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सुप्रीम कोर्ट ने सावुक्कु शंकर की नजरबंदी चुनौती पर सुनवाई से किया इनकार, हाई कोर्ट जाने को कहा

Shivam
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सुप्रीम कोर्ट ने सावुक्कु शंकर की नजरबंदी के खिलाफ याचिका सुनने से इनकार किया और याचिकाकर्ता को राहत के लिए हाई कोर्ट जाने को कहा। - डी. भरत बनाम तमिलनाडु राज्य और अन्य।

सुप्रीम कोर्ट ने सावुक्कु शंकर की नजरबंदी चुनौती पर सुनवाई से किया इनकार, हाई कोर्ट जाने को कहा

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को यूट्यूबर और पत्रकार सावुक्कु शंकर की तमिलनाडु गुंडा एक्ट के तहत की गई नजरबंदी को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। अदालत ने याचिकाकर्ता को संबंधित हाई कोर्ट जाने की सलाह दी।

मामले की पृष्ठभूमि

यह याचिका शंकर के भतीजे डी. भारथ द्वारा दायर की गई थी। इसमें तीसरी बार जारी की गई नजरबंदी को रद्द करने और बंदी प्रत्यक्षीकरण (हैबियस कॉर्पस) की मांग की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि रोकथाम संबंधी कानूनों का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है।

शंकर को दिसंबर 2025 में भारतीय न्याय संहिता, 2023 के तहत दर्ज एक जबरन वसूली मामले में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद मद्रास उच्च न्यायालय में उनकी चिकित्सा और हिरासत से जुड़ी कई याचिकाएं दाखिल की गईं।

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न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने मामले के गुण-दोष पर विचार करने से फिलहाल परहेज किया।

पीठ ने संकेत दिया कि “याचिकाकर्ता संबंधित हाई कोर्ट का रुख कर सकता है,” और यह भी कहा कि यदि वहां याचिका दायर होती है, तो उस पर शीघ्र सुनवाई की जा सकती है।

मद्रास हाई कोर्ट ने पहले शंकर को स्वास्थ्य आधार पर अंतरिम जमानत दी थी, लेकिन साथ ही कई सख्त शर्तें भी लगाई थीं-जैसे सार्वजनिक बयान देने पर रोक और सीमित आवाजाही।

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इन शर्तों में ढील के लिए जब शंकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे, तो अदालत ने यह कहते हुए राहत देने से इनकार कर दिया कि जमानत मिलने के बाद भी वे ऑनलाइन सामग्री प्रकाशित करते रहे।

मार्च 2026 में, जब शंकर को आत्मसमर्पण करना था, उसी दिन उनके खिलाफ दो नए FIR दर्ज हुए। अप्रैल में उन्हें गिरफ्तार किया गया और उसके तुरंत बाद तमिलनाडु गुंडा अधिनियम के तहत नजरबंदी आदेश जारी कर दिया गया।

याचिकाकर्ता ने दलील दी कि पहले के नजरबंदी आदेश न्यायिक जांच में रद्द हो चुके हैं और इस बार भी प्रक्रिया में खामियां हैं, जैसे जरूरी दस्तावेजों की आपूर्ति न होना।

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए याचिकाकर्ता को हाई कोर्ट जाने की छूट दी और सभी मुद्दों को वहां विचार के लिए खुला छोड़ दिया।

Case Details:

Case Title: D. Bharath v. State of Tamil Nadu & Anr.

Case Number: W.P.(Crl.) No. 142/2026

Judge: Justice Dipankar Datta & Justice Satish Chandra Sharma

Decision Date: April 15, 2026

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