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TNPSC भर्ती विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा, जल्द पूरी होगी चयन प्रक्रिया

Zaved Khan
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सुप्रीम कोर्ट ने TNPSC की मोटर वाहन निरीक्षक भर्ती में मद्रास हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए सभी पात्र उम्मीदवारों को शामिल कर चयन प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने का निर्देश दिया। - S. Senthil Kumaran Bose v. State of Tamil Nadu & Others (along with connected matters)

TNPSC भर्ती विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा, जल्द पूरी होगी चयन प्रक्रिया

सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु लोक सेवा आयोग (TNPSC) की मोटर वाहन निरीक्षक (ग्रेड-II) भर्ती से जुड़े लंबे समय से चल रहे विवाद पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश को सही ठहराया, जिसके तहत पात्र उम्मीदवारों के अनुभव प्रमाणपत्रों की दोबारा जांच के बाद चयन प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का निर्देश दिया गया था।

न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति अतुल एस. चांदूरकर की पीठ ने 15 जून 2026 को यह फैसला सुनाया।

मामले की पृष्ठभूमि

विवाद की शुरुआत 14 फरवरी 2018 को जारी TNPSC की अधिसूचना से हुई थी, जिसके माध्यम से मोटर वाहन निरीक्षक ग्रेड-II के 113 पदों पर भर्ती की जानी थी।

भर्ती प्रक्रिया के दौरान उम्मीदवारों द्वारा प्रस्तुत कार्यशाला (वर्कशॉप) अनुभव प्रमाणपत्रों की वैधता को लेकर कई याचिकाएँ दायर हुईं। प्रारंभिक चयन सूची में शामिल 32 उम्मीदवारों की नियुक्तियाँ भी बाद में न्यायिक जांच के दायरे में आ गईं।

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मद्रास हाईकोर्ट ने पहले चरण की सुनवाई में चयन प्रक्रिया को रद्द करते हुए सभी उम्मीदवारों के अनुभव प्रमाणपत्रों का नए सिरे से सत्यापन कराने का निर्देश दिया था। बाद में यह विवाद उन कार्यशालाओं की मान्यता से जुड़ गया, जिनकी नवीनीकरण प्रक्रिया लंबित थी।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद क्या हुआ

मद्रास हाईकोर्ट की खंडपीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह यह निर्णय करे कि लंबित नवीनीकरण वाली कार्यशालाओं को पूर्व प्रभाव से मान्यता दी जा सकती है या नहीं।

इसके बाद मोटर व्हीकल्स मेंटेनेंस विभाग ने सभी संबंधित कार्यशालाओं और उम्मीदवारों के अनुभव प्रमाणपत्रों की दोबारा जांच की। इस प्रक्रिया में कई ऐसे उम्मीदवार पात्र पाए गए जिन्हें पहले अनुभव की कमी के आधार पर बाहर कर दिया गया था।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि पुनः सत्यापन के बाद कई उम्मीदवारों के पास एक वर्ष से अधिक का वैध कार्यशाला अनुभव मौजूद था।

पीठ ने कहा कि संबंधित विभाग द्वारा अनुभव प्रमाणपत्रों का सत्यापन और पुनः सत्यापन किया जा चुका है तथा पात्र पाए गए उम्मीदवारों को चयन प्रक्रिया में शामिल किए जाने पर विचार किया जाना चाहिए।

अदालत ने यह भी माना कि उम्मीदवारों को केवल इसलिए नुकसान नहीं उठाना चाहिए क्योंकि कार्यशालाओं की मान्यता के नवीनीकरण में प्रशासनिक देरी हुई थी।

पीठ ने कहा, “उम्मीदवारों की कोई गलती नहीं थी। ऐसी परिस्थितियों में उन्हें रोजगार के अवसर से वंचित नहीं किया जा सकता।”

अदालत के अनुसार, हाईकोर्ट द्वारा दिए गए निर्देश सभी उम्मीदवारों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करते हैं और अधिक योग्य उम्मीदवारों को चयन प्रक्रिया में भाग लेने का अवसर प्रदान करते हैं।

2021 की सूची में शामिल उम्मीदवारों की दलील खारिज

2021 में जारी 226 उम्मीदवारों की सूची में शामिल कुछ अभ्यर्थियों ने दलील दी थी कि पूरी चयन प्रक्रिया को दोबारा शुरू करने की आवश्यकता नहीं थी।

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि केवल किसी चयन सूची में शामिल हो जाना नियुक्ति का अधिकार नहीं देता।

पीठ ने स्पष्ट किया कि जब कुछ उम्मीदवार अपनी गलती के बिना चयन प्रक्रिया से बाहर रह गए हों, तब सभी पात्र उम्मीदवारों को समान आधार पर प्रतिस्पर्धा का अवसर दिया जाना चाहिए।

PSTM कोटा और अंकों के खुलासे पर भी राहत नहीं

TNPSC ने उन निर्देशों को भी चुनौती दी थी जिनमें 'पर्सन्स स्टडीड इन तमिल मीडियम' (PSTM) कोटे के लाभ और चयन क्षेत्र से बाहर रहने वाले उम्मीदवारों के अंक बताने का आदेश दिया गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में भी हाईकोर्ट के निष्कर्षों को बरकरार रखा।

अदालत ने कहा कि यदि किसी शैक्षणिक संस्थान के प्रमुख द्वारा यह प्रमाणित किया गया है कि उम्मीदवार ने तमिल माध्यम में पढ़ाई की है, तो वह प्रमाणपत्र पर्याप्त है। भर्ती अधिसूचना में किसी अतिरिक्त प्रमाणन की शर्त नहीं थी।

अंकों के खुलासे के मुद्दे पर अदालत ने माना कि वर्षों से विवादों में घिरी भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना सार्वजनिक हित में है।

फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने सभी अपीलों का निस्तारण करते हुए मद्रास हाईकोर्ट के प्रमुख निर्देशों को बरकरार रखा। अदालत ने कहा कि पुनः सत्यापन में पात्र पाए गए उम्मीदवारों को अन्य योग्य अभ्यर्थियों के साथ चयन प्रक्रिया में शामिल किया जाए।

साथ ही TNPSC को निर्देश दिया गया कि वह 2018 से लंबित भर्ती प्रक्रिया को हाईकोर्ट द्वारा निर्धारित समयसीमा के अनुसार जल्द से जल्द पूरा करे।

Case Details:

Case Title: S. Senthil Kumaran Bose v. State of Tamil Nadu & Others (along with connected matters)

Case Number: Civil Appeals arising out of SLP (C) No. 7906 of 2024 and connected matters

Judges: Justice J.K. Maheshwari and Justice Atul S. Chandurkar

Decision Date: June 15, 2026

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