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सुप्रीम कोर्ट ने कहा- पुराने डेवलपमेंट एग्रीमेंट की आर्बिट्रेशन क्लॉज नए समझौतों पर भी लागू होगी

Rajan Prajapati
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि नए समझौते में पुराने एग्रीमेंट की सभी शर्तें शामिल हों, तो उसकी आर्बिट्रेशन क्लॉज भी स्वतः लागू होगी। - हिरानी डेवलपर्स बनाम नेहरू नगर समृद्धि सीएचएस लिमिटेड और अन्य

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- पुराने डेवलपमेंट एग्रीमेंट की आर्बिट्रेशन क्लॉज नए समझौतों पर भी लागू होगी

सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि यदि किसी नए समझौते में पुराने एग्रीमेंट की सभी शर्तों को स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है, तो उस पुराने एग्रीमेंट की आर्बिट्रेशन क्लॉज भी नए समझौते का हिस्सा मानी जाएगी। अदालत ने बॉम्बे हाई कोर्ट का आदेश रद्द करते हुए विवाद को मध्यस्थता (Arbitration) के लिए भेज दिया।

मामले की पृष्ठभूमि

मामला रियल एस्टेट कंपनी हिरानी डेवलपर्स और नेहरू नगर समृद्धि सहकारी गृहनिर्माण सोसायटी के सदस्यों के बीच विवाद से जुड़ा था। डेवलपर और सोसाइटी के बीच वर्ष 2011 में एक डेवलपमेंट एग्रीमेंट हुआ था, जिसमें विवाद समाधान के लिए आर्बिट्रेशन क्लॉज शामिल थी।

इसके बाद वर्ष 2023 और 2024 में डेवलपर ने सोसाइटी के कुछ सदस्यों के साथ अलग-अलग स्थायी वैकल्पिक आवास समझौते किए। इन समझौतों की क्लॉज 14 में कहा गया था कि 2012 के डेवलपमेंट एग्रीमेंट की सभी शर्तें इन नए समझौतों का हिस्सा मानी जाएंगी और सभी पक्षों पर बाध्यकारी होंगी।

बाद में कुछ सदस्यों ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत उपभोक्ता आयोग में शिकायतें दाखिल कीं। इसके जवाब में डेवलपर ने मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 21 के तहत नोटिस जारी कर आर्बिट्रेशन प्रक्रिया शुरू करने की मांग की, लेकिन सदस्यों ने इससे इनकार कर दिया। इसके बाद डेवलपर ने धारा 11 के तहत बॉम्बे हाई कोर्ट में आर्बिट्रेटर नियुक्त करने की मांग करते हुए आवेदन दायर किए।

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न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम की धारा 7(5) की उच्च न्यायालय की व्याख्या से असहमति जताई।

अदालत ने कहा कि नए समझौतों में स्पष्ट शब्दों में लिखा गया था कि पुराने डेवलपमेंट एग्रीमेंट की सभी शर्तें और क्लॉज इन समझौतों का हिस्सा होंगी। इसलिए यह केवल “संदर्भ” (reference) का मामला नहीं था, बल्कि पुराने एग्रीमेंट को पूरी तरह नए समझौते में शामिल करने का मामला था।

पीठ ने कहा,

“पार्टियों की मंशा साफ थी कि डेवलपमेंट एग्रीमेंट को पूरी तरह नए समझौतों में शामिल किया जाए। ऐसे में आर्बिट्रेशन क्लॉज भी स्वतः लागू होगी।”

सुप्रीम कोर्ट ने अपने पुराने फैसलों एम.आर. इंजीनियर्स एंड कॉन्ट्रैक्टर्स प्राइवेट लिमिटेड बनाम सोम दत्त बिल्डर्स लिमिटेड। और NBCC (India) लिमिटेड v. ज़िलियन इन्फ्राप्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड का भी हवाला दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि किसी समझौते में कहा गया हो कि पुराने दस्तावेज की सभी शर्तें लागू होंगी, तो आर्बिट्रेशन क्लॉज भी उसी का हिस्सा बन जाती है।

सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाई कोर्ट का 26 जून 2025 का आदेश रद्द कर दिया और कहा कि पक्षों के बीच वैध आर्बिट्रेशन एग्रीमेंट मौजूद है। अदालत ने अधिवक्ता Vishal Kanade को एकमात्र आर्बिट्रेटर नियुक्त किया, जो दोनों पक्षों के विवाद का निपटारा करेंगे।

Case Details

Case Title: Hirani Developers v. Nehru Nagar Samruddhi CHS Ltd. and Another

Case Number: Civil Appeal Nos. arising out of SLP (C) Nos. 38407-38411 of 2025

Judges: Justice Sanjay Kumar and Justice K. Vinod Chandran

Decision Date: May 13, 2026

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