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उपभोक्ता शिकायत को सिर्फ मध्यस्थता क्लॉज के आधार पर नहीं भेजा जा सकता: सुप्रीम कोर्ट ने 21 साल पुराने हाउसिंग विवाद को फिर से बहाल किया

Zaved Khan

सुप्रीम कोर्ट ने फ्लैट के कब्जे में कथित देरी से जुड़े मुआवजा दावे को बहाल करते हुए कहा कि स्वीकार की जा चुकी उपभोक्ता शिकायत को केवल मध्यस्थता क्लॉज के आधार पर दूसरी प्रक्रिया में नहीं भेजा जा सकता। - T.K.A. Padmanabhan v. Abhiyan Cooperative Group Housing Society Ltd.

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उपभोक्ता शिकायत को सिर्फ मध्यस्थता क्लॉज के आधार पर नहीं भेजा जा सकता: सुप्रीम कोर्ट ने 21 साल पुराने हाउसिंग विवाद को फिर से बहाल किया
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सुप्रीम कोर्ट ने उपभोक्ताओं के अधिकारों से जुड़े एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि किसी समझौते में मध्यस्थता क्लॉज होने मात्र से उपभोक्ता मंच की अधिकारिता समाप्त नहीं हो जाती। अदालत ने एक फ्लैट खरीदार की वर्षों पुरानी शिकायत को पुनर्जीवित करते हुए कहा कि उपभोक्ता मंच को मामले का गुण-दोष के आधार पर फैसला करना चाहिए था।

मामले की पृष्ठभूमि

अपीलकर्ता टी.के.ए. पद्मनाभन ने वर्ष 2005 में उपभोक्ता मंच का दरवाजा खटखटाया था। उनका आरोप था कि आवासीय सोसायटी ने फ्लैट का कब्जा देने में देरी की, जिसके कारण उन्हें नुकसान हुआ और वे मुआवजे के हकदार हैं।

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सोसायटी ने जवाब में कहा कि पक्षों के बीच हुए समझौते में मध्यस्थता क्लॉज मौजूद है, इसलिए विवाद का निपटारा उपभोक्ता मंच के बजाय मध्यस्थता के माध्यम से होना चाहिए। जिला मंच ने अंततः इस दलील को स्वीकार कर लिया और विवाद को मध्यस्थता के लिए भेज दिया। बाद में राज्य आयोग और राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग ने भी इसी दृष्टिकोण को बरकरार रखा।

अदालत की टिप्पणियां

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम का उद्देश्य उपभोक्ताओं को सरल, सस्ता और त्वरित न्याय उपलब्ध कराना है। अदालत ने दोहराया कि इस कानून के तहत मिलने वाला उपाय अन्य कानूनी उपायों के अतिरिक्त है, उनका विकल्प नहीं।

पीठ ने कहा,

“किसी अन्य मंच या विवाद निपटान की प्रक्रिया का अस्तित्व अपने-आप उपभोक्ता मंच की अधिकारिता को समाप्त नहीं करता।”

अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि एक बार जब उपभोक्ता शिकायत स्वीकार कर ली जाती है, तब उसे किसी अन्य न्यायिक या वैधानिक मंच पर स्थानांतरित नहीं किया जा सकता। न्यायालय के अनुसार, पक्षों के बीच किया गया निजी अनुबंध संसद द्वारा दिए गए वैधानिक अधिकार को निष्प्रभावी नहीं कर सकता।

राष्ट्रीय आयोग के उस निष्कर्ष को भी अदालत ने अस्वीकार कर दिया जिसमें कहा गया था कि कब्जा मिलने के बाद अपीलकर्ता उपभोक्ता नहीं रह गया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कब्जा प्राप्त होने के बाद भी कब्जा देने में हुई कथित देरी के लिए मुआवजे का दावा किया जा सकता है और उसका निर्णय तथ्यों के आधार पर होना चाहिए।

फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने अपील स्वीकार करते हुए जिला मंच, राज्य आयोग और राष्ट्रीय आयोग के आदेशों को रद्द कर दिया। अदालत ने उपभोक्ता शिकायत को पुनः बहाल करते हुए उसे जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, द्वारका के समक्ष गुण-दोष के आधार पर सुनवाई के लिए भेज दिया। साथ ही आयोग से अनुरोध किया कि वर्ष 2005 से लंबित इस मामले का यथासंभव एक वर्ष के भीतर निस्तारण किया जाए।

Case Details:

Case Title: T.K.A. Padmanabhan v. Abhiyan Cooperative Group Housing Society Ltd.

Case Number: Civil Appeal No. 10724 of 2016

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Judge: Justice Vikram Nath and Justice V. Mohana

Decision Date: June 4, 2026

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