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दोषमुक्ति अपील में दोषसिद्धि के बाद अपीलीय न्यायालय को स्वयं सजा सुनानी होगी: सर्वोच्च न्यायालय

CB News Desk
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि हाई कोर्ट किसी आरोपी को बरी किए जाने का फैसला पलटकर दोषी ठहराता है, तो सजा भी वही तय करेगा, ट्रायल कोर्ट नहीं। - मुकेश कुमार यादव बनाम राज्य (अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का केंद्र शासित प्रदेश) और अन्य।

दोषमुक्ति अपील में दोषसिद्धि के बाद अपीलीय न्यायालय को स्वयं सजा सुनानी होगी: सर्वोच्च न्यायालय

सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक मामलों में सजा तय करने की प्रक्रिया को लेकर अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि यदि कोई अपीलीय अदालत, खासकर हाई कोर्ट, ट्रायल कोर्ट के बरी करने के फैसले को पलटकर आरोपी को पहली बार दोषी ठहराती है, तो सजा भी वही अदालत सुनाएगी। केवल सजा तय करने के लिए मामले को वापस ट्रायल कोर्ट भेजना कानूनन सही नहीं है।

यह फैसला मुकेश कुमार यादव की ओर से दायर अपील पर आया, जिसमें कलकत्ता हाई कोर्ट की पोर्ट ब्लेयर सर्किट बेंच के आदेश को चुनौती दी गई थी।

मामले की पृष्ठभूमि

मुकेश कुमार यादव पर भारतीय दंड संहिता की धारा 376, 312 और 417 के तहत मुकदमा चलाया गया था। पोर्ट ब्लेयर की सत्र अदालत ने अप्रैल 2024 में उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया था।

इसके बाद राज्य और पीड़िता दोनों ने हाई कोर्ट में अपील दायर की। हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का फैसला पलटते हुए आरोपी को धारा 376 और 312 IPC के तहत दोषी ठहराया। अदालत ने माना कि विवाह के वादे के आधार पर संबंध बनाए गए और बाद में गर्भ समाप्त करने के लिए दवाएं दी गईं।

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हालांकि दोषसिद्धि दर्ज करने के बाद हाई कोर्ट ने आरोपी को ट्रायल कोर्ट के समक्ष सरेंडर करने का निर्देश दिया और कहा कि वही अदालत सुनवाई कर सजा तय करेगी।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट की इस प्रक्रिया पर आपत्ति जताई और कहा कि ऐसा तरीका कानून में मान्य नहीं है।

न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन ने पीठ की ओर से लिखते हुए आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 235 और 386 की जांच की और कहा कि पहली बार दोषी ठहराए गए व्यक्ति को सजा सुनाए जाने के संबंध में अदालत को संबोधित करने का उचित अवसर दिया जाना चाहिए।

अदालत ने पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि सजा पर सुनवाई प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का हिस्सा है। कोर्ट ने कहा, “दोषी ठहराए गए व्यक्ति को यह अवसर मिलना चाहिए कि वह सजा के मुद्दे पर अपनी परिस्थितियां और पक्ष अदालत के सामने रख सके।”

पीठ ने आगे कहा कि जब अपीलीय अदालत किसी आरोपी को पहली बार दोषी ठहराती है, तो सजा तय करना भी उसी अदालत का दायित्व है।

अदालत का फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के उस हिस्से को रद्द कर दिया जिसमें ट्रायल कोर्ट को सजा तय करने का निर्देश दिया गया था।

साथ ही, मामले को दोबारा हाई कोर्ट भेजते हुए कहा गया कि हाई Court आरोपी को सजा के मुद्दे पर सुनवाई का अवसर दे और उसके बाद कानून के अनुसार उचित सजा तय करे।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सजा तय होने के बाद आरोपी को दोषसिद्धि और सजा दोनों को चुनौती देने का अधिकार कानून के अनुसार उपलब्ध रहेगा।

Case Details

Case Title: Mukesh Kumar Yadav v. The State (UT of Andaman & Nicobar Islands) & Ors.

Case Number: Criminal Appeal Nos. 2863-2864 of 2026

Judge: Justice K. V. Viswanathan and Justice Vijay Bishnoi

Decision Date: May 26, 2026

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