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अनुच्छेद 142 के तहत सुप्रीम कोर्ट ने खत्म की शादी, पति को ₹50 लाख स्थायी गुजारा भत्ता देने का निर्देश

CB News Desk
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सुप्रीम कोर्ट ने एक आर्मी अधिकारी और डॉक्टर पत्नी की शादी को “अपरिवर्तनीय रूप से टूट चुका” मानते हुए आर्टिकल 142 के तहत तलाक दिया और ₹50 लाख स्थायी गुजारा भत्ता तय किया। - सलिल धवन बनाम प्रियांशी घई

अनुच्छेद 142 के तहत सुप्रीम कोर्ट ने खत्म की शादी, पति को ₹50 लाख स्थायी गुजारा भत्ता देने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने एक आर्मी अधिकारी और उनकी डॉक्टर पत्नी के बीच लंबे समय से चल रहे वैवाहिक विवाद को खत्म करते हुए अनुच्छेद 142 के तहत विवाह विच्छेद का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि दोनों के रिश्ते में अब सुलह की कोई संभावना नहीं बची है और शादी केवल “कागजों तक सीमित” रह गई है।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने पति को पत्नी को ₹50 लाख स्थायी गुजारा भत्ता देने का निर्देश दिया।

मामले की पृष्ठभूमि

सलिल धवन और प्रियंशी घई की शादी अप्रैल 2017 में हिंदू रीति-रिवाजों से हुई थी। पति भारतीय सेना में अधिकारी हैं, जबकि पत्नी बीडीएस डॉक्टर हैं।

कुछ समय बाद दोनों के बीच विवाद बढ़ गया। पत्नी ने पति पर विवाहेतर संबंधों के आरोप लगाए और अलग रहने लगीं। इसके बाद घरेलू हिंसा अधिनियम, धारा 125 CrPC के तहत भरण-पोषण और सेना अधिकारियों के समक्ष कई शिकायतें दर्ज हुईं।

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साल 2019 में पुलिस मध्यस्थता के दौरान दोनों पक्षों के बीच समझौता हुआ था। तय हुआ कि पत्नी को ₹31 लाख मिलने के बाद आपसी सहमति से तलाक लिया जाएगा। पति ने ₹20 लाख का भुगतान भी कर दिया था, लेकिन बाद में दूसरी मोशन याचिका दाखिल नहीं हो सकी और समझौता टूट गया।

इसके बाद फैमिली कोर्ट ने आपसी सहमति वाले तलाक की कार्यवाही समाप्त कर दी। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भी उस आदेश को बरकरार रखा था।

सुप्रीम कोर्ट में पति ने अनुच्छेद 142 के तहत शादी खत्म करने की मांग की। पत्नी ने इसका विरोध करते हुए कहा कि वह व्यभिचार के आधार पर अलग से तलाक याचिका दाखिल करना चाहती हैं।

दोनों पक्षों से बातचीत के बाद अदालत ने कहा कि यह विवाह पूरी तरह टूट चुका है।

पीठ ने कहा, “पक्षकारों के बीच विवाह अपरिवर्तनीय रूप से टूट चुका है और मेल-मिलाप की कोई संभावना नहीं है।”

अदालत ने यह भी नोट किया कि दोनों पिछले आठ वर्षों से अलग रह रहे हैं और एक-दूसरे के खिलाफ कई दीवानी और आपराधिक मामले लंबित हैं।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह भी रिकॉर्ड किया कि पत्नी ने पहले समझौते के तहत मिले ₹20 लाख वापस कर दिए हैं।

इसके बाद अदालत ने दोनों पक्षों की आय, जीवन स्तर, वैवाहिक अवधि, लंबे अलगाव और पत्नी की भविष्य की आर्थिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ₹50 लाख को उचित स्थायी गुजारा भत्ता माना।

कोर्ट ने निर्देश दिया कि यह राशि दो किस्तों में 15 जून 2026 और 15 सितंबर 2026 तक अदा की जाए।

साथ ही, अदालत ने दोनों पक्षों के बीच लंबित सभी मामलों को समाप्त करने का आदेश दिया।

Case Details

Case Title: Salil Dhawan v. Priyanshi Ghai

Case Number: Civil Appeal arising out of SLP (C) No. 971 of 2025

Judges: Justice Vikram Nath and Justice Sandeep Mehta

Decision Date: May 27, 2026

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