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सुप्रीम कोर्ट ने विदेशी कोर्ट के करोड़ों डॉलर डिक्री पर रोक लगाई, कहा- बिना पूरा ट्रायल दिया फैसला भारत में लागू नहीं होगा

Rajan Prajapati
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बिना उचित सुनवाई और ट्रायल दिए विदेशी अदालत का summary judgment भारत में लागू नहीं किया जा सकता। - मेसर ग्रिशेम जीएमबीएच (अब एयर लिक्विड Deutschland जीएमबीएच) बनाम गोयल एमजी गैसेस प्राइवेट लिमिटेड

सुप्रीम कोर्ट ने विदेशी कोर्ट के करोड़ों डॉलर डिक्री पर रोक लगाई, कहा- बिना पूरा ट्रायल दिया फैसला भारत में लागू नहीं होगा

सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में विदेशी अदालत के उस आदेश को भारत में लागू करने से इनकार कर दिया, जिसमें भारतीय कंपनी पर लाखों डॉलर चुकाने का निर्देश दिया गया था। अदालत ने कहा कि विदेशी कोर्ट ने मामले का निपटारा summary judgment के जरिए किया, जबकि विवादित तथ्यों पर पूरा ट्रायल जरूरी था।

कोर्ट ने साफ कहा,

“जब गंभीर विवादित तथ्य मौजूद हों, तब पक्षकार को बचाव का पूरा अवसर दिया जाना चाहिए।”

मामले की पृष्ठभूमि

यह विवाद जर्मनी की कंपनी Messer Griesheim GmbH और भारतीय कंपनीगोयल एमजी गैसेस प्राइवेट लिमिटेड के बीच संयुक्त उद्यम समझौते से शुरू हुआ था। दोनों कंपनियों ने भारत में औद्योगिक गैस कारोबार के लिए साझेदारी की थी।

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बाद में भारतीय कंपनी ने विदेशी बैंक से कर्ज लिया, जिसके लिए विदेशी कंपनी ने गारंटी दी। जब भारतीय कंपनी कर्ज नहीं चुका सकी, तो बैंक ने गारंटी invoke की और विदेशी कंपनी ने रकम जमा कर दी। इसके बाद उसने भारतीय कंपनी से वसूली के लिए इंग्लैंड की अदालत में मुकदमा दायर किया।

पहले इंग्लैंड की अदालत ने default judgment दिया। बाद में उसे हटाकर summary judgment पारित किया गया, जिसमें भारतीय कंपनी को भुगतान का आदेश दिया गया।

इसके बाद विदेशी कंपनी ने दिल्ली हाईकोर्ट में उस डिक्री को भारत में लागू कराने की मांग की।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भारतीय कंपनी ने अपने बचाव में कई महत्वपूर्ण दस्तावेज पेश किए थे, जिनमें बैलेंस शीट, बोर्ड मीटिंग रिकॉर्ड और पक्षों के बीच समझौतों के दावे शामिल थे।

अदालत ने माना कि ये मुद्दे ऐसे थे जिन पर गवाही, जिरह और विस्तृत सुनवाई जरूरी थी।

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बेंच ने कहा,

“जहां वास्तविक विवादित प्रश्न हों, वहां summary disposal उचित नहीं माना जा सकता।”

कोर्ट ने यह भी कहा कि केवल तेज प्रक्रिया अपनाकर किसी पक्ष का बचाव अधिकार खत्म नहीं किया जा सकता।

मामले में विदेशी ऋण और RBI अनुमति से जुड़े मुद्दे भी उठे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उस समय लागू कानून के तहत विदेशी डिक्री के enforcement चरण में नियामकीय अनुमति आवश्यक हो सकती है। हालांकि मुख्य फैसला प्राकृतिक न्याय और उचित सुनवाई के आधार पर दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट की Division Bench का फैसला बरकरार रखा और विदेशी अदालत के summary judgment को भारत में लागू करने से इनकार कर दिया।

अदालत ने अपील खारिज करते हुए कहा कि यह विदेशी निर्णय Section 13 CPC की कसौटी पर खरा नहीं उतरता, क्योंकि प्रतिवादी को अपना पक्ष पूरी तरह रखने का अवसर नहीं मिला।

Case Details

Case Title: Messer Griesheim GmbH (now Air Liquide Deutschland GmbH) v. Goyal MG Gases Pvt Ltd

Case Number: Civil Appeal arising out of SLP (C) No. 4774 of 2023

Court: Supreme Court of India

Bench: Justice Alok Aradhe; Justice Pamidighantam Sri Narasimha

Date: April 21, 2026

APPELLANT :Senior Advocate Dr AM Singhvi & Mohna AOR

RESPONDENT: Senior Advocate P Chidambaram, Anil Kumar AOR, Simran Mehta, Ramesh Allanki, and Aruna Gupta

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