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सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) Format India — Free Templates & Samples

सिविल प्रक्रिया संहिता (Civil Procedure Code / CPC) भारत में दीवानी न्यायालयों की कार्यवाही को नियंत्रित करने वाला मूल कानून है। यह वाद दाखिल करने से लेकर डिक्री निष्पादन (Execution) तक की पूरी प्रक्रिया तय करता है। संपत्ति विवाद, अनुबंध भंग और निषेधाज्ञा जैसे मामलों के लिए सही ड्राफ्टिंग आवश्यक है। भारत में सिविल प्रक्रिया संहिता के मुफ्त टेम्पलेट और सैंपल यहाँ डाउनलोड करें।

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Courts

What is सिविल प्रक्रिया संहिता (Cpc)?

सिविल प्रक्रिया संहिता (Civil Procedure Code / CPC) वह विधिक ढांचा है जो भारत में दीवानी मुकदमों की सुनवाई और निपटान की प्रक्रिया को विनियमित करता है। यह सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 द्वारा शासित है। यह निर्धारित करता है कि अदालत में वाद (Suit) कैसे दाखिल होगा, समन (Summons) कैसे जाएगा, साक्ष्य कैसे पेश होंगे और फैसला (Decree) कैसे लागू होगा।

CPC की धारा 9 दीवानी न्यायालयों को सभी प्रकार के दीवानी विवादों (संपत्ति, अनुबंध, मुआवजा) की सुनवाई का अधिकार देती है। वाद पत्र (Plaint) का प्रारूप आदेश 7 में, और लिखित कथन (Written Statement) का प्रारूप आदेश 8 में दिया गया है। अंतरिक्ष (अस्थायी) राहत के लिए आदेश 39 के तहत स्टे (Stay) या निषेधाज्ञा मांगी जाती है।

कानूनी वैधता के लिए, प्रत्येक दीवानी मुकदमे का अनुपालन CPC के सख्त नियमों के अनुसार होना चाहिए। वाद का कारण (Cause of Action) और न्यायालय की अधिकारिता (Jurisdiction) सही होनी चाहिए। कोई भी व्यक्ति जिसका दीवानी अधिकार छीना गया हो, वादी (Plaintiff) बनकर मुकदमा दाखिल कर सकता है। भारतीय कानून में सिविल प्रक्रिया संहिता क्या है, इसे समझना बिना दीवानी अदालत का दरवाजा खटखटाए बिना न्याय पाना असंभव है।

When This Format Required?

संपत्ति और स्वामित्व विवाद: जब किसी अचल संपत्ति पर अवैध कब्जा हो या स्वामित्व का विवाद हो, तो संपत्ति वापसी का वाद दाखिल करना।

अनुबंध भंग और मुआवजा: जब किसी अनुबंध को तोड़ा गया हो या वित्तीय नुकसान हुआ हो, तो मौद्रिक मुआवजा (Damages) पाने के लिए।

डिक्री निष्पादन: जब आपके पक्ष में अदालत का फैसला (डिक्री) आ चुका हो, लेकिन प्रत्यर्थी उसका पालन नहीं कर रहा हो।

स्टे ऑर्डर की आवश्यकता: जब किसी विवादित संपत्ति को बेचने या नष्ट करने से रोकने के लिए तत्काल अदालती रोक (Injunction) चाहिए।

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Quick Overview

सिविल प्रक्रिया संहिता भारत में दीवानी न्यायालय कार्यवाही के लिए सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (CPC) द्वारा शासित है। इन्हें निर्धारित न्यायालय शुल्क पर दाखिल किया जाता है; नोटराइज्ड शपथपत्र अनिवार्य है। यह संपत्ति विवाद, मुआवजा, अंतरिक्ष राहत और डिक्री निष्पादन के लिए उपयोग होता है। यह आमतौर पर 5-20 पेज लंबा होता है।

Step-by-Step Guide

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    चरण 1: अधिकारिता (Jurisdiction) और वाद का कारण तय करें

    निर्धारित करें कि कौन सी अदालत (संपत्ति स्थित वाली या प्रत्यर्थी के निवास की) मामला सुनेगी। वाद का कारण (Cause of Action), विवाद की राशि और पक्षकारों की सूची तैयार करें।

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    चरण 2: वाद पत्र (Plaint) ड्राफ्ट करें

    आदेश 7 के तहत वाद पत्र तैयार करें। इसमें वादी और प्रत्यर्थी का विवरण, वाद के तथ्य, वाद का कारण और विवादित संपत्ति या अधिकार का स्पष्ट विवरण दें।

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    चरण 3: अंतरिक्ष राहत (Interim Relief) का आवेदन करें

    यदि तत्काल सुरक्षा चाहिए, तो मुख्य वाद के साथ आदेश 39 के तहत अस्थायी निषेधाज्ञा (Temporary Injunction / Stay Order) का आवेदन और धारा 151 के तहत अंतर्निहित अधिकार का प्रयोग करें।

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    चरण 4: मानचित्र (Site Plan) और दस्तावेज सूची संलग्न करें

    संपत्ति विवाद होने पर एक स्पष्ट मानचित्र लगाएं। आदेश 7 नियम 14 के तहत अपने समर्थन में सभी दस्तावेजों (रजिस्ट्री, रसीदें) की सूची और उनकी प्रतियां वाद पत्र के साथ लगाएं।

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    चरण 5: न्यायालय शुल्क (Court Fee) और शपथपत्र

    दावे की राशि या संपत्ति के मूल्य के अनुसार राज्य न्यायालय शुल्क अधिनियम के तहत शुल्क का भुगतान करें। वाद पत्र की सत्यता की पुष्टि के लिए शपथपत्र लगाएं।

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    चरण 6: वाद दाखिल करें और समन (Summons) सुनिश्चित करें

    सिविल जज की अदालत में वाद दाखिल करें। रजिस्ट्रार द्वारा आदेश 5 के तहत प्रत्यर्थी को अदालत में पेश होने का समन (Notice) भेजा जाएगा।

Disclaimer: This template is provided for general informational and drafting reference purposes only. It does not constitute legal advice. Stamp duty, registration, and procedural requirements may vary by state. Consult a qualified advocate before executing or filing any legal document. For more details, see our Disclaimer.