दिल्ली हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा है कि यदि किसी दावे का आधार व्यापक (कॉम्प्रिहेंसिव/पैकेज) मोटर बीमा पॉलिसी के तहत उपलब्ध पर्सनल एक्सीडेंट कवर है, तो ऐसे दावे का निर्णय मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) नहीं कर सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार का दावा मोटर वाहन अधिनियम के तहत वैधानिक दायित्व नहीं, बल्कि बीमा अनुबंध से उत्पन्न अधिकार है।
न्यायमूर्ति अनिश दयाल ने मृतक चालक की मां द्वारा दायर अपील खारिज करते हुए कहा कि यदि बीमा पॉलिसी के तहत कोई संविदात्मक दावा बनता है, तो उसके लिए उचित मंच उपभोक्ता आयोग या अन्य सक्षम न्यायालय होगा, न कि MACT।
मामले की पृष्ठभूमि
यह अपील मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT), पटियाला हाउस कोर्ट द्वारा 19 अप्रैल 2025 को पारित उस आदेश के खिलाफ दायर की गई थी, जिसमें दावा याचिका खारिज कर दी गई थी।
मृतक उदय सिंह उर्फ उदय जीत सिंह अपने पिता अमरजीत सिंह की स्वामित्व वाली टोयोटा इनोवा कार चला रहे थे। याचिका के अनुसार, एक अज्ञात ट्रक ने तेज गति से ओवरटेक करते हुए कार के पिछले हिस्से में टक्कर मार दी। इसके बाद इनोवा पहले एक ऑल्टो कार से टकराई और फिर सर्विस रोड की दीवार से जा भिड़ी। हादसे में उदय सिंह की मृत्यु हो गई। चूंकि ट्रक की पहचान नहीं हो सकी, इसलिए मामला हिट एंड रन के रूप में दर्ज हुआ।
मृतक की मां ने इसके बाद इनोवा के बीमाकर्ता के खिलाफ दावा करते हुए कहा कि उनका पुत्र व्यापक बीमा पॉलिसी के तहत एक ऑक्यूपेंट या थर्ड पार्टी के रूप में मुआवजे का हकदार है।
पक्षकारों की दलीलें
अपीलकर्ता की ओर से कहा गया कि वाहन पर कॉम्प्रिहेंसिव/पैकेज पॉलिसी लागू थी, जिसके लिए अतिरिक्त प्रीमियम भी अदा किया गया था। इसलिए मृतक चालक को पर्सनल एक्सीडेंट कवर का लाभ मिलना चाहिए और उसे पॉलिसी के तहत संरक्षित माना जाना चाहिए।
वहीं बीमा कंपनी ने तर्क दिया कि पर्सनल एक्सीडेंट कवर पूरी तरह बीमा अनुबंध की शर्तों पर आधारित है। ऐसे विवाद संविदात्मक प्रकृति के होते हैं और इनकी सुनवाई MACT के अधिकार क्षेत्र में नहीं आती।
मामले में नियुक्त एमिकस क्यूरी (न्यायालय मित्र) ने भी अदालत की सहायता करते हुए मोटर वाहन अधिनियम के तहत वैधानिक दायित्व और बीमा अनुबंध से उत्पन्न संविदात्मक दायित्व के बीच अंतर स्पष्ट किया।
अदालत की टिप्पणी
न्यायमूर्ति अनिश दयाल ने कहा कि मोटर वाहन अधिनियम की धारा 166 के तहत दायर किसी भी दावे में लापरवाही साबित करना अनिवार्य है।
अदालत ने कहा कि इस मामले में मृतक स्वयं वाहन चला रहा था। जिस ट्रक पर दुर्घटना का आरोप लगाया गया, उसकी पहचान नहीं हो सकी और उसकी लापरवाही भी सिद्ध नहीं हुई। ऐसी स्थिति में केवल बीमा पॉलिसी के पर्सनल एक्सीडेंट कवर के आधार पर धारा 166 के तहत दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता।
पीठ ने कहा,
"मोटर वाहन अधिनियम की धारा 166 के तहत दायर दावा तभी सफल हो सकता है, जब चालक की लापरवाही साबित हो। इस मामले में वाहन मृतक स्वयं चला रहा था।"
अदालत ने आगे कहा कि पर्सनल एक्सीडेंट कवर बीमा अनुबंध का हिस्सा है और यह मोटर वाहन अधिनियम के तहत मिलने वाली वैधानिक थर्ड पार्टी देयता से अलग है।
पीठ ने कहा,
"यदि दावा बीमा पॉलिसी के पर्सनल एक्सीडेंट कवर के आधार पर किया जाता है, तो उसका परीक्षण बीमा अनुबंध की शर्तों के अनुसार होगा और ऐसा विवाद MACT के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।"
साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि MACT के अधिकार क्षेत्र का अनावश्यक विस्तार नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह विशेष रूप से मोटर वाहन अधिनियम के तहत निर्धारित वैधानिक दावों के निपटारे के लिए बनाया गया है।
फैसला
दिल्ली हाई कोर्ट ने MACT के आदेश को सही ठहराते हुए अपील खारिज कर दी। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि बीमा पॉलिसी के तहत पर्सनल एक्सीडेंट कवर का दावा बनता है, तो दावा करने वाले उचित मंच, जैसे उपभोक्ता आयोग या अन्य सक्षम न्यायालय के समक्ष अपनी कानूनी राहत मांग सकते हैं।
Case Details:
Case Title: Simbal Singh v. Amarjit Singh & Anr.
Case Number: MAC.APP. 532/2025
Judge: Justice Anish Dayal
Decision Date: July 1, 2026
















