पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत कार्यरत हजारों कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए राज्य सरकार को 7वें वेतन आयोग का लाभ देने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि स्वीकृत सेवा नियमों और सरकारी अनुमोदनों के बावजूद कर्मचारियों को संशोधित वेतनमान से वंचित रखना कानून की दृष्टि में उचित नहीं है।
मामले की पृष्ठभूमि
याचिकाकर्ता NHM हरियाणा के तहत संविदा आधार पर कार्यरत कर्मचारी हैं, जिनमें स्टाफ नर्स, फार्मासिस्ट, एएनएम, लैब तकनीशियन, कंप्यूटर असिस्टेंट और अन्य स्वास्थ्यकर्मी शामिल हैं। उन्होंने अदालत से 7वें वेतन आयोग के अनुरूप वेतन संशोधन और बकाया राशि जारी करने की मांग की थी।
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वर्ष 2018 में लागू किए गए सेवा उपनियमों (Service Bye-laws) के तहत उन्हें 6वें वेतन आयोग का लाभ दिया गया था। उन्होंने यह भी बताया कि हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद (HSSPP) के कर्मचारियों को 7वें वेतन आयोग का लाभ पहले ही दिया जा चुका है और NHM कर्मचारियों के साथ भी समान व्यवहार किया जाना चाहिए।
वहीं राज्य सरकार ने तर्क दिया कि NHM कर्मचारी संविदा आधारित और योजना के तहत नियुक्त कर्मचारी हैं, इसलिए उन्हें नियमित सरकारी कर्मचारियों के समान लाभ देने का कोई स्वाभाविक अधिकार नहीं है।
अदालत की टिप्पणियां
न्यायमूर्ति संदीप मौदगिल ने कहा कि यह मामला कर्मचारियों के नियमितीकरण का नहीं बल्कि उनके वेतन संबंधी अधिकारों और स्वीकृत सेवा नियमों के पालन का है।
अदालत ने कहा कि NHM कर्मचारी राज्य की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ हैं। विशेष रूप से कोविड-19 महामारी के दौरान उन्होंने कठिन परिस्थितियों में लगातार सेवाएं दीं और स्वास्थ्य सेवाओं को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कोर्ट ने पाया कि राज्य सरकार ने स्वयं 6वें वेतन आयोग को लागू करते समय NHM कर्मचारियों और शिक्षा परियोजना परिषद के कर्मचारियों के बीच समानता स्वीकार की थी। ऐसे में बाद में बिना किसी ठोस कारण के दोनों वर्गों के बीच अंतर करना मनमाना कदम माना जाएगा।
अदालत ने कहा,
“जब राज्य ने स्वयं लाभ प्रदान करते समय समानता अपनाई थी, तो वह बाद में किसी तार्किक कारण के बिना उस समानता को समाप्त नहीं कर सकता।”
समानता के सिद्धांत पर जोर
कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लेख करते हुए कहा कि समान परिस्थितियों में कार्य करने वाले कर्मचारियों के साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के उन फैसलों का भी हवाला दिया जिनमें “समान कार्य के लिए समान वेतन” के सिद्धांत को संवैधानिक संरक्षण प्राप्त बताया गया है।
अदालत ने यह भी नोट किया कि 7वें वेतन आयोग का लाभ NHM कर्मचारियों को देने का प्रस्ताव राज्य स्वास्थ्य सोसायटी द्वारा भेजा गया था और उसे मुख्यमंत्री की मंजूरी भी प्राप्त हो चुकी थी। इसके बावजूद लाभ लागू नहीं किया गया।
फैसला
सभी तथ्यों और रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री पर विचार करने के बाद हाई कोर्ट ने याचिकाएं स्वीकार कर लीं।
अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि NHM हरियाणा के याचिकाकर्ताओं तथा अन्य समान स्थिति वाले कर्मचारियों के वेतनमान को 7वें वेतन आयोग के अनुसार संशोधित किया जाए। यह लाभ 1 जनवरी 2016 से लागू माना जाएगा, जिस तारीख से संबंधित ढांचे के अन्य कर्मचारियों को इसका लाभ दिया गया था।
कोर्ट ने संशोधित वेतनमान के आधार पर देय बकाया राशि का भुगतान 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित करने का भी आदेश दिया। हालांकि बकाया राशि को संबंधित याचिकाओं के दाखिल होने से पूर्व 38 महीनों की अवधि तक सीमित रखा गया है।
अदालत ने राज्य सरकार को 12 सप्ताह के भीतर पूरी प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश देते हुए सभी याचिकाओं का निपटारा कर दिया।
Case Details:
Case Title: Priyawart and Others vs State of Haryana and Others & Connected Matters
Case Number: CWP-29110-2025 and connected cases
Judge: Justice Sandeep Moudgil
Decision Date: 26 May 2026












