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कर्नाटक हाईकोर्ट ने एमबीबीएस सीट से वंचित छात्रा को ₹15 लाख मुआवज़ा देने का आदेश

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कर्नाटक हाईकोर्ट ने रिट याचिका संख्या 6014/2018, संजना वी तुमकुर बनाम राज्य कर्नाटक एवं अन्य में फैसला सुनाते हुए श्री सिद्धार्थ मेडिकल कॉलेज को आदेश दिया कि छात्रा को RS15 लाख मुआवज़ा दे, जिसे NEET-2017 के बावजूद एमबीबीएस प्रवेश से वंचित किया गया था।

कर्नाटक हाईकोर्ट ने एमबीबीएस सीट से वंचित छात्रा को ₹15 लाख मुआवज़ा देने का आदेश
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कर्नाटक हाईकोर्ट, बेंगलुरु ने 20 अगस्त 2025 को अपने निर्णय में श्री सिद्धार्थ मेडिकल कॉलेज, तुमकुरु को आदेश दिया कि वह एक छात्रा को ₹15 लाख का मुआवज़ा अदा करे। छात्रा को वर्ष 2017-18 में एमबीबीएस प्रवेश से गैर-कानूनी रूप से वंचित कर दिया गया था, जबकि उसने सभी आवश्यक शर्तें पूरी की थीं।

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मामले की पृष्ठभूमि

याचिकाकर्ता संजना वी तुमकुर ने NEET-2017 में भाग लिया और 1 सितंबर 2017 को श्री सिद्धार्थ मेडिकल कॉलेज की काउंसलिंग में सम्मिलित हुईं। उन्होंने सभी मूल प्रमाणपत्र जमा किए और ₹15,65,750 प्रथम वर्ष की फीस अदा की। इसके बावजूद उन्हें न तो अलॉटमेंट लेटर मिला और न ही रसीद। कॉलेज ने बाद में पूरे कोर्स की शेष फीस के लिए बैंक गारंटी की मांग की।

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संजना ने 8 सितंबर 2017 को ₹52,50,000 की बैंक गारंटी जमा कर दी, लेकिन कॉलेज ने यह कहकर प्रवेश देने से इंकार कर दिया कि सभी सीटें भर चुकी हैं। बाद में पता चला कि उनसे कम NEET रैंक वाले छात्रों को प्रवेश दिया गया।

विश्वविद्यालय के चांसलर ने 11 अक्टूबर 2017 को एक पत्र जारी कर गलती स्वीकार की और उन्हें शैक्षणिक वर्ष 2018-19 में निःशुल्क एमबीबीएस सीट का आश्वासन दिया। लेकिन बार-बार निवेदन करने के बावजूद कॉलेज ने यह वादा पूरा नहीं किया।

न्यायमूर्ति अनु शिवरामन और न्यायमूर्ति के. मनमधा राव की पीठ ने माना कि कॉलेज ने एक मेधावी छात्रा को प्रवेश से वंचित कर “मनमानी और गैर-कानूनी” ढंग से कम रैंक वाले छात्रों को सीट आवंटित कर दी।

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अदालत ने कहा:

“पूरे कोर्स की बैंक गारंटी अनिवार्य करने का कोई प्रावधान नहीं है। याचिकाकर्ता को प्रवेश न देकर कम मेधावी छात्र को सीट देना प्रत्यक्ष रूप से मनमाना और अवैध है।”

सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि संस्थानों की गलती का खामियाज़ा छात्रों को नहीं भुगतना चाहिए।

हाईकोर्ट ने माना कि संजना ने सभी शर्तें पूरी की थीं और गलती कॉलेज की ओर से हुई।

हम मुआवज़ा ₹15,00,000 निर्धारित करते हैं, जिसे प्रतिवादी संख्या 6 दो माह के भीतर अदा करेगा, अदालत ने आदेश दिया।

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इसके साथ ही रिट याचिका का निस्तारण कर दिया गया और सभी लंबित आवेदनों को खारिज कर दिया गया।

मामले का शीर्षक: संजना वी तुमकुर बनाम राज्य कर्नाटक एवं अन्य

मामला संख्या: रिट याचिका संख्या 6014/2018 (EDN-MED-ADM)

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