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पता अपडेट न करने के बाद नोटिस न मिलने का दावा नहीं कर सकता कर्मचारी, सुप्रीम कोर्ट ने बहाली का आदेश रद्द किया

Zaved Khan
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सुप्रीम कोर्ट ने एक कर्मचारी की बहाली और बकाया वेतन संबंधी लेबर कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि कर्मचारी अपने दावों के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य पेश नहीं कर सका। - M/s Rifilis Engineering Pvt. Ltd. v. Arjun Gupta

पता अपडेट न करने के बाद नोटिस न मिलने का दावा नहीं कर सकता कर्मचारी, सुप्रीम कोर्ट ने बहाली का आदेश रद्द किया

सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण श्रम विवाद में कर्मचारी की बहाली और बकाया वेतन देने के आदेश को रद्द कर दिया है। अदालत ने कहा कि कर्मचारी यह साबित करने में असफल रहा कि उसे अवैध रूप से नौकरी से हटाया गया था।

मामले की पृष्ठभूमि

अरुण गुप्ता वर्ष 2006 से M/s Rifilis Engineering Pvt. Ltd. में मोल्डर के पद पर कार्यरत थे। कंपनी के अनुसार, मई 2012 में वह बिना किसी सूचना के काम पर आना बंद कर दिए। इसके बाद कंपनी ने उनके स्थायी पते पर एक नोटिस भेजा, लेकिन उसका कोई जवाब नहीं मिला।

दूसरी ओर, कर्मचारी का कहना था कि वह अपनी बीमार मां की देखभाल के लिए अवकाश पर गए थे और 8 जून 2012 को काम पर लौटने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें ड्यूटी जॉइन नहीं करने दी गई। बाद में विवाद लेबर कोर्ट तक पहुंचा, जिसने कर्मचारी के पक्ष में फैसला देते हुए बहाली और बकाया वेतन का आदेश दिया।

अदालत की टिप्पणियां

सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि कंपनी ने नोटिस उसी पते पर भेजा था जो कर्मचारी ने नियुक्ति के समय उपलब्ध कराया था। अदालत ने कहा,

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“नियोक्ता से केवल उसी पते पर संपर्क करने की अपेक्षा की जा सकती है जो कर्मचारी ने स्वयं उपलब्ध कराया हो।”

पीठ ने यह भी कहा कि यदि कर्मचारी ने अपना निवास स्थान बदला था, तो इसकी सूचना देना उसकी जिम्मेदारी थी।

अदालत ने यह भी नोट किया कि कर्मचारी ने अपनी अनुपस्थिति के कारणों को साबित करने के लिए कोई दस्तावेजी साक्ष्य पेश नहीं किया। न तो उसने अवकाश के संबंध में कोई लिखित सूचना दी और न ही यह दिखाने के लिए कोई रिकॉर्ड प्रस्तुत किया कि उसने बाद में नौकरी पर वापस लौटने का प्रयास किया था।

फैसला

इन परिस्थितियों में सुप्रीम कोर्ट ने माना कि लेबर कोर्ट और इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पर्याप्त साक्ष्यों के बिना कर्मचारी को राहत प्रदान की थी। इसलिए अदालत ने कंपनी की अपील स्वीकार कर ली, हाई कोर्ट के फैसले और लेबर कोर्ट के अवार्ड को रद्द कर दिया तथा कर्मचारी की बहाली, बकाया वेतन और अन्य लाभों से संबंधित सभी निर्देश निरस्त कर दिए। कर्मचारी का दावा भी खारिज कर दिया गया।

Case Details:

Case Title: M/s Rifilis Engineering Pvt. Ltd. v. Arjun Gupta

Case Number: Civil Appeal arising out of SLP (Civil) No. 26434 of 2024

Judge: Justice Vikram Nath and Justice Sandeep Mehta

Decision Date: May 22, 2026

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