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बुजुर्ग गवाह को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से गवाही देने की अनुमति, पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द किया

CB News Desk

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने वसीयत विवाद में एक बुजुर्ग गवाह की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से गवाही रिकॉर्ड करने की अनुमति देते हुए ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द कर दिया। - अश्वनी कुमार शर्मा बनाम रमा रानी शर्मा और अन्य

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बुजुर्ग गवाह को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से गवाही देने की अनुमति, पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द किया
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में कहा है कि न्याय तक आसान पहुंच सुनिश्चित करने के लिए उपलब्ध तकनीकी सुविधाओं का प्रभावी उपयोग किया जाना चाहिए। अदालत ने वसीयत से जुड़े एक पारिवारिक संपत्ति विवाद में एक बुजुर्ग गवाह की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए गवाही दर्ज कराने की अनुमति दे दी।

न्यायमूर्ति विरिंदर अग्रवाल ने यह फैसला अश्वनी कुमार शर्मा द्वारा दायर पुनरीक्षण याचिका पर सुनाया।

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मामले की पृष्ठभूमि

विवाद स्वर्गीय प्रभा कांता शर्मा की संपत्ति के उत्तराधिकार और विरासत से जुड़ा है। याचिकाकर्ता का दावा है कि 21 दिसंबर 1979 को निष्पादित और 25 जनवरी 1980 को पंजीकृत वसीयत के तहत विवादित संपत्ति उसे और कुछ अन्य उत्तराधिकारियों को समान हिस्सों में दी गई थी।

इस वसीयत को साबित करने के लिए याचिकाकर्ता ने उसकी साक्षी डॉ. प्लोम खुराना की गवाही रिकॉर्ड कराने की मांग की। आवेदन में कहा गया कि लगभग 78 वर्ष की आयु की डॉ. खुराना गुरुग्राम में रहती हैं और स्वास्थ्य एवं पारिवारिक परिस्थितियों के कारण चंडीगढ़ आकर अदालत में उपस्थित होने की स्थिति में नहीं हैं।

हालांकि, ट्रायल कोर्ट ने मार्च 2026 में यह कहते हुए आवेदन खारिज कर दिया था कि केवल अधिक आयु होना अदालत में उपस्थित होने से छूट देने का पर्याप्त आधार नहीं है।

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से न्यायिक कार्यवाही संचालित करने संबंधी नियमों का विस्तार से उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि हाईकोर्ट द्वारा बनाए गए नियम स्पष्ट रूप से गवाहों की गवाही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से रिकॉर्ड करने की अनुमति देते हैं।

अदालत ने कहा कि न्यायालयों में इसके लिए आवश्यक तकनीकी ढांचा पहले से उपलब्ध है और उसका उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया को अधिक सुलभ और प्रभावी बनाना है।

पीठ ने कहा, “संबंधित गवाह उन्नत आयु की हैं और रिकॉर्ड पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार उन्होंने अपने पति की लंबी बीमारी के दौरान उनकी देखभाल की थी तथा हाल ही में उन्हें पति की मृत्यु का भी सामना करना पड़ा है।”

अदालत ने माना कि ये परिस्थितियां वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से गवाही दर्ज कराने के लिए पर्याप्त और उचित आधार हैं।

हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि दस्तावेजों या हस्ताक्षरों की पहचान को लेकर कोई व्यावहारिक कठिनाई नहीं है, क्योंकि आवश्यक दस्तावेज गवाह को पहले से उपलब्ध कराए जा सकते हैं और सुनवाई के दौरान उन्हें दिखाया जा सकता है।

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हाईकोर्ट ने पुनरीक्षण याचिका स्वीकार करते हुए ट्रायल कोर्ट के 20 मार्च 2026 के आदेश को रद्द कर दिया।

अदालत ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि संबंधित गवाह की गवाही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से लागू नियमों और प्रक्रिया के अनुसार रिकॉर्ड की जाए।

साथ ही अदालत ने स्पष्ट किया कि इस आदेश में की गई टिप्पणियां केवल गवाही रिकॉर्ड करने के प्रश्न तक सीमित हैं और मुख्य वसीयत विवाद के गुण-दोष पर किसी प्रकार की राय नहीं मानी जाएंगी।

इसके साथ ही लंबित सभी संबंधित आवेदन भी निस्तारित कर दिए गए।

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