गुवाहाटी हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी भूमि पर वास्तविक कब्जे को लेकर कोई वास्तविक विवाद नहीं है, तो दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 145 के तहत कार्यवाही शुरू नहीं की जा सकती। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में मजिस्ट्रेट के पास अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) ही नहीं बनता। इसी आधार पर कोर्ट ने अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट द्वारा शुरू की गई धारा 144, 145 और 146 की पूरी कार्यवाही रद्द कर दी।
मामले की पृष्ठभूमि
मामला एक भूमि विवाद से जुड़ा था। शिकायतकर्ता ने अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट, हैलाकांडी के समक्ष आवेदन देकर दावा किया कि वह विवादित भूमि का वैध मालिक है और उसे उत्तराधिकार के आधार पर संपत्ति मिली है। शिकायत में कहा गया कि भूमि पर दुकानें और अन्य निर्माण किए गए थे तथा बाद में किराया और कब्जे को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ। यह भी आरोप लगाया गया कि स्थिति से शांति भंग होने की आशंका है।
पुलिस रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट ने CrPC की धारा 146 के तहत विवादित भूमि को संलग्न (Attach) करने का आदेश दिया और धारा 145 की कार्यवाही शुरू कर दी। इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई।
न्यायमूर्ति संजीव कुमार शर्मा ने यह जांचा कि क्या इस मामले में धारा 145 CrPC लागू करने की आवश्यक शर्तें वास्तव में मौजूद थीं।
अदालत ने पाया कि शिकायतकर्ता की अपनी याचिका में यह स्वीकार किया गया था कि याचिकाकर्ता विवादित भूमि पर पहले से कब्जे में था। जब कब्जे का तथ्य ही विवादित नहीं था, तब धारा 145 की कार्यवाही शुरू करने का कोई आधार नहीं बनता।
पीठ ने कहा, "रिकॉर्ड से यह स्वीकार किया गया तथ्य है कि याचिकाकर्ता विवादित भूमि पर कब्जे में है। इसलिए वास्तविक कब्जे को लेकर कोई bona fide (वास्तविक) विवाद मौजूद नहीं है।"
कोर्ट ने समझाया कि धारा 145 CrPC का उद्देश्य केवल यह तय करना है कि विवादित संपत्ति पर वास्तविक कब्जा किसके पास था, ताकि शांति भंग होने की स्थिति से निपटा जा सके। लेकिन यदि कब्जे का प्रश्न ही विवादित न हो, तो मजिस्ट्रेट के पास इस धारा के तहत कार्यवाही करने का अधिकार नहीं रहता।
पीठ ने आगे कहा, "धारा 145 के तहत अधिकार क्षेत्र ग्रहण करने के लिए आवश्यक मूल शर्त इस मामले में मौजूद नहीं थी। इसलिए पूरी कार्यवाही अधिकार क्षेत्र के बिना की गई थी।"
अदालत ने यह भी कहा कि ऐसी परिस्थितियों में कार्यवाही जारी रहने देना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग (Abuse of Process of Law) होगा।
गुवाहाटी हाई कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट, हैलाकांडी के समक्ष लंबित धारा 144, 145 और 146 CrPC की पूरी कार्यवाही रद्द कर दी। अदालत ने माना कि जब वास्तविक कब्जे को लेकर कोई वास्तविक विवाद ही नहीं था, तब धारा 145 CrPC के तहत कार्यवाही शुरू करने की कानूनी शर्तें पूरी नहीं होती थीं।
इसलिए विवादित कार्यवाही कानूनन टिक नहीं सकती।
Case Details
Case Title: Zahirul Haque Laskar v. The State of Assam & Anr.
Case Number: Crl. Pet. No. 1292/2023
Judge: Justice Sanjeev Kumar Sharma
Decision Date: 26 June 2026















