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UAPA मामले में डिफॉल्ट बेल रद्द: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- चार्जशीट दाखिल होने के बाद आरोपियों का अधिकार समाप्त हो गया

Rajan Prajapati
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सुप्रीम कोर्ट ने बनभूलपुरा हिंसा मामले में डिफॉल्ट बेल रद्द करते हुए कहा कि चार्जशीट दाखिल होने के बाद आरोपियों का अधिकार समाप्त हो गया था। - उत्तराखंड राज्य बनाम जावेद सिद्दीकी और अन्य

UAPA मामले में डिफॉल्ट बेल रद्द: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- चार्जशीट दाखिल होने के बाद आरोपियों का अधिकार समाप्त हो गया

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड के बनभूलपुरा हिंसा मामले में बड़ा फैसला देते हुए दो आरोपियों को दी गई डिफॉल्ट बेल रद्द कर दी। अदालत ने कहा कि हाईकोर्ट ने जांच एजेंसी की कार्रवाई को गलत तरीके से “सुस्त” बताया और रिकॉर्ड पर मौजूद तथ्यों की सही तरह से जांच नहीं की।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला FIR नंबर 21/2024 से जुड़ा है, जो 8 फरवरी 2024 को उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित बनभूलपुरा थाने में दर्ज की गई थी। प्राथमिकी में आगजनी, हिंसा, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और पुलिस स्टेशन पर हमले जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे। आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता , गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA), सार्वजनिक संपत्ति को क्षति से बचाने का अधिनियम, 1984 और आर्म्स एक्ट की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।

आरोपी जावेद सिद्दीकी और अरशद अयूब को 9 फरवरी 2024 को गिरफ्तार किया गया था। जांच एजेंसी ने 90 दिन की तय अवधि खत्म होने से पहले UAPA की धारा 43D(2) के तहत जांच पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा था, जिसे ट्रायल कोर्ट ने मंजूर कर लिया। बाद में चार्जशीट 7 जुलाई 2024 को विस्तारित अवधि के भीतर दाखिल कर दी गई।

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उत्तराखंड हाईकोर्ट ने जनवरी 2025 में आरोपियों को डिफॉल्ट बेल देते हुए कहा था कि जांच में पर्याप्त प्रगति नहीं हुई और जांच अधिकारी ने मामले को तेजी से आगे नहीं बढ़ाया। हाईकोर्ट ने यह भी टिप्पणी की थी कि तीन महीने में केवल कुछ ही गवाहों के बयान दर्ज किए गए।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने हाईकोर्ट की टिप्पणियों पर असहमति जताई। अदालत ने कहा,

“हाईकोर्ट ने जांच एजेंसी पर अनावश्यक आरोप लगाए और मामले की गंभीरता को नजरअंदाज किया।”

पीठ ने कहा कि यह मामला व्यापक हिंसा, आगजनी और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से जुड़ा था, जिसमें बड़ी संख्या में आरोपी और गवाह शामिल थे। अदालत के अनुसार, रिकॉर्ड से स्पष्ट था कि 90 दिनों के भीतर 65 गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके थे, इसलिए जांच को धीमा नहीं कहा जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि आरोपियों ने समय विस्तार के आदेशों को तुरंत चुनौती नहीं दी और सितंबर 2024 तक इंतजार किया। तब तक जांच पूरी हो चुकी थी और चार्जशीट दाखिल हो चुकी थी। अदालत ने कहा कि इस स्थिति में आरोपियों का डिफॉल्ट बेल मांगने का अधिकार समाप्त हो गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का आदेश रद्द करते हुए आरोपियों को दो सप्ताह के भीतर ट्रायल कोर्ट के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि आरोपी नियमित जमानत के लिए आवेदन करने के लिए स्वतंत्र होंगे और उस पर कानून के अनुसार विचार किया जाएगा।

Case Details

Case Title: State of Uttarakhand v. Javed Siddiqui & Another

Case Number: Criminal Appeal arising out of SLP (Crl.) No. 908 of 2026

Judges: Justice Vikram Nath and Justice Sandeep Mehta

Decision Date: May 4, 2026

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