Logo

जमानत दिलाने के नाम पर ₹10.92 लाख लेने के आरोप में अधिवक्ता को अग्रिम जमानत से वंचित रखा गया : पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट

Zaved Khan

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने उस वकील को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया, जिस पर जमानत दिलाने के नाम पर ₹10.92 लाख लेने और कथित फर्जी जमानत आदेश दिखाने का आरोप है। - Anurag Khullar @ Vishal v. U.T. Chandigarh

Advertisement
जमानत दिलाने के नाम पर ₹10.92 लाख लेने के आरोप में अधिवक्ता को अग्रिम जमानत से वंचित रखा गया : पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट
Join Telegram

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक अधिवक्ता की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है, जिस पर आरोप है कि उसने जेल में बंद एक व्यक्ति को जमानत दिलाने का भरोसा देकर उसके परिवार से ₹10.92 लाख लिए और बाद में उन्हें कथित रूप से एक फर्जी जमानत आदेश दिखाया।

न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता ने कहा कि मामले में लगाए गए आरोप गंभीर प्रकृति के हैं और जांच के इस चरण में हिरासत में पूछताछ आवश्यक प्रतीत होती है।

Advertisement

मामले की पृष्ठभूमि

एफआईआर शिकायतकर्ता जसप्रीत कौर और उनके भाई द्वारा दर्ज कराई गई थी। शिकायत के अनुसार, जसप्रीत कौर के पति एक आपराधिक मामले में जेल में बंद थे। आरोप है कि याचिकाकर्ता ने स्वयं को प्रभावशाली संपर्कों वाला व्यक्ति बताते हुए जमानत दिलाने का आश्वासन दिया और विभिन्न खर्चों के नाम पर समय-समय पर धनराशि ली।

शिकायतकर्ताओं का कहना था कि उन्होंने बैंकिंग माध्यमों और नकद रूप में कुल लगभग ₹10.92 लाख का भुगतान किया। बाद में उन्हें एक कथित जमानत आदेश दिखाया गया, जो संदिग्ध प्रतीत हुआ। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि संबंधित जमानत याचिका वास्तव में दाखिल नहीं की गई थी।

अदालत की टिप्पणी

याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि वह विधिवत पंजीकृत अधिवक्ता है और शिकायतकर्ताओं ने उसे पेशेवर रूप से नियुक्त किया था। उसका तर्क था कि यदि कोई विवाद है तो वह फीस या पेशेवर भुगतान से जुड़ा नागरिक विवाद है।

हालांकि, हाई कोर्ट ने इस दलील को पर्याप्त नहीं माना।

अदालत ने कहा,

“केवल यह तथ्य कि याचिकाकर्ता एक प्रैक्टिसिंग अधिवक्ता है, अग्रिम जमानत देने का आधार नहीं बन सकता।”

न्यायालय ने यह भी कहा कि जांच में एकत्र सामग्री प्रथम दृष्टया बड़ी धनराशि के लेन-देन की ओर संकेत करती है। इसके अतिरिक्त, कथित रूप से हाई कोर्ट के फर्जी जमानत आदेश का उपयोग किए जाने का आरोप भी अत्यंत गंभीर है।

पीठ ने टिप्पणी की,

“न्यायिक अभिलेखों को गढ़ने का कोई भी प्रयास न्याय प्रशासन की जड़ों पर सीधा प्रहार करता है।”

फैसला

अदालत ने पाया कि इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फोरेंसिक जांच अभी जारी है और कथित दस्तावेजों की तैयारी तथा प्रसारण से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की जांच के लिए हिरासत में पूछताछ आवश्यक हो सकती है।

Advertisement

आरोपों की गंभीरता, कथित रूप से शामिल धनराशि, जांच की स्थिति और डिजिटल साक्ष्यों की आवश्यकता को देखते हुए हाई कोर्ट ने अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया और याचिका खारिज कर दी।

अदालत ने स्पष्ट किया कि इस आदेश में की गई टिप्पणियां केवल जमानत याचिका के निस्तारण तक सीमित हैं और मुकदमे के गुण-दोष पर कोई अंतिम राय नहीं मानी जाएंगी।

Case Details:

Case Title: Anurag Khullar @ Vishal v. U.T. Chandigarh

Case Number: CRM-M-32965-2026

Judge: Justice Deepak Gupta

Decision Date: 15 June 2026

Advertisement

Take CourtBook Everywhere

Access your account on the go with our mobile app.

Get it on Google PlayDownload on the App Store
CourtBook Mobile App

Recommended Posts