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दिल्ली हाई कोर्ट ने CJI, जजों और केंद्रीय मंत्रियों को निशाना बनाने वाले 'फ़र्ज़ी लंदन बैडमिंटन इवेंट' से जुड़े कंटेंट को हटाने का आदेश दिया।

Shivam Y.

दिल्ली हाईकोर्ट ने CJI, न्यायाधीशों और केंद्रीय मंत्रियों की कथित लंदन बैडमिंटन भागीदारी से जुड़ी भ्रामक ऑनलाइन सामग्री को हटाने का आदेश देते हुए इसे प्रथम दृष्टया गलत बताया। - बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया बनाम भारत संघ और अन्य।

दिल्ली हाई कोर्ट ने CJI, जजों और केंद्रीय मंत्रियों को निशाना बनाने वाले 'फ़र्ज़ी लंदन बैडमिंटन इवेंट' से जुड़े कंटेंट को हटाने का आदेश दिया।
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दिल्ली हाईकोर्ट ने मुख्य न्यायाधीश (CJI), सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाईकोर्टों के न्यायाधीशों तथा केंद्रीय मंत्रियों को लेकर सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रसारित कथित भ्रामक सामग्री को हटाने का आदेश दिया है। अदालत ने प्रथम दृष्टया माना कि संबंधित सामग्री तथ्यात्मक रूप से गलत प्रतीत होती है और इससे न्यायपालिका की प्रतिष्ठा तथा जनता के विश्वास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

न्यायमूर्ति तेजस कारिया ने यह आदेश बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (BAI) की याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया।

मामले की पृष्ठभूमि

याचिका में कहा गया था कि 7 जून 2026 को लंदन में आयोजित दूसरे इंटरनेशनल बार एंड बेंच बैडमिंटन चैंपियनशिप को लेकर कई समाचार रिपोर्ट, वीडियो, सोशल मीडिया पोस्ट और बयान प्रसारित किए गए। इन सामग्रियों में दावा किया गया कि भारत के मुख्य न्यायाधीश, कई न्यायाधीश और केंद्रीय मंत्री इस कार्यक्रम में शामिल हुए थे।

BAI का कहना था कि ये दावे तथ्यात्मक रूप से गलत हैं और पुराने फोटो तथा भ्रामक जानकारियों के आधार पर न्यायपालिका की छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया गया है।

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सोशल मीडिया पर प्रसारित की जा रही तस्वीरें लंदन की नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि ये तस्वीरें नवंबर 2025 में नई दिल्ली के त्यागराज स्टेडियम में आयोजित राष्ट्रीय स्तर की बार एंड बेंच बैडमिंटन प्रतियोगिता की हैं। सरकार की ओर से यह भी बताया गया कि भारत के मुख्य न्यायाधीश ने लंदन में किसी बैडमिंटन प्रतियोगिता में भाग नहीं लिया था और उनकी यात्रा आधिकारिक कार्यक्रमों तक सीमित थी।

केंद्र ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन केंद्रीय मंत्रियों के बारे में दावे किए गए, वे उस अवधि में लंदन गए ही नहीं थे।

रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री पर विचार करने के बाद अदालत ने कहा कि विवादित सामग्री प्रथम दृष्टया झूठी और भ्रामक प्रतीत होती है।

अदालत ने कहा, “विवादित सामग्री पहली नजर में झूठी, दुर्भावनापूर्ण और न्यायपालिका, कार्यपालिका तथा बैडमिंटन खेल की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाली प्रतीत होती है।”

न्यायालय ने यह भी कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड से ऐसा प्रतीत होता है कि न्यायपालिका की छवि को धूमिल करने के लिए गलत तथ्यों पर आधारित एक सुनियोजित दुष्प्रचार अभियान चलाया गया।

अदालत के अनुसार, न्यायिक स्वतंत्रता पर सवाल उठाने वाले आरोपों के समर्थन में कोई ठोस तथ्यात्मक आधार रिकॉर्ड पर नहीं दिखता।

दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और संबंधित नियमों के तहत आवश्यक अधिसूचना जारी करे, ताकि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, सर्च इंजन, वेब-होस्टिंग सेवाएं और अन्य मध्यस्थ विवादित सामग्री को हटाएं, ब्लॉक करें या उसकी पहुंच सीमित करें।

अदालत ने संबंधित प्लेटफॉर्मों को यह भी निर्देश दिया कि वे सामग्री अपलोड करने वाले खातों से जुड़ी उपलब्ध जानकारी सुरक्षित रखें और आवश्यक विवरण अधिकारियों को उपलब्ध कराएं ताकि कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जा सके।

इसके अतिरिक्त, समाचार पोर्टलों, ब्लॉगर्स, सोशल मीडिया खाताधारकों और आम नागरिकों को भी ऐसी सामग्री या उसके समान संस्करणों को दोबारा प्रकाशित या प्रसारित करने से रोका गया है।

मामले को अनुपालन रिपोर्ट के लिए 17 जुलाई 2026 को सूचीबद्ध किया गया है।

Case Details

Case Title: Badminton Association of India v. Union of India & Anr.

Case Number: W.P.(C) 8284/2026

Judge: Justice Tejas Karia

Decision Date: June 19, 2026

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