गौहाटी हाईकोर्ट ने ग्रामीण स्वास्थ्य क्षेत्र में डिप्लोमा प्राप्त 609 अभ्यर्थियों की याचिका खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि डिप्लोमा इन मेडिसिन एंड रूरल हेल्थ केयर पूरा कर लेने और कम्युनिटी हेल्थ प्रोफेशनल के रूप में पंजीकरण हो जाने मात्र से सरकारी नौकरी पर दावा नहीं किया जा सकता।
अदालत ने कहा कि किसी शैक्षणिक योग्यता को कानून द्वारा मान्यता मिलना और सरकारी सेवा में नियुक्ति का अधिकार मिलना, दोनों अलग-अलग बातें हैं।
मामले की पृष्ठभूमि
यह याचिका बिक्रम पाठक और 608 अन्य अभ्यर्थियों ने दायर की थी। सभी याचिकाकर्ताओं ने असम रूरल हेल्थ रेगुलेटरी अथॉरिटी अधिनियम, 2004 के तहत संचालित डिप्लोमा कोर्स इन मेडिसिन एंड रूरल हेल्थ केयर पूरा किया था। इसके बाद उनका पंजीकरण असम कम्युनिटी हेल्थ प्रोफेशनल्स (रजिस्ट्रेशन एंड कॉम्पिटेंसी) अधिनियम, 2015 के तहत कम्युनिटी हेल्थ प्रोफेशनल के रूप में किया गया।
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उन्होंने राज्य की ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए निर्धारित वैधानिक पाठ्यक्रम पूरा किया है, इसलिए उन्हें सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में नियुक्ति या कम से कम नियुक्ति पर विचार किए जाने का अधिकार मिलना चाहिए।
राज्य सरकार ने इस दलील का विरोध करते हुए कहा कि न तो 2004 का अधिनियम और न ही 2015 का अधिनियम ऐसे डिप्लोमा धारकों को सरकारी नौकरी का कोई स्वचालित अधिकार प्रदान करता है।
अदालत की टिप्पणी
न्यायमूर्ति सौमित्र सैकिया ने संबंधित कानूनों का परीक्षण करते हुए कहा कि इन अधिनियमों का उद्देश्य पाठ्यक्रम, पंजीकरण और पेशेवर योग्यता को विनियमित करना है। इनमें कहीं भी यह प्रावधान नहीं है कि डिप्लोमा प्राप्त करने वाला प्रत्येक व्यक्ति सरकारी सेवा में नियुक्ति का दावा कर सकता है।
पीठ ने कहा,
"किसी योग्यता को वैधानिक मान्यता मिल जाने भर से सरकारी सेवा में नियुक्ति का कानूनी अधिकार उत्पन्न नहीं हो जाता।"
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकारी नियुक्तियां संबंधित भर्ती नियमों और संविधान के प्रावधानों के अनुसार ही की जाती हैं। केवल पात्रता प्राप्त कर लेने से नियुक्ति का अधिकार स्वतः नहीं मिल जाता।
कोर्ट ने कहा कि न्यायालय सरकार को नए पद सृजित करने या बिना किसी वैधानिक दायित्व के नियुक्तियां करने का निर्देश नहीं दे सकता। न्यायिक समीक्षा का उद्देश्य केवल पहले से मौजूद कानूनी अधिकारों की रक्षा करना है, नए अधिकार उत्पन्न करना नहीं।
फैसला
इन सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद गौहाटी हाईकोर्ट ने माना कि याचिकाकर्ताओं के पक्ष में ऐसा कोई वैधानिक या संवैधानिक अधिकार नहीं है, जिसके आधार पर राज्य सरकार को उनकी नियुक्ति का निर्देश दिया जा सके।
इसी आधार पर अदालत ने याचिका खारिज कर दी और कहा कि कम्युनिटी हेल्थ प्रोफेशनल के रूप में पंजीकरण तथा ग्रामीण स्वास्थ्य डिप्लोमा प्राप्त करना अपने-आप में सरकारी नौकरी का अधिकार नहीं देता। सरकारी भर्ती संबंधित सेवा नियमों और राज्य सरकार की भर्ती प्रक्रिया के अनुसार ही की जाएगी।
Case Details:
Case Title: Bikram Pathak and 608 Others v. State of Assam and 4 Others
Case Number: WP(C)/2581/2024
Judge: Justice Soumitra Saikia
Decision Date: 29 May 2026














