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कलकत्ता उच्च न्यायालय ने धारा 498A का मामला समाप्त करते हुए कहा कि पिता द्वारा बेटे को साथ ले जाना मानसिक क्रूरता नहीं है।

Shivam
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कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा कि बच्चे के हित में पिता द्वारा उसे साथ ले जाना स्वतः मानसिक क्रूरता नहीं माना जा सकता और 498A का मामला रद्द कर दिया। - शांतनु मोइत्रा और अन्य बनाम पश्चिम बंगाल राज्य और अन्य।

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने धारा 498A का मामला समाप्त करते हुए कहा कि पिता द्वारा बेटे को साथ ले जाना मानसिक क्रूरता नहीं है।

कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में पति और उसकी 84 वर्षीय मां के खिलाफ दर्ज धारा 498A IPC का मामला रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि केवल इस आधार पर कि पति अपने बेटे को मां की जानकारी के बिना साथ ले गया, अपने आप में “मानसिक क्रूरता” का मामला नहीं बनता, खासकर तब जब रिकॉर्ड में बच्चे के हित और उसकी मानसिक स्थिति से जुड़े गंभीर पहलू सामने आए हों।

मामले की पृष्ठभूमि

पत्नी अंकना मोइत्रा ने दिसंबर 2021 में शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया था कि विवाह के बाद उसे पति और ससुराल पक्ष की ओर से प्रताड़ित किया गया। उसने यह भी कहा कि 26 नवंबर 2021 को जब वह घर लौटी तो पति, सास और बेटा घर पर नहीं थे और उसके कुछ पैसे तथा आभूषण भी गायब थे। इसके बाद पुलिस ने IPC की धारा 498A, 323 और 34 के तहत मामला दर्ज किया।

दूसरी ओर, पति शंतनु मोइत्रा का कहना था कि वैवाहिक संबंध लंबे समय से खराब थे और बच्चा अपनी मां के व्यवहार से मानसिक तनाव में था। पति ने अदालत में कहा कि बच्चे ने मां के साथ रहने से डर जताया था, इसलिए उसे अपने साथ ले जाना जरूरी था।

जस्टिस अपूर्बा सिन्हा राय ने FIR और गवाहों के बयान का परीक्षण करते हुए पाया कि पत्नी ने किसी विशेष शारीरिक प्रताड़ना का स्पष्ट आरोप नहीं लगाया था। अदालत ने कहा कि पड़ोसियों के बयान भी प्रत्यक्ष जानकारी पर आधारित नहीं थे।

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अदालत ने कहा,

“हर वैवाहिक विवाद को एक ही नजरिए से नहीं देखा जा सकता। प्रत्येक मामले का फैसला उसके अपने तथ्यों के आधार पर किया जाना चाहिए।”

कोर्ट ने विशेष रूप से उस पारिवारिक अदालत के आदेश का उल्लेख किया जिसमें बच्चे ने जज के सामने मां के साथ जाने से इनकार किया था। आदेश में दर्ज था कि बच्चा मां के नाम पर “कांपने” लगा था और उसने पिता के साथ रहने की इच्छा जताई थी।

जस्टिस राय ने कहा कि बच्चे का कल्याण सर्वोपरि है और अदालतें उसे नजरअंदाज नहीं कर सकतीं। अदालत ने माना कि पिता द्वारा बच्चे को अपने साथ ले जाने के पीछे “उचित आधार” दिखाई देता है।

हाईकोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई मजबूत सामग्री नहीं है जिससे धारा 498A के तहत मुकदमा चलाया जा सके। अदालत ने यह भी नोट किया कि पत्नी द्वारा चोरी गए पैसे और गहनों का आरोप बाद में असत्य निकला क्योंकि वे सामान उसी की अलमारी से मिले थे।

फैसले में अदालत ने कहा,

“इस कार्यवाही को जारी रखना न्यायालय की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।” इसके साथ ही अदालत ने FIR, चार्जशीट और ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द कर दिया।

Case Details

Case Title: Shantanu Moitra & Anr. vs State of West Bengal & Anr.

Case Number: CRR No. 2236 of 2023

Judge: Justice Apurba Sinha Ray

Decision Date: May 5, 2026

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