Logo

चलती ट्रेन से गिरने पर मौत, वैध टिकट के आधार पर दिल्ली हाईकोर्ट ने परिवार को राहत दी

Shivam Y.

दिल्ली उच्च न्यायालय ने रेल दुर्घटना के मुआवजे के दावे को बहाल कर दिया, क्योंकि आधिकारिक रिकॉर्ड से यह साबित हो गया था कि मृतक वैध ट्रेन टिकट के साथ यात्रा कर रहा था। - आरती और अन्य बनाम भारत संघ

चलती ट्रेन से गिरने पर मौत, वैध टिकट के आधार पर दिल्ली हाईकोर्ट ने परिवार को राहत दी
Join Telegram

दिल्ली हाईकोर्ट ने रेलवे दुर्घटना मुआवजा मामले में अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि केवल चलती ट्रेन से उतरने की कोशिश को यात्री की लापरवाही मानकर मुआवजा नहीं रोका जा सकता। अदालत ने रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल का वह आदेश रद्द कर दिया, जिसमें मृतक को “बोनाफाइड पैसेंजर” मानने से इनकार किया गया था।

मामले की पृष्ठभूमि

मामला 21 अप्रैल 2017 की घटना से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, भीम राज नामक व्यक्ति सदर बाजार से पलवल जाने के लिए वैध रेलवे टिकट लेकर यात्रा कर रहे थे। यात्रा के दौरान ओखला रेलवे स्टेशन के पास ट्रेन से उतरते समय उनका संतुलन बिगड़ गया और वह ट्रेन से गिर गए, जिससे उनकी मौत हो गई।

रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल ने 10 अप्रैल 2018 को दावा खारिज करते हुए कहा था कि मृतक न तो बोनाफाइड यात्री थे और न ही घटना रेलवे अधिनियम के तहत “अनटुवर्ड इंसीडेंट” की श्रेणी में आती है। इसके बाद परिवार ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपील दायर की।

अपील दाखिल करने में 567 दिनों की देरी हुई थी। परिवार की ओर से कहा गया कि वे आर्थिक रूप से कमजोर थे और समय पर कानूनी सलाह नहीं ले सके।

जस्टिस मनोज कुमार ओहरी ने कहा कि रेलवे दुर्घटना मुआवजा कानून सामाजिक कल्याण से जुड़े हैं, इसलिए ऐसे मामलों में तकनीकी आधार पर वास्तविक दावों को खारिज नहीं किया जाना चाहिए। अदालत ने देरी माफ कर दी।

अदालत ने रिकॉर्ड में मौजूद डीडी एंट्री, डीएआर रिपोर्ट, जमातलाशी कार्यवाही और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की जांच रिपोर्टों का विस्तार से अध्ययन किया। सभी दस्तावेजों में मृतक के पास से रेलवे टिकट नंबर J-21772588 मिलने का उल्लेख था।

कोर्ट ने कहा,

“एक बार वैध टिकट की बरामदगी साबित हो जाने पर यह मानने का आधार बनता है कि मृतक बोनाफाइड यात्री था।” अदालत ने यह भी कहा कि रेलवे की ओर से ऐसा कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया गया जिससे टिकट को फर्जी या अवैध साबित किया जा सके।

अदालत ने माना कि ट्रेन से गिरना रेलवे अधिनियम की धारा 123(c)(2) के तहत “यात्री का दुर्घटनावश ट्रेन से गिर जाना” की श्रेणी में आता है। केवल यह कहना कि यात्री चलती ट्रेन से उतरने की कोशिश कर रहा था, मुआवजा न देने का आधार नहीं बन सकता।

हाईकोर्ट ने रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल का आदेश रद्द करते हुए मामले को दोबारा ट्रिब्यूनल के पास भेज दिया। अदालत ने ट्रिब्यूनल को निर्देश दिया कि कानून के अनुसार मुआवजे की राशि तय कर दो महीने के भीतर भुगतान सुनिश्चित किया जाए।

मामला 28 मई 2026 को ट्रिब्यूनल के समक्ष सूचीबद्ध करने का निर्देश भी दिया गया।

Case Details

Case Title: Aarti & Ors. v. Union of India

Case Number: FAO 64/2020

Judge: Justice Manoj Kumar Ohri

Decision Date: May 15, 2026

Recommended Posts