मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै पीठ ने एक महत्वपूर्ण आदेश में तमिलनाडु सरकार को एक मृतक के अंतिम संस्कार की अनुमति दे दी, जिसका शव पिछले तीन महीने से अधिक समय से सरकारी अस्पताल की मोर्चरी में रखा हुआ था। परिवार द्वारा बार-बार अवसर दिए जाने के बावजूद शव नहीं लेने पर अदालत ने यह फैसला सुनाया।
न्यायमूर्ति एल. विक्टोरिया गौरी ने यह आदेश ए. राजेश्कन्नन द्वारा दायर याचिका से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान पारित किया।
मामले की पृष्ठभूमि
याचिकाकर्ता ने अदालत से अनुरोध किया था कि आकाश डेलिसन की मृत्यु के संबंध में स्वतंत्र आपराधिक मामला दर्ज किया जाए और जांच को सीबीसीआईडी (CBCID) को सौंपा जाए। याचिका में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के प्रावधानों को भी लागू करने की मांग की गई थी।
इससे पहले हाईकोर्ट ने जांच को सीबीसीआईडी को स्थानांतरित करने और भारतीय न्याय संहिता की धारा 103 सहित संबंधित प्रावधान जोड़ने का संज्ञान लिया था।
बाद में राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि पोस्टमॉर्टम, साक्ष्यों के संरक्षण और जांच में पर्याप्त प्रगति के बावजूद मृतक के परिजनों ने 90 दिनों से अधिक समय तक शव लेने से इनकार कर रखा है। सरकार के अनुसार, लंबे समय तक शव को सुरक्षित रखने से उसका काफी विघटन हो चुका है और इससे प्रशासनिक व सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा हो रही हैं।
अदालत की टिप्पणियां
याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि परिवार को अब भी मृत्यु की परिस्थितियों को लेकर गंभीर आशंकाएं हैं और उनका मानना है कि उन्हें अभी पूर्ण न्याय नहीं मिला है।
वहीं, राज्य की ओर से कहा गया कि परिवार की प्रमुख शिकायतों का समाधान हो चुका है। जांच सीबीसीआईडी को सौंप दी गई है, सीसीटीवी फुटेज और अन्य रिकॉर्ड सुरक्षित कर लिए गए हैं तथा मामले में आवश्यक कानूनी धाराएं जोड़ी जा चुकी हैं।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति गौरी ने कहा कि हिरासत में मृत्यु के आरोपों की जांच अत्यंत संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ होनी चाहिए।
हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति की गरिमा मृत्यु के बाद भी समाप्त नहीं होती। अदालत ने कहा,
“मृत व्यक्ति को सम्मानजनक दफन या अंतिम संस्कार मिलना केवल धार्मिक परंपरा का विषय नहीं है, बल्कि यह मानव गरिमा का विस्तार है।”
अदालत ने आगे कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिलने वाला गरिमा का अधिकार मृत व्यक्ति के पार्थिव शरीर के सम्मानजनक व्यवहार तक भी विस्तारित होता है।
न्यायालय ने यह भी कहा,
“परिवार द्वारा शव लेने से लगातार इनकार करने के कारण पार्थिव शरीर को अनिश्चित काल तक संरक्षित नहीं रखा जा सकता।”
फैसला
सभी चिकित्सीय और कानूनी औपचारिकताएं पूरी हो जाने तथा जांच के स्वतंत्र रूप से जारी रहने को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने मदुरै जिला कलेक्टर, मदुरै नगर निगम, राजाजी सरकारी अस्पताल और अन्य सक्षम अधिकारियों को आकाश डेलिसन के पार्थिव शरीर के सम्मानजनक अंतिम संस्कार की अनुमति और निर्देश दिए।
अदालत ने कहा कि अंतिम संस्कार मृतक और उसके परिवार की धार्मिक मान्यताओं तथा परंपराओं के अनुसार किया जाए, जहां तक यह संभव हो। साथ ही अंतिम संस्कार से पहले शव की पर्याप्त फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी करने का भी निर्देश दिया गया।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि राज्य द्वारा अंतिम संस्कार कराए जाने से सीबीसीआईडी की चल रही जांच पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा और जांच कानून के अनुसार स्वतंत्र रूप से जारी रहेगी।
Case Details:
Case Title: A. Rajeshkannan v. Home Secretary & Others
Case Number: W.P.Crl.(MD) No.1392 of 2026
Judge: Justice L. Victoria Gowri
Decision Date: June 16, 2026


















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