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गुवाहाटी हाई कोर्ट ने असम सरकार को कम्युनिटी हेल्थ प्रोफेशनल्स पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले को लागू करने और कैडर व सर्विस फ़्रेमवर्क को पूरा करने का निर्देश दिया है।

Zaved Khan
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गुवाहाटी हाई कोर्ट ने असम सरकार को निर्देश दिया है कि वह 90 दिनों के भीतर कम्युनिटी हेल्थ प्रोफेशनल्स के स्टेटस, कैडर, कर्तव्यों और सेवा शर्तों पर सिफारिशों को अंतिम रूप देकर सुप्रीम कोर्ट के 2023 के फैसले को पूरी तरह लागू करे। - बिक्रम पाठक और 608 अन्य बनाम असम राज्य और 4 अन्य

गुवाहाटी हाई कोर्ट ने असम सरकार को कम्युनिटी हेल्थ प्रोफेशनल्स पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले को लागू करने और कैडर व सर्विस फ़्रेमवर्क को पूरा करने का निर्देश दिया है।

गौहाटी हाईकोर्ट ने असम सरकार को निर्देश दिया है कि वह कम्युनिटी हेल्थ प्रोफेशनल्स से जुड़े मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 2023 के फैसले को पूरी तरह लागू करने की प्रक्रिया दोबारा शुरू करे। अदालत ने कहा कि राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद एक समिति गठित कर प्रक्रिया शुरू तो की थी, लेकिन बिना किसी स्पष्ट कारण के उसे अधूरा छोड़ दिया।

न्यायमूर्ति सौमित्र सैकिया ने कहा कि अब सरकार उस समिति को पुनर्जीवित करे और कम्युनिटी हेल्थ प्रोफेशनल्स की स्थिति, कर्तव्यों, अलग कैडर, वेतन, सेवा शर्तों और पदोन्नति जैसे मुद्दों पर ठोस सिफारिशें तैयार करे।

मामले की पृष्ठभूमि

याचिका 600 से अधिक ऐसे स्वास्थ्यकर्मियों ने दायर की थी जिन्होंने असम ग्रामीण स्वास्थ्य विनियामक प्राधिकरण अधिनियम, 2004 के तहत मेडिसिन और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा में डिप्लोमा (DMRHC) कोर्स पूरा किया था। प्रशिक्षण के बाद उन्हें Rural Health Practitioners के रूप में पंजीकृत किया गया और राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (NRHM) के तहत सेवाएं दी गईं।

बाद में वर्ष 2014 में गौहाटी हाईकोर्ट ने 2004 के कानून को यह कहते हुए असंवैधानिक घोषित कर दिया कि राज्य विधानसभा के पास एलोपैथिक चिकित्सा शिक्षा के मानकों पर कानून बनाने का अधिकार नहीं था।

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इसके बाद राज्य सरकार ने Assam Community Health Professionals (Registration and Competency) Act, 2015 लागू किया, जिसके तहत इन स्वास्थ्यकर्मियों को Community Health Officers के रूप में नया नाम दिया गया। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि इससे उनकी पेशेवर पहचान और पहले से प्राप्त कार्यक्षेत्र सीमित हो गया।

पक्षकारों की दलीलें

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने तर्क दिया कि जिस समय उन्होंने कोर्स में प्रवेश लिया और प्रशिक्षण पूरा किया, उस समय 2004 का कानून प्रभावी था। इसलिए बाद में कानून रद्द होने से उनकी योग्यता और उससे जुड़े अधिकार समाप्त नहीं किए जा सकते।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने स्वयं इस कोर्स को संचालित किया, विद्यार्थियों का चयन किया और बाद में उन्हें नियुक्त भी किया। ऐसे में वैध अपेक्षा (Legitimate Expectation) और Promissory Estoppel जैसे सिद्धांतों के आधार पर सरकार उनके अधिकारों की रक्षा करने के लिए बाध्य है।

दूसरी ओर, राज्य सरकार ने कहा कि 2015 का कानून इन्हीं स्वास्थ्यकर्मियों के हितों की सुरक्षा के लिए बनाया गया था और वे वर्तमान में National Health Mission के तहत Community Health Officers के रूप में कार्यरत हैं। इसलिए उनके रोजगार या सम्मान को लेकर कोई वास्तविक खतरा नहीं है।

अदालत की टिप्पणी

हाईकोर्ट ने 24 जनवरी 2023 को दिए गए सुप्रीम कोर्ट के फैसले का विस्तार से अध्ययन किया। अदालत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 2015 के कानून की वैधता बरकरार रखी थी, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया था कि Community Health Professionals ग्रामीण क्षेत्रों में उसी प्रकार स्वास्थ्य सेवाएं जारी रख सकते हैं जैसी वे पहले Rural Health Practitioners के रूप में देते थे।

न्यायमूर्ति सौमित्र सैकिया ने कहा, "याचिकाकर्ताओं द्वारा प्राप्त डिप्लोमा, प्रशिक्षण और व्यावहारिक अनुभव को केवल इसलिए समाप्त नहीं माना जा सकता क्योंकि बाद में कानून असंवैधानिक घोषित किया गया।"

अदालत ने यह भी कहा कि इन स्वास्थ्यकर्मियों ने किसी प्रकार की कोई गलती नहीं की थी और न ही वे उस पुराने मुकदमे के पक्षकार थे जिसमें 2004 के कानून को चुनौती दी गई थी।

पीठ ने आगे कहा, "राज्य सरकार केवल नाम बदल जाने के आधार पर इन प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों को वही स्वास्थ्य सेवाएं देने से नहीं रोक सकती जो वे पहले ग्रामीण स्वास्थ्य प्रैक्टिशनर के रूप में प्रदान कर रहे थे।"

अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि ग्रामीण असम में प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका आज भी अत्यंत महत्वपूर्ण है और दूरदराज़ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने में उनका महत्वपूर्ण योगदान है।

अदालत का फैसला

हाईकोर्ट ने याचिका का आंशिक रूप से निस्तारण करते हुए असम सरकार को पहले से गठित समिति का कार्य तत्काल दोबारा शुरू करने का निर्देश दिया।

अदालत ने कहा कि समिति Community Health Professionals के लिए अलग कैडर, वेतनमान, ग्रेड, सेवा लाभ, स्वास्थ्य सुविधाएं, पदोन्नति के अवसर तथा अन्य सेवा शर्तों पर विस्तृत सिफारिशें तैयार करे।

कोर्ट ने समिति को प्रमाणित प्रति प्राप्त होने की तिथि से 90 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपने का निर्देश दिया। इसके बाद राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 2023 के निर्णय के अनुरूप आवश्यक कदम उठाकर उन सिफारिशों पर कार्रवाई करने के लिए कहा गया।

इसी निर्देश के साथ याचिका का निस्तारण कर दिया गया।

Case Details:

Case Title: Bikram Pathak and 608 Others v. State of Assam and 4 Others

Case Number: WP(C)/2581/2024

Judge: Justice Soumitra Saikia

Decision Date: 29 May 2026

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