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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रेलवे कर्मचारी केंद्र सरकार के सेवक हैं और KSEB द्वारा पहले दिए गए सेवा लाभ वापस लेना गलत है।

CB News Desk
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सर्वोच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया कि रेल कर्मचारी केंद्र सरकार के कर्मचारी हैं और केरल राज्य विद्युत बोर्ड द्वारा वापस ली गई पेंशन संबंधी भारित सुविधाओं को बहाल कर दिया। - बेन्सी जॉन बनाम केरल राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड और अन्य।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रेलवे कर्मचारी केंद्र सरकार के सेवक हैं और KSEB द्वारा पहले दिए गए सेवा लाभ वापस लेना गलत है।

सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में फैसला सुनाते हुए कहा है कि रेलवे कर्मचारी केंद्र सरकार के कर्मचारी ही माने जाएंगे, भले ही उन पर अलग रेलवे सेवा नियम लागू होते हों।

अदालत ने केरल स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड (KSEB) द्वारा एक पूर्व रेलवे कर्मचारी को दिए गए सेवा लाभ वापस लेने के फैसले को भी रद्द कर दिया।

जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने 26 मई 2026 को यह फैसला सुनाया।

मामले की पृष्ठभूमि

याचिकाकर्ता बेंसी जॉन ने 1990 में भारतीय रेलवे में जूनियर ड्राफ्ट्समैन के रूप में नौकरी शुरू की थी। बाद में वर्ष 2001 में उन्होंने केरल स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड में सब-इंजीनियर के पद पर जॉइन किया।

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KSEB में शामिल होने के बाद रेलवे ने उनकी पेंशन देनदारी के रूप में ₹2 लाख से अधिक राशि बोर्ड को भेजी थी। बोर्ड ने इसे रिकॉर्ड में भी दर्ज किया कि रेलवे सेवा को पेंशन लाभ के लिए माना जाएगा।

बोर्ड के आदेशों और कर्मचारियों के साथ हुए समझौतों में भी यह प्रावधान था कि केंद्र सरकार की पूर्व सेवा को वेटेज (weightage) के लिए गिना जाएगा।

लेकिन वर्ष 2012 में KSEB ने अचानक यह लाभ वापस ले लिया और अतिरिक्त भुगतान की वसूली का आदेश जारी कर दिया। बोर्ड का कहना था कि रेलवे सेवा को केंद्र सरकार की सेवा नहीं माना जा सकता।

सिंगल जज ने कर्मचारी के पक्ष में फैसला दिया था, लेकिन बाद में हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने उसे पलट दिया। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सिर्फ इसलिए कि रेलवे कर्मचारियों पर अलग सेवा नियम लागू होते हैं, उन्हें केंद्र सरकार के कर्मचारी मानने से इनकार नहीं किया जा सकता।

पीठ ने अपने फैसले में भारतीय रेलवे की संवैधानिक और प्रशासनिक स्थिति पर विस्तार से चर्चा की। अदालत ने कहा कि रेलवे सीधे भारत सरकार के अधीन काम करता है और रेलवे कर्मचारी केंद्र सरकार के अधीन सिविल पोस्ट धारण करते हैं।

अदालत ने कहा कि रेलवे के लिए अलग सेवा नियम केवल प्रशासनिक सुविधा के लिए बनाए गए हैं। इससे कर्मचारियों की कानूनी स्थिति नहीं बदलती।

पीठ ने कहा,

“रेलवे बोर्ड रेलवे प्रशासन के लिए स्वयं भारत सरकार की तरह कार्य करता है।”

अदालत ने आगे कहा कि रेलवे कर्मचारी केवल इसलिए केंद्र सरकार की सेवा से बाहर नहीं हो जाता क्योंकि उसकी सेवा शर्तें रेलवे के विशेष नियमों से नियंत्रित होती हैं।

कोर्ट ने KSEB के रवैये पर भी नाराजगी जताई।

पीठ ने कहा,

“हमें आश्चर्य है कि बोर्ड ने पहले लाभ देने के बाद बाद में उसे वापस लेने की कोशिश की।”

सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच के फैसलों को रद्द करते हुए सिंगल जज का फैसला बहाल कर दिया।

अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता को बोर्ड आदेशों के तहत दिए गए सभी लाभ मिलते रहेंगे और पहले से प्राप्त किसी भी लाभ को वापस नहीं लिया जाएगा।

कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि फैसले से मिलने वाले सभी लाभ तीन महीने के भीतर दिए जाएं।

Case Details:

Case Title: Bency John v. Kerala State Electricity Board Ltd & Ors.

Case Number: Civil Appeal Nos. arising out of SLP (C) Nos. 1377-1380 of 2021

Judge: Justice Dipankar Datta and Justice Satish Chandra Sharma

Decision Date: May 26, 2026

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