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कर्नाटक हाईकोर्ट ने योगेश गौड़ा हत्या मामले में आरोपी की जमानत रद्द की

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कर्नाटक हाईकोर्ट ने योगेश गौड़ा हत्या मामले में आरोपी अश्वथ एस की जमानत गवाहों को धमकी देने के आरोपों के बाद रद्द की। अदालत ने निष्पक्ष सुनवाई पर जोर देते हुए गवाहों की गवाही जल्द पूरी करने का आदेश दिया।

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कर्नाटक हाईकोर्ट ने योगेश गौड़ा हत्या मामले में आरोपी की जमानत रद्द की
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कर्नाटक हाईकोर्ट, बेंगलुरु ने भाजपा नेता योगेश गौड़ा की हत्या से जुड़े चर्चित मामले में आरोपी नंबर 9 अश्वथ एस की जमानत रद्द कर दी है। यह फैसला न्यायमूर्ति एम.आई. अरुण ने 18 अगस्त 2025 को दिया। यह आदेश क्रिमिनल पिटीशन संख्या 7110/2025 में पारित किया गया, जिसे सीबीआई ने दाखिल किया था।

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मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला 15 जून 2016 का है, जब धारवाड़ में भाजपा नेता योगेश गौड़ा की हत्या कर दी गई थी। शुरू में छह लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी, लेकिन 2019 में जांच सीबीआई को सौंपी गई। सीबीआई ने पाया कि पहले नामित आरोपी असली अपराधी नहीं थे और आगे की जांच में नए आरोपियों को शामिल किया, जिनमें अश्वथ एस (आरोपी नंबर 9) और पूर्व मंत्री विनय आर कुलकर्णी (आरोपी नंबर 15) मुख्य साजिशकर्ता बताए गए।

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सभी आरोपियों को ट्रायल के दौरान जमानत दी गई थी। हालांकि, बाद में आरोपी नंबर 15 की जमानत सुप्रीम कोर्ट ने और आरोपी नंबर 16 की जमानत ट्रायल कोर्ट ने रद्द कर दी। मौजूदा याचिका में ट्रायल कोर्ट द्वारा अश्वथ की जमानत रद्द करने से इनकार को चुनौती दी गई थी।

गवाह PW.30 (लक्ष्मी बेनाकट्टी) ने अदालत को ईमेल लिखकर बताया कि अश्वथ ने कोर्ट परिसर में उन्हें धमकी दी।

“उसने खतरनाक इशारा किया और कहा कि पुलिस और सरकार हमारी है। अगर मेरे खिलाफ गवाही दी तो अंजाम भुगतना पड़ेगा।”

इस शिकायत को गंभीर मानते हुए ट्रायल कोर्ट ने सीबीआई को उन्हें सुरक्षा देने का निर्देश दिया।

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इसी तरह PW.40 (लोगेंद्र) ने भी आरोप लगाया कि अश्वथ और अन्य ने उन्हें कोर्ट परिसर में धमकाया। उनकी अर्जी पर भी ट्रायल कोर्ट ने गवाह सुरक्षा का आदेश पारित किया।

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न्यायमूर्ति एम.आई. अरुण ने कहा कि जमानत रद्द करने के लिए यह देखना जरूरी है कि आरोपी ने अपनी स्वतंत्रता का दुरुपयोग किया है या नहीं। अदालत ने नोट किया कि अश्वथ एक "रोडी शीटर" है और उसके खिलाफ अन्य आपराधिक मामले भी लंबित हैं।

“इससे यह उचित आशंका उत्पन्न होती है कि आरोपी संख्या 9 अपनी स्वतंत्रता का इस्तेमाल न्यायिक प्रक्रिया में दखल देने के लिए कर रहा है। गवाहों को सुरक्षा देना और उनके बयान बिना डर के दर्ज कराना आवश्यक है।”

हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का 25 अप्रैल 2025 का आदेश रद्द कर दिया और अश्वथ की जमानत रद्द कर दी। कोर्ट ने निर्देश दिया कि PW.10, PW.30 और PW.40 की गवाही जल्द से जल्द पूरी की जाए। साथ ही स्पष्ट किया कि उनकी गवाही पूरी होने के बाद अश्वथ फिर से जमानत के लिए आवेदन कर सकता है। आरोपी को एक सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया गया।

मामला संख्या: Criminal Petition No.7110 of 2025

मामला शीर्षक: Central Bureau of Investigation बनाम Ashwath S.

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