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प्रेम संबंध में कथित अपमान के बाद युवती की आत्महत्या: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने मुख्य आरोपी के खिलाफ ट्रायल को दी मंजूरी

Shivam
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जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने युवती की आत्महत्या मामले में मुख्य आरोपी के खिलाफ ट्रायल जारी रखने का आदेश दिया, जबकि साक्ष्य के अभाव में सह-आरोपी को राहत प्रदान की। - खालिद फ़ैयाज़ अहंगर और अन्य। बनाम केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर

प्रेम संबंध में कथित अपमान के बाद युवती की आत्महत्या: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने मुख्य आरोपी के खिलाफ ट्रायल को दी मंजूरी

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने एक युवती की आत्महत्या से जुड़े मामले में अहम फैसला सुनाते हुए मुख्य आरोपी के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने (Abetment of Suicide) के आरोपों पर चल रही आपराधिक कार्यवाही को बरकरार रखा है। हालांकि, अदालत ने सह-आरोपी के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य न होने के कारण उसके विरुद्ध एफआईआर और संबंधित कार्यवाही रद्द कर दी।

मामले की पृष्ठभूमि

अभियोजन के अनुसार, मृतका और याचिकाकर्ता खालिद फ़ैयाज़ अहंगर के बीच करीब पांच वर्षों से संबंध थे। जांच में यह आरोप सामने आया कि मार्च 2023 में मृतका को पता चला कि आरोपी किसी अन्य लड़की में रुचि लेने लगा है। इसके बाद वह उससे बात करने और रिश्ते को लेकर स्पष्टता मांगने उसके घर पहुंची।

जांच एजेंसी का दावा है कि वहां उसके साथ कथित रूप से अपमानजनक व्यवहार किया गया, उसके चरित्र पर टिप्पणी की गई और उसे घर से बाहर निकाल दिया गया। इसके अगले दिन उसने कथित तौर पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।

न्यायमूर्ति संजय परिहार ने कहा कि आरोप तय करने के चरण में अदालत को साक्ष्यों का विस्तृत मूल्यांकन नहीं करना होता, बल्कि यह देखना होता है कि क्या रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री मुकदमे की सुनवाई के लिए पर्याप्त संदेह उत्पन्न करती है।

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अदालत ने कहा, “अभियोजन का मामला केवल असफल प्रेम संबंध या संबंध समाप्त करने तक सीमित नहीं है।”

न्यायालय ने यह भी नोट किया कि अभियोजन के अनुसार मृतका को कथित रूप से अपमानित किया गया, उसके चरित्र पर सवाल उठाए गए और बाद में उसकी मानसिक स्थिति खराब होने की जानकारी मिलने के बावजूद आरोपी ने कथित उदासीनता दिखाई।

अदालत ने माना कि इन आरोपों की सत्यता और उनका कानूनी प्रभाव ट्रायल के दौरान साक्ष्यों के आधार पर तय किया जाएगा।

हाईकोर्ट ने कहा कि जांच में एकत्र सामग्री प्रथम दृष्टया मुख्य आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 306 के तहत मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त आधार प्रदान करती है। इसलिए उसके खिलाफ ट्रायल जारी रहेगा।

हालांकि, अदालत ने पाया कि दूसरे याचिकाकर्ता के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने या सहायता करने का कोई विशिष्ट आरोप या ठोस सामग्री रिकॉर्ड पर नहीं है। इस आधार पर उसके खिलाफ एफआईआर और संबंधित कार्यवाही रद्द कर दी गई।

इसी के साथ अदालत ने याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए ट्रायल कोर्ट को मुख्य आरोपी के खिलाफ कानून के अनुसार आगे की सुनवाई जारी रखने का निर्देश दिया।

Case Details

Case Title: Khalid Fayaz Ahanger and Others v. Union Territory of Jammu & Kashmir

Case Number: CRM(M) No. 340/2023

Judge: Justice Sanjay Parihar

Decision Date: 29 May 2026

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