सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (1 जून) को एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि डाक विभाग में वर्षों तक सेवा देने वाले अस्थायी दर्जा प्राप्त आकस्मिक कर्मचारी (Temporary Status Casual Labourers) केवल इस कारण पेंशन से वंचित नहीं किए जा सकते कि उन्हें औपचारिक रूप से नियमित नहीं किया गया था। अदालत ने स्पष्ट किया कि लंबे समय तक सेवा देने वाले ऐसे कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभ पाने का अधिकार है।
मामले की पृष्ठभूमि
मामला बिहार के डाक विभाग में कार्यरत तीन कर्मचारियों और उनमें से एक कर्मचारी की विधवा से जुड़ा था। ये कर्मचारी कई दशकों तक नाइट गार्ड के रूप में कैजुअल लेबरर की श्रेणी में काम करते रहे। वर्ष 1991 की विभागीय योजना के तहत उन्हें "टेम्परेरी स्टेटस" प्रदान किया गया था।
हालांकि बाद में उन्हें ग्रुप-डी कर्मचारियों जैसी कई सुविधाएं मिलने लगीं, लेकिन सेवा के दौरान उनका औपचारिक नियमितीकरण नहीं किया गया। सेवानिवृत्ति के बाद जब उन्होंने पेंशन और अन्य लाभों की मांग की तो विभाग ने यह कहते हुए दावा खारिज कर दिया कि नियमितीकरण के बिना पेंशन नहीं दी जा सकती।
न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा कि 1991 की योजना का उद्देश्य कर्मचारियों को स्थायी सेवा व्यवस्था की ओर ले जाना था, न कि उन्हें अनिश्चितकाल तक अस्थायी स्थिति में बनाए रखना।
पीठ ने कहा कि तीन वर्ष की निरंतर सेवा पूरी करने के बाद ऐसे कर्मचारियों को अस्थायी ग्रुप-डी कर्मचारियों के समान लाभ दिए जाने थे। इसलिए उन्हें पेंशन संबंधी लाभों से बाहर नहीं रखा जा सकता।
फैसले में अदालत ने पेंशन के महत्व पर भी जोर दिया।
पीठ ने कहा कि
“पेंशन कोई अनुग्रह या दान नहीं है, बल्कि लंबे समय की सेवा से अर्जित एक संवैधानिक अधिकार है।”
अदालत ने यह भी कहा कि राज्य एक आदर्श नियोक्ता (Model Employer) के रूप में कर्मचारियों से नियमित प्रकृति का काम लेकर उन्हें संबंधित सामाजिक सुरक्षा लाभों से वंचित नहीं कर सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले में उठे मुख्य कानूनी प्रश्न का सीधा उत्तर देते हुए कहा:
“अस्थायी दर्जा प्राप्त कैजुअल श्रमिक, भले ही उनका नियमितीकरण न हुआ हो, सेवानिवृत्ति पर पेंशन लाभ पाने के हकदार होंगे।”
अदालत ने माना कि तीन वर्ष तक टेम्परेरी स्टेटस में सेवा देने के बाद ऐसे कर्मचारियों को अस्थायी ग्रुप-डी कर्मचारियों के समान सभी लाभ प्राप्त हो जाते हैं, जिनमें पेंशन भी शामिल है, बशर्ते उन्होंने आवश्यक न्यूनतम सेवा अवधि पूरी की हो।
अदालत ने माना कि तीन वर्ष तक टेम्परेरी स्टेटस में सेवा देने के बाद ऐसे कर्मचारियों को अस्थायी ग्रुप-डी कर्मचारियों के समान सभी लाभ प्राप्त हो जाते हैं, जिनमें पेंशन भी शामिल है, बशर्ते उन्होंने आवश्यक न्यूनतम सेवा अवधि पूरी की हो।
पीठ ने पाया कि तीनों कर्मचारियों ने पेंशन के लिए आवश्यक न्यूनतम 10 वर्ष से कहीं अधिक अवधि तक सेवा दी थी।
अदालत ने मृत कर्मचारी सूरज साह की विधवा भिखानी देवी को पारिवारिक पेंशन और अन्य देय लाभ देने का निर्देश दिया। साथ ही अन्य दो कर्मचारियों को भी पेंशन और संबंधित सेवानिवृत्ति लाभों का अधिकार प्रदान किया गया।
हालांकि, अदालत ने कहा कि बकाया राशि केवल मूल आवेदन दायर किए जाने से तीन वर्ष और दो माह पूर्व की अवधि तक ही सीमित रहेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाई कोर्ट के उन फैसलों को रद्द कर दिया जिनमें कर्मचारियों के दावों को खारिज किया गया था। अदालत ने केंद्र सरकार और डाक विभाग को निर्देश दिया कि तीन महीने के भीतर सभी पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभों की गणना कर उनका भुगतान किया जाए।
पीठ ने यह भी कहा कि निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं होने पर लाभार्थियों को बकाया राशि पर 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दिया जाएगा। इसके साथ ही अपीलों को स्वीकार कर लिया गया।
Case Details
Case Title: Bhikhani Devi & Ors. v. Union of India & Ors.
Case Number: Civil Appeal Nos. of 2026 arising out of SLP (C) Nos. 28802–28804 of 2019
Judges: Justice Sanjay Karol and Justice Augustine George Masih
Decision Date: 1 June 2026





