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सुप्रीम कोर्ट ने DDA भूमि विवाद में नीलामी खरीदार को ₹164.91 करोड़ वापस करने का आदेश दिया, हस्तांतरण विलेख रद्द किया।

Rajan Prajapati
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सुप्रीम कोर्ट ने DDA विवाद में समरी जजमेंट की सीमाएं स्पष्ट करते हुए हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा और अपील खारिज कर दी। - रिलायंस एमिनेंट ट्रेडिंग एंड कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड बनाम दिल्ली विकास प्राधिकरण

सुप्रीम कोर्ट ने DDA भूमि विवाद में नीलामी खरीदार को ₹164.91 करोड़ वापस करने का आदेश दिया, हस्तांतरण विलेख रद्द किया।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) के तहत “समरी जजमेंट” के उपयोग पर स्पष्टता दी है। कोर्ट ने कहा कि न्याय में संतुलन बनाए रखना जरूरी है—न तो अत्यधिक देरी और न ही जल्दबाजी।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला रिलायंस एमिनेंट ट्रेडिंग एंड कमर्शियल प्रा. लिमिटेड बनाम दिल्ली विकास प्राधिकरण से जुड़ा है।

DDA ने वर्ष 2007 में एक सार्वजनिक नीलामी की घोषणा की थी, जिसमें जसौला, नई दिल्ली स्थित एक व्यावसायिक प्लॉट भी शामिल था। इस प्लॉट का उपयोग “मल्टी-लेवल पार्किंग/कॉमर्शियल (नो मल्टीप्लेक्स)” के रूप में निर्धारित था।

अपीलकर्ता कंपनी ने इस प्लॉट के लिए लगभग ₹164.91 करोड़ की बोली लगाई थी। बाद में इस लेन-देन से जुड़े विवाद के चलते मामला अदालत में पहुंचा।

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दिल्ली हाई कोर्ट में लंबित इस वाणिज्यिक विवाद में अपीलकर्ता ने CPC के Order XIII-A के तहत “समरी जजमेंट” की मांग की थी।

समरी जजमेंट का मतलब होता है कि बिना पूरी ट्रायल प्रक्रिया के, केवल दस्तावेज़ों और स्पष्ट तथ्यों के आधार पर फैसला देना।

हालांकि, हाई कोर्ट ने 9 जून 2025 के आदेश में इस आवेदन को खारिज कर दिया। इसी आदेश को चुनौती देते हुए अपीलकर्ता सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।

मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति अतुल एस. चंदुरकरकी पीठ ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की।

कोर्ट ने कहा:

“न्याय में देरी भी नुकसानदायक है और जल्दबाजी भी। इन दोनों के बीच संतुलन बनाना जरूरी है।”

पीठ ने स्पष्ट किया कि Order XIII-A के प्रावधानों को लागू करते समय अदालत को सावधानी बरतनी चाहिए। यह प्रावधान केवल उन्हीं मामलों में इस्तेमाल होना चाहिए जहां विवाद में कोई वास्तविक तथ्यात्मक मुद्दा (real triable issue) न हो।

कोर्ट ने यह भी कहा कि समरी जजमेंट एक अपवाद (exception) है, सामान्य नियम नहीं। इसे तभी लागू किया जा सकता है जब मामला स्पष्ट हो और विस्तृत सुनवाई की आवश्यकता न हो।

इस मामले का मुख्य प्रश्न यह था कि क्या अपीलकर्ता द्वारा मांगा गया समरी जजमेंट उचित था या नहीं।

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सुप्रीम कोर्ट ने इस पर विचार करते हुए यह देखा कि क्या मामले में ऐसे तथ्य या विवाद मौजूद हैं जिनकी जांच ट्रायल के दौरान आवश्यक है।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की परिस्थितियों और रिकॉर्ड को देखते हुए यह निष्कर्ष निकाला कि समरी जजमेंट के लिए आवश्यक शर्तें पूरी नहीं होती थीं।

कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश को सही ठहराया और अपीलकर्ता की अपील को खारिज कर दिया।

इस प्रकार, समरी जजमेंट का आवेदन अस्वीकार ही बना रहा और मामला नियमित ट्रायल के लिए आगे बढ़ेगा।

Case details

Case Title: Reliance Eminent Trading and Commercial Pvt. Ltd. vs Delhi Development Authority

Judges: Justice J.K. Maheshwari and Justice Atul S. Chandurkar

Decision Date: 29 April 2026

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