मध्यप्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर ने एक आपराधिक मामले की सुनवाई के दौरान अभद्र शब्दों का प्रयोग करने वाले अधिवक्ता को कड़ी चेतावनी दी। न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार अग्रवाल ने MCRC क्रमांक 16814/2025 की सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि इस प्रकार का आचरण अदालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मुन्नालाल मेहरा बनाम मध्यप्रदेश राज्य मामले की सुनवाई के दौरान आवेदकों की ओर से पेश वकील ने कथित तौर पर अदालत के प्रति अनुचित भाषा का प्रयोग किया। अपनी गलती का एहसास होते ही उन्होंने तुरंत बिना शर्त माफी मांगी। अदालत ने माफी स्वीकार करते हुए सख्त कार्रवाई से परहेज़ किया, लेकिन उन्हें दोबारा ऐसा न करने की चेतावनी दी।
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आदेश में कहा गया,
"यदि पुनः अदालत के संबंध में अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया तो उचित कार्रवाई की जाएगी।"
मामले के वास्तविक पक्ष पर, राज्य की ओर से अधिवक्ता श्री अक्षय नमदेव ने घायल व्यक्ति अनीकेत की चिकित्सा स्थिति से संबंधित विवरण पेश किए। पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, अनीकेत को 15 जून 2024 को अस्पताल में भर्ती कराया गया था और 17 जून 2024 को छुट्टी दे दी गई थी। बाद में 3 जुलाई 2024 को उन्हें दोबारा भर्ती किया गया, लेकिन दूसरी बार उन्हें किस तिथि को छुट्टी मिली, इसका स्पष्ट उल्लेख रिकॉर्ड में नहीं है।
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अदालत ने अभियोजन पक्ष को निर्देश दिया कि संबंधित थाने से अनीकेत के अस्पताल में भर्ती रहने की पूरी जानकारी प्रस्तुत की जाए। इस मामले की अगली सुनवाई 1 सितंबर 2025 को तय की गई है।
यह मामला दो अहम पहलुओं को सामने लाता है। पहला, न्यायालय में किसी भी प्रकार की अभद्रता या असम्मान के प्रति न्यायपालिका की असहिष्णुता। दूसरा, आपराधिक मामलों में घायल पीड़ित की चिकित्सीय स्थिति से जुड़ी सटीक जानकारी की अहमियत।
अदालत ने एक ओर अधिवक्ता को चेतावनी देकर गरिमा बनाए रखने का संदेश दिया और दूसरी ओर राज्य को स्पष्ट तथ्य प्रस्तुत करने का निर्देश देकर न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाया।
केस का शीर्षक: मुन्नालाल मेहरा एवं अन्य बनाम मध्य प्रदेश राज्य
केस संख्या: MCRC No. 16814 of 2025