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नियमित पद के विज्ञापन के बावजूद कॉन्ट्रैक्ट नियुक्ति देना स्पष्ट रूप से अवैध: सर्वोच्च न्यायालय

Rajan Prajapati
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सुप्रीम कोर्ट ने IIIT इलाहाबाद को 2013 भर्ती मामले में असिस्टेंट प्रोफेसर लोकेन्द्र कुमार तिवारी को नियमित नियुक्ति देने का आदेश दिया। - लोकेंद्र कुमार तिवारी बनाम भारत संघ और अन्य

नियमित पद के विज्ञापन के बावजूद कॉन्ट्रैक्ट नियुक्ति देना स्पष्ट रूप से अवैध: सर्वोच्च न्यायालय

करीब 13 साल पुराने भर्ती विवाद में सर्वोच्च न्यायालय ने IIIT इलाहाबाद के एक असिस्टेंट प्रोफेसर को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने कहा कि नियमित पद के लिए निकले विज्ञापन के बावजूद उम्मीदवार को बिना कारण कॉन्ट्रैक्ट पर नियुक्त करना “गैरकानूनी और असंवैधानिक” था।

मामले की पृष्ठभूमि

मामला लोकेन्द्र कुमार तिवारी की नियुक्ति से जुड़ा था। वर्ष 2013 में IIIT इलाहाबाद ने असिस्टेंट प्रोफेसर समेत कई नियमित पदों के लिए विज्ञापन जारी किया था। लोकेन्द्र कुमार तिवारी ने सूचना सुरक्षा (Information Security) क्षेत्र में आवेदन किया और चयन प्रक्रिया में हिस्सा लिया।

रिकॉर्ड के अनुसार, वे सभी आवश्यक योग्यताओं को पूरा करते थे। चयन समिति ने उन्हें इंटरव्यू के बाद नियुक्ति के लिए चुना, लेकिन अन्य चयनित उम्मीदवारों को नियमित नियुक्ति देने के बजाय उन्हें केवल एक साल के कॉन्ट्रैक्ट पर नियुक्त किया गया।

बाद में संस्थान ने पूरी चयन प्रक्रिया रद्द कर दी, जिसके खिलाफ कई उम्मीदवार अदालत पहुंचे। पुनर्विचार के बाद भी संस्थान ने तिवारी को नियमित नियुक्ति देने के बजाय दोबारा कॉन्ट्रैक्ट ऑफर ही जारी किया। इसके बाद उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

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न्यायमूर्ति पंकज मिथल और न्यायमूर्ति एस.वी.एन. भट्टी की पीठ ने कहा कि संस्थान ने नियमित पदों के लिए विज्ञापन जारी किया था और पूरी चयन प्रक्रिया भी नियमित नियुक्ति के लिए ही अपनाई गई थी। ऐसे में केवल एक उम्मीदवार को कॉन्ट्रैक्ट पर रखना उचित नहीं था।

पीठ ने कहा,

“यदि अपीलकर्ता नियमित नियुक्ति के लिए अयोग्य थे, तो उन्हें कॉन्ट्रैक्ट आधार पर भी नियुक्त नहीं किया जा सकता था।” कोर्ट ने यह भी नोट किया कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई कारण नहीं था जिससे यह स्पष्ट हो कि उन्हें बाकी उम्मीदवारों से अलग क्यों माना गया।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अदालत चयन समिति के निर्णय पर अपीलीय अदालत की तरह नहीं बैठती, लेकिन जब समान चयन प्रक्रिया में शामिल उम्मीदवारों के साथ अलग व्यवहार किया जाए और उसका कोई कारण रिकॉर्ड में न हो, तो न्यायिक हस्तक्षेप जरूरी हो जाता है।

कोर्ट ने कहा कि अपीलकर्ता को नियमित नियुक्ति से वंचित करना “स्पष्ट रूप से अवैध और असंवैधानिक” था। अदालत ने IIIT इलाहाबाद को चार सप्ताह के भीतर लोकेन्द्र कुमार तिवारी को असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर नियमित नियुक्ति देने का आदेश दिया।

हालांकि, कोर्ट ने उन्हें पिछला वेतन या अन्य वित्तीय लाभ देने से इनकार किया, लेकिन सेवा की निरंतरता (continuity of service) का लाभ देने का निर्देश दिया। साथ ही कहा गया कि उनकी वरिष्ठता 2013 में चयनित अन्य उम्मीदवारों के बाद रखी जाएगी।

Case Details:-

Case Title: Lokendra Kumar Tiwari v. Union of India & Others

Case Number: Civil Appeal No. 5307 of 2024

Judges: Justice Pankaj Mithal and Justice S. V. N. Bhatti

Decision Date: May 13, 2026

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