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दिल्ली हाई कोर्ट ने शादी के 8 महीने के भीतर नवविवाहिता की मौत मामले में सास को जमानत देने से किया इनकार

Shivam Y.

दिल्ली हाई कोर्ट ने कथित दहेज मृत्यु मामले में आरोपी सास को जमानत देने से इनकार करते हुए कहा कि मामले में गंभीर आरोप और महत्वपूर्ण साक्ष्य मौजूद हैं। - अयोध्या देवी उर्फ ​​ज्योति बनाम दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की राज्य सरकार

दिल्ली हाई कोर्ट ने शादी के 8 महीने के भीतर नवविवाहिता की मौत मामले में सास को जमानत देने से किया इनकार
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दिल्ली हाई कोर्ट ने कथित दहेज मृत्यु मामले में आरोपी सास को नियमित जमानत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि शादी के कुछ ही महीनों के भीतर युवती की मौत, लगातार प्रताड़ना के आरोप और घटना से पहले की ऑडियो रिकॉर्डिंग जैसे पहलुओं को हल्के में नहीं लिया जा सकता।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला दिल्ली के विवेक विहार थाने में दर्ज FIR नंबर 573/2024 से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार, युवती ने 29 नवंबर 2024 को कथित तौर पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। मृतका के पिता ने आरोप लगाया कि शादी के बाद भी ससुराल पक्ष लगातार ₹3 लाख की मांग कर रहा था और उनकी बेटी को मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था।

जांच के दौरान परिवार ने पुलिस को एक ऑडियो रिकॉर्डिंग भी सौंपी, जिसमें मृतका अपने भाई से रोते हुए बातचीत करती सुनाई दी। रिकॉर्डिंग में उसने पति द्वारा मारपीट, कपड़े फाड़ने और अपमानित करने जैसी बातें बताई थीं। अभियोजन पक्ष का कहना था कि यह रिकॉर्डिंग और गवाहों के बयान मामले को गंभीर बनाते हैं।

आरोपी सास की ओर से अदालत में कहा गया कि ऑडियो रिकॉर्डिंग में कहीं भी दहेज मांग का सीधा आरोप नहीं है। वकील ने दलील दी कि विवाद पति-पत्नी के बीच सोशल मीडिया चैट को लेकर हुआ था और आवेदिका उस समय घर पर मौजूद भी नहीं थी। यह भी कहा गया कि जांच पूरी हो चुकी है और चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है, इसलिए अब हिरासत में रखने की जरूरत नहीं है।

राज्य सरकार की ओर से जमानत का विरोध करते हुए कहा गया कि मृतका के माता-पिता और रिश्तेदारों के बयान लगातार दहेज मांग और प्रताड़ना की ओर इशारा करते हैं। अभियोजन ने यह भी कहा कि मामले के महत्वपूर्ण गवाहों की अभी ट्रायल कोर्ट में गवाही बाकी है और इस चरण पर आरोपी को राहत देने से गवाह प्रभावित हो सकते हैं।

न्यायमूर्ति डॉ. स्वराना कांता शर्मा ने कहा कि मृतका की शादी को केवल आठ महीने हुए थे और आरोपों को अलग-अलग देखकर नहीं परखा जा सकता। अदालत ने रिकॉर्ड पर मौजूद बयानों का जिक्र करते हुए कहा कि मृतका ने कई बार अपने परिवार को कथित दहेज प्रताड़ना के बारे में बताया था।

अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया रिकॉर्ड यह दिखाता है कि युवती लगातार मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना झेल रही थी।

अदालत ने टिप्पणी की, “मामले की गंभीरता इस तथ्य से और बढ़ जाती है कि घटना शादी के मात्र आठ महीने के भीतर हुई।”

कोर्ट ने हाल ही में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि दहेज मृत्यु जैसे मामलों में जमानत पर विचार करते समय अदालतों को अधिक सतर्क रहना चाहिए।

दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि अभी FSL रिपोर्ट आना बाकी है और मुख्य गवाहों की गवाही भी नहीं हुई है। ऐसे में इस स्तर पर आरोपी को जमानत देना न्यायहित में उचित नहीं होगा। अदालत ने माना कि रिहाई की स्थिति में गवाहों को प्रभावित करने या सबूतों पर असर डालने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

इसी आधार पर अदालत ने जमानत याचिका खारिज कर दी। हालांकि, कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि शिकायतकर्ता की गवाही के बाद आरोपी दोबारा जमानत के लिए आवेदन कर सकती है।

Case Details

Case Title: Ayodhya Devi Alias Jyoti v. State Govt. of NCT of Delhi

Case Number: BAIL APPLN. 920/2026

Judge: Justice Dr. Swarana Kanta Sharma

Decision Date: May 25, 2026

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