झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य के प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ताओं के लिए वित्तीय सहायता, स्वास्थ्य बीमा और जीवन बीमा की मांग वाली जनहित याचिका का निपटारा कर दिया है। अदालत ने यह फैसला राज्य सरकार द्वारा अधिवक्ताओं के स्वास्थ्य बीमा के लिए वार्षिक बजटीय व्यवस्था और प्रीमियम भुगतान का आश्वासन दिए जाने के बाद सुनाया।
मुख्य न्यायाधीश एम.एस. सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने कहा कि याचिका में मांगी गई राहतें अब काफी हद तक पूरी हो चुकी हैं।
मामले की पृष्ठभूमि
यह जनहित याचिका झारखंड के अधिवक्ता बिदेश कुमार दान द्वारा दायर की गई थी। याचिका में केंद्र और राज्य सरकार को निर्देश देने की मांग की गई थी कि वे झारखंड राज्य बार काउंसिल को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराएं, नियमित रूप से प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ताओं और उनके आश्रित परिवारों को स्वास्थ्य बीमा कवरेज दें तथा जीवन बीमा की व्यवस्था करें।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी की कार्यकारी निदेशक डॉ. नेहा अरोड़ा ने एक अनुपूरक हलफनामा दाखिल किया, जिसमें अधिवक्ताओं के लिए बीमा योजना से संबंधित सरकारी निर्णयों की जानकारी दी गई।
हलफनामे में कहा गया कि राज्य सरकार ने “झारखंड एडवोकेट्स वेलफेयर ट्रस्टी कमेटी” के लिए बजटीय प्रावधान कर दिया है। साथ ही 24 जनवरी 2025 के एक प्रस्ताव के तहत यह निर्णय लिया गया कि प्रत्येक पंजीकृत अधिवक्ता के स्वास्थ्य बीमा के लिए प्रतिवर्ष 6,000 रुपये का प्रीमियम सरकार वहन करेगी।
राज्य की ओर से अदालत को यह भी बताया गया कि यह योजना केवल एक वर्ष के लिए नहीं है, बल्कि हर वर्ष इसके लिए बजटीय आवंटन किया जाएगा।
याचिकाकर्ता और झारखंड स्टेट बार काउंसिल की ओर से यह सुझाव दिया गया कि संबंधित सरकारी प्रस्ताव को राजपत्र (गजट) में प्रकाशित किया जाए, ताकि भविष्य में इसके क्रियान्वयन को लेकर कोई प्रशासनिक अड़चन न आए।
हालांकि राज्य सरकार ने अदालत को भरोसा दिलाया कि गजट प्रकाशन न होने के बावजूद योजना के क्रियान्वयन में कोई कठिनाई नहीं आएगी। अदालत ने इस आश्वासन को रिकॉर्ड पर लिया और राज्य की ओर से दिए गए हलफनामे को एक औपचारिक वचन (undertaking) के रूप में स्वीकार किया।
पीठ ने कहा, “याचिका में मांगी गई राहतें काफी हद तक पूरी हो चुकी हैं।”
राज्य सरकार द्वारा अधिवक्ताओं के स्वास्थ्य बीमा के लिए स्थायी नीति, बजटीय प्रावधान और प्रीमियम भुगतान की व्यवस्था किए जाने को पर्याप्त मानते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने जनहित याचिका का निपटारा कर दिया।
अदालत ने मामले में कोई अतिरिक्त निर्देश जारी नहीं किया और लागत के संबंध में भी कोई आदेश पारित नहीं किया।
Case Details
Case Title: Bidesh Kumar Dan v. Union of India & Ors.
Case Number: W.P. (PIL) No. 1956 of 2021
Judges: Chief Justice M.S. Sonak and Justice Rajesh Shankar
Decision Date: June 8, 2026












