मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि शिक्षक शिक्षा के लिए राष्ट्रीय परिषद (NCTE) के रेगुलेशन में भाषा को लेकर यदि कोई अंतर हो, तो अंग्रेजी संस्करण ही मान्य होगा। यह निर्णय इसलिए लिया गया क्योंकि ये नियम केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए हैं और संविधान के तहत अंग्रेजी भाषा को अधिकारिक भाषा माना गया है।
यह मामला एक महिला अभ्यर्थी से जुड़ा है, जिसे मिडिल स्कूल शिक्षक पद के लिए इस आधार पर अपात्र घोषित कर दिया गया कि उसके स्नातक में 50% अंक नहीं थे। विभाग ने यह निर्णय NCTE के 2014 रेगुलेशन के हिंदी संस्करण के आधार पर लिया था, जबकि याचिकाकर्ता ने मास्टर डिग्री में 50% अंक प्राप्त किए थे। उन्होंने तर्क दिया कि अंग्रेजी संस्करण में स्पष्ट रूप से यह उल्लेख है कि स्नातक या परास्नातक डिग्री में 50% अंक होना चाहिए।
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न्यायालय ने केंद्र सरकार के नियमों की भाषा को लेकर संविधान के अनुच्छेद 348 (1)(b)(iii) का हवाला दिया और कहा:
“संविधान के अनुच्छेद 348 (1)(b)(iii) के अनुसार, संसद या राज्य की विधायिका द्वारा बनाए गए किसी भी कानून के तहत जारी सभी आदेशों, नियमों, विनियमों और उपविधियों का अधिकृत पाठ अंग्रेजी भाषा में होगा।”
अदालत ने यह भी पाया कि 2014 के हिंदी रेगुलेशन संस्करण में मास्टर डिग्री का कोई उल्लेख नहीं था, जबकि अंग्रेजी संस्करण में स्पष्ट रूप से स्नातक या परास्नातक डिग्री में 50% अंक का विकल्प दिया गया है। इसलिए कोर्ट ने कहा कि हिंदी संस्करण के आधार पर केवल स्नातक में 50% अंक की शर्त लगाना गलत है और अंग्रेजी संस्करण ही मान्य माना जाएगा।
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कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि भर्ती विज्ञापन में 50% अंक की अनिवार्यता का उल्लेख तक नहीं था, बल्कि विज्ञापन में यह कहा गया था:
“संबंधित विषय में कम से कम 45 प्रतिशत अंकों के साथ स्नातक उपाधि और एनसीटीई द्वारा मान्य बी.एड डिग्री।”
इस आधार पर न्यायालय ने माना कि याचिकाकर्ता ने भले ही स्नातक में 47.5% अंक प्राप्त किए हों, लेकिन उन्होंने मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से बी.एड. डिग्री प्राप्त की है। इसलिए विभाग द्वारा उन्हें अपात्र ठहराना विधिसंगत नहीं है।
कोर्ट का आदेश:
“अतः याचिका स्वीकार की जाती है और याचिकाकर्ता को मिडिल स्कूल शिक्षक के पद पर नियुक्त करने का आदेश दिया जाता है, साथ ही सभी परिणामी लाभ दिए जाएं, सिवाय उन मौद्रिक लाभों के जो पहले से ही समान परिस्थिति वाले उम्मीदवारों को मिल चुके हैं।”
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यह फैसला यह स्पष्ट करता है कि सरकारी नियमों की व्याख्या में अधिकृत भाषा (अंग्रेजी) को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, और हिंदी संस्करण में त्रुटियों के आधार पर योग्य उम्मीदवारों को अपात्र नहीं ठहराया जा सकता।
केस का शीर्षक: सुनीता गुप्ता बनाम मध्य प्रदेश राज्य स्कूल शिक्षा विभाग और अन्य
रिट याचिका संख्या 3673/2023