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बिना नोटिस किसी की संपत्ति जब्त नहीं की जा सकती: कलकत्ता हाईकोर्ट ने BNSS की प्रक्रिया का पालन न होने पर अटैचमेंट आदेश रद्द किया

Zaved Khan
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कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक महिला की संपत्तियों के अटैचमेंट आदेश को रद्द करते हुए कहा कि BNSS की धारा 107 के तहत नोटिस और सुनवाई का अवसर देना अनिवार्य है। - Puja Hari v. The State of West Bengal & Anr.

बिना नोटिस किसी की संपत्ति जब्त नहीं की जा सकती: कलकत्ता हाईकोर्ट ने BNSS की प्रक्रिया का पालन न होने पर अटैचमेंट आदेश रद्द किया

कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि किसी व्यक्ति की संपत्ति को धारा 107, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 के तहत अटैच करने से पहले कानून में निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है। अदालत ने एक महिला की संपत्तियों को अटैच करने वाले आदेश को रद्द कर दिया क्योंकि उसे न तो नोटिस दिया गया था और न ही अपना पक्ष रखने का अवसर।

न्यायमूर्ति अजय कुमार मुखर्जी ने कहा कि संपत्ति से जुड़े अधिकार संवैधानिक संरक्षण प्राप्त हैं और ऐसे मामलों में अदालतों तथा जांच एजेंसियों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

मामले की पृष्ठभूमि

मामले की शुरुआत मई 2025 में दर्ज एक शिकायत से हुई थी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि व्यावसायिक लेन-देन के दौरान खातों में अनियमितताएं पाई गईं। इसके आधार पर पुलिस ने कई व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया, जिनमें बिकाश हरी भी शामिल थे।

जांच के दौरान पुलिस ने BNSS की धारा 107 के तहत कुछ संपत्तियों को अटैच करने की अनुमति मांगी। सितंबर 2025 में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, हावड़ा ने पांच संपत्तियों के अटैचमेंट की अनुमति दे दी।

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इनमें से तीन संपत्तियां बिकाश हरी और उनकी पत्नी पूजा हरी के संयुक्त स्वामित्व में थीं, जबकि दो संपत्तियां केवल पूजा हरी के नाम थीं। पूजा हरी को मामले में आरोपी नहीं बनाया गया था, फिर भी उनकी संपत्तियां अटैच कर दी गईं। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

अदालत की टिप्पणी

हाईकोर्ट ने धारा 107 BNSS का विश्लेषण करते हुए कहा कि किसी भी संपत्ति को अटैच करने से पहले संबंधित व्यक्ति को नोटिस देना, उसे जवाब देने के लिए 14 दिन का समय देना और सुनवाई का उचित अवसर प्रदान करना अनिवार्य है।

अदालत ने पाया कि पूजा हरी को इनमें से कोई भी अवसर नहीं दिया गया। न्यायालय ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई प्रमाण नहीं है जिससे यह साबित हो कि उन्हें नोटिस दिया गया था।

कोर्ट ने यह भी पाया कि निचली अदालत ने उन्हें "फरार" मान लिया था, जबकि वह मामले में आरोपी ही नहीं थीं।

न्यायमूर्ति मुखर्जी ने कहा,

“संपत्ति की मालिक होने के बावजूद याचिकाकर्ता को कोई नोटिस नहीं दिया गया और इस कारण वह अपनी बात रखने के अवसर से वंचित रह गईं।”

धारा 107 BNSS के प्रयोग पर हाईकोर्ट की चेतावनी

फैसले में अदालत ने BNSS की धारा 107 के तहत संपत्ति अटैचमेंट की शक्तियों के दुरुपयोग को लेकर भी चिंता व्यक्त की।

कोर्ट ने कहा कि जांच अधिकारी के पास केवल संदेह नहीं बल्कि

“विश्वास करने का कारण”

चाहिए कि संबंधित संपत्ति अपराध से प्राप्त आय है। यह संतोष ठोस सामग्री पर आधारित होना चाहिए।

अदालत ने कहा,

“यदि इस शक्ति का बिना पर्याप्त विचार और सावधानी के प्रयोग किया गया तो यह संपत्ति के संवैधानिक अधिकार को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।”

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की मंजूरी केवल औपचारिकता नहीं हो सकती। उन्हें भी स्वतंत्र रूप से यह संतुष्ट होना होगा कि संपत्ति को अटैच करने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं।

फैसला

सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद कलकत्ता हाईकोर्ट ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, हावड़ा द्वारा 24 सितंबर 2025 को पारित संपत्ति अटैचमेंट आदेश को रद्द कर दिया।

हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच एजेंसी चाहे तो कानून के अनुरूप नई प्रक्रिया शुरू कर सकती है। इसके लिए उसे BNSS की धारा 107 के तहत नोटिस जारी करने और प्रभावित पक्ष को सुनवाई का पूरा अवसर देने सहित सभी वैधानिक आवश्यकताओं का पालन करना होगा।

इन्हीं निर्देशों के साथ हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए विवादित आदेश को निरस्त कर दिया।

Case Details:

Case Title: Puja Hari v. The State of West Bengal & Anr.

Case Number: CRR 4810 of 2025

Judge: Justice Ajoy Kumar Mukherjee

Decision Date: 23 June 2026

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