंतिम संस्कार खर्च और मोटरसाइकिल के नुकसान की राशि शामिल है।

कोर्ट ने 7.5% वार्षिक ब्याज की दर को बरकरार रखा और बीमा कंपनी सहित सभी प्रतिवादियों को आठ सप्ताह के भीतर भुगतान करने का निर्देश दिया।

Case Details:

Case Title: Mohinder Kaur (D) Through L.R. v. Brij Lal Arora and Ors.

Case Number: Civil Appeal arising out of SLP (Civil) No. 580 of 2020

Judges: Justice S. V. N. Bhatti and Justice Vijay Bishnoi

Decision Date: May 12, 2026

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