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डिबारमेंट अवधि समाप्त होने तक टेंडर में भागीदारी पर रोक बरकरार, दिल्ली हाई कोर्ट ने राहत देने से किया इनकार

Zaved Khan

दिल्ली हाई कोर्ट ने आर.के. जैन इंफ्रा की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें NHAI टेंडर में भाग लेने की अनुमति मांगी गई थी। अदालत ने कहा कि बोली जमा करने की तिथि पर डिबारमेंट प्रभावी था। - R.K. Jain Infra Projects Private Limited v. National Highway Authority of India

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डिबारमेंट अवधि समाप्त होने तक टेंडर में भागीदारी पर रोक बरकरार, दिल्ली हाई कोर्ट ने राहत देने से किया इनकार
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दिल्ली हाई कोर्ट ने आर.के. जैन इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड को राहत देने से इनकार करते हुए कहा है कि कंपनी डिबारमेंट (निविदाओं में भाग लेने पर प्रतिबंध) की अवधि समाप्त होने से पहले NHAI की नई निविदा प्रक्रिया में हिस्सा नहीं ले सकती। अदालत ने माना कि जब तक डिबारमेंट आदेश प्रभावी है, तब तक कंपनी को बोली जमा करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

मामले की पृष्ठभूमि

आर.के. जैन इंफ्रा देशभर में टोल संग्रहण और प्रबंधन का कार्य करती है। NHAI ने 6 अगस्त 2025 को कंपनी को एक वर्ष के लिए डिबार कर दिया था। इस आदेश को चुनौती देने वाली कंपनी की एक अलग याचिका पहले से ही दिल्ली हाई कोर्ट में लंबित है, जिसमें फैसला सुरक्षित रखा जा चुका है।

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इसी बीच NHAI ने 2 जून 2026 को हरियाणा स्थित घमरोज टोल प्लाजा के लिए यूजर फीस कलेक्शन एजेंसी नियुक्त करने हेतु नई निविदा जारी की। निविदा में बोली जमा करने की अंतिम तिथि 16 जून 2026 निर्धारित की गई थी।

कंपनी का तर्क था कि उसका डिबारमेंट 6 अगस्त 2026 को समाप्त हो जाएगा, जबकि नए अनुबंध की अवधि उसके बाद शुरू होगी। इसलिए उसे निविदा प्रक्रिया में भाग लेने की अनुमति दी जानी चाहिए।

अदालत की टिप्पणी

खंडपीठ ने कंपनी की दलीलों को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि यह तथ्य महत्वपूर्ण नहीं है कि अनुबंध की अवधि डिबारमेंट समाप्त होने के बाद शुरू होगी।

पीठ ने कहा,

“जब बोली जमा की जानी है, उस समय यदि डिबारमेंट आदेश प्रभावी है, तो अनुबंध की शुरुआत की तिथि का कोई महत्व नहीं रह जाता।”

अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि डिबारमेंट आदेश स्पष्ट रूप से कंपनी को एक वर्ष तक किसी भी निविदा में भाग लेने से रोकता है। चूंकि बोली जमा करने की प्रक्रिया डिबारमेंट अवधि के भीतर हो रही थी, इसलिए कंपनी इस प्रतिबंध से बच नहीं सकती।

साथ ही अदालत ने नोट किया कि डिबारमेंट आदेश पर रोक लगाने की मांग वाली अंतरिम अर्जी पर किसी प्रकार की राहत पहले नहीं दी गई थी। इसलिए आदेश पूरी तरह प्रभावी बना हुआ था।

फैसला

सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने माना कि याचिका में कोई दम नहीं है। अदालत ने कहा कि कंपनी लंबित चुनौती के बावजूद अलग याचिका दायर कर डिबारमेंट आदेश के प्रभाव से बचने का प्रयास नहीं कर सकती।

इसी आधार पर अदालत ने याचिका तथा उससे संबंधित सभी लंबित आवेदनों को खारिज कर दिया और स्पष्ट किया कि आर.के. जैन इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड NHAI की 2 जून 2026 की निविदा प्रक्रिया में भाग नहीं ले सकती। अदालत ने लागत के संबंध में कोई आदेश पारित नहीं किया।

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Case Details:

Case Title: R.K. Jain Infra Projects Private Limited v. National Highway Authority of India

Case Number: W.P.(C) 8151/2026

Judge: Justice Tejas Karia and Justice Madhu Jain

Decision Date: June 15, 2026

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