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ओडिशा हाई कोर्ट ने चुने गए विधानसभा रिपोर्टरों की नियुक्ति का आदेश दिया; कहा कि बिना ठोस वजह के भर्ती रद्द नहीं की जा सकती।

Zaved Khan
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उड़ीसा हाई कोर्ट ने ओडिशा विधानसभा की 2021 रिपोर्टर भर्ती रद्द करने का फैसला निरस्त करते हुए चयनित अभ्यर्थियों को चार सप्ताह के भीतर नियुक्ति देने का निर्देश दिया। - Sourava Rout & Anr. v. Odisha Legislative Assembly & Anr.

ओडिशा हाई कोर्ट ने चुने गए विधानसभा रिपोर्टरों की नियुक्ति का आदेश दिया; कहा कि बिना ठोस वजह के भर्ती रद्द नहीं की जा सकती।

उड़ीसा हाई कोर्ट ने ओडिशा विधानसभा सचिवालय द्वारा वर्ष 2021 की रिपोर्टर भर्ती प्रक्रिया रद्द करने के फैसले को अवैध ठहराते हुए निरस्त कर दिया है। न्यायमूर्ति संजय कुमार मिश्रा ने कहा कि चयन प्रक्रिया रद्द करने के लिए कोई वैध कानूनी आधार नहीं था। अदालत ने विधानसभा सचिवालय को निर्देश दिया कि भर्ती नियमों के तहत शेष औपचारिकताएं पूरी कर चार सप्ताह के भीतर दोनों चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र जारी किए जाएं।

मामले की पृष्ठभूमि

26 जनवरी 2021 को ओडिशा विधानसभा सचिवालय ने रिपोर्टर के सात पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था। याचिकाकर्ता सौरव राउत और बिस्वज्योति बेहरा ने टाइप टेस्ट, शॉर्टहैंड स्किल टेस्ट और साक्षात्कार सहित चयन प्रक्रिया के सभी चरण सफलतापूर्वक पूरे किए। 29 जून 2021 को जारी अंतिम चयन सूची में दोनों के नाम क्रमशः पहले और दूसरे स्थान पर थे।

इसके बाद नियुक्तियों को अंतिम मंजूरी देने के लिए प्रस्तावित चयन बोर्ड की बैठक कई बार टाल दी गई। इस पर दोनों अभ्यर्थियों ने पहले हाई कोर्ट का रुख किया। मई 2023 में हाई कोर्ट ने चयन बोर्ड को निर्देश दिया था कि वह ओडिशा विधानसभा सचिवालय (भर्ती एवं सेवा शर्त) नियम, 1983 के नियम 7(2) के अनुसार नियुक्ति पर अंतिम निर्णय ले।

लेकिन इस आदेश का पालन करने के बजाय चयन बोर्ड ने 21 जुलाई 2023 को पूरी भर्ती प्रक्रिया ही रद्द कर दी। बोर्ड ने कहा कि भर्ती से जुड़े मूल दस्तावेज सत्यापन के लिए उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए नई भर्ती कराई जाएगी। इसी आदेश को याचिकाकर्ताओं ने वर्तमान याचिका में चुनौती दी।

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अदालत की टिप्पणी

न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा कि इसी भर्ती प्रक्रिया को लेकर पहले एक समन्वय पीठ पूरी चयन प्रक्रिया और मूल अभिलेखों की जांच कर चुकी थी। उस फैसले में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि चयन प्रक्रिया में कोई प्रक्रियागत अनियमितता या अवैधता नहीं पाई गई।

अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि जिस कथित "असहमति नोट" के आधार पर भर्ती रद्द करने की बात कही गई, वह रिकॉर्ड पर कभी प्रस्तुत ही नहीं किया गया। इसलिए उसी आधार पर बाद में भर्ती रद्द करना उचित नहीं था।

अदालत ने कहा,

"ओडिशा विधानसभा चयन प्रक्रिया रद्द करने और नई भर्ती शुरू करने के लिए उचित नहीं थी। ऐसा कदम 'रेस जुडीकाटा' (Res Judicata) के सिद्धांत से प्रभावित है और इसमें न्यायालय के हस्तक्षेप की आवश्यकता है।"

हाई कोर्ट ने पाया कि विधानसभा सचिवालय ने 19 मई 2023 के पूर्व निर्णय की गलत व्याख्या की। अपील लंबित रहने के दौरान ही चयन बोर्ड ने यह मान लिया कि उसे पूरी भर्ती प्रक्रिया रद्द करने का अधिकार है, जबकि पहले के फैसले में ऐसा कोई निर्देश नहीं दिया गया था।

अदालत ने कहा कि भर्ती रद्द करने का एकमात्र आधार मूल दस्तावेजों का उपलब्ध न होना बताया गया, जबकि इस पहलू पर पहले ही विचार किया जा चुका था और उसे पर्याप्त कारण नहीं माना गया था।

हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल चयन सूची में नाम आने से किसी उम्मीदवार को स्वतः नियुक्ति का पूर्ण अधिकार नहीं मिल जाता।

हालांकि अदालत ने यह भी दोहराया कि यदि चयन प्रक्रिया विधि के अनुसार पूरी हो चुकी हो और पर्याप्त रिक्तियां मौजूद हों, तो सरकार बिना उचित और तर्कसंगत कारण बताए नियुक्ति से इनकार नहीं कर सकती।

अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि राज्य या उसकी संस्थाएं अपने विवेकाधिकार का प्रयोग मनमाने ढंग से नहीं कर सकतीं।

अदालत ने कहा,

"राज्य या उसकी कोई संस्था किसी चयनित उम्मीदवार को मनमाने तरीके से नियुक्ति से वंचित नहीं कर सकती। यदि पूरी चयन प्रक्रिया रद्द की जाती है, तो उसके लिए वैध और ठोस कारण साबित करना भर्ती प्राधिकारी की जिम्मेदारी है।"

हाई कोर्ट ने कहा कि विधानसभा यह साबित नहीं कर सकी कि पूरी चयन प्रक्रिया किसी अनियमितता या पक्षपात से प्रभावित थी।

अदालत ने यह भी माना कि पहले की समन्वय पीठ ने मूल अभिलेखों की जांच के बाद स्पष्ट निष्कर्ष दिया था कि भर्ती रद्द करने का कोई वैध आधार मौजूद नहीं था। ऐसे में चयन बोर्ड द्वारा बाद में भर्ती रद्द करना न्यायसंगत नहीं कहा जा सकता।

इसी आधार पर अदालत ने माना कि 21 जुलाई 2023 का रद्दीकरण आदेश कानूनी कसौटी पर टिक नहीं सकता।

अदालत का अंतिम निर्णय

हाई कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए 21 जुलाई 2023 की भर्ती रद्द करने वाली अधिसूचना को निरस्त कर दिया।

अदालत ने ओडिशा विधानसभा सचिवालय को निर्देश दिया कि यदि नियम 7(2) के तहत कोई औपचारिकता शेष हो तो उसे पूरा किया जाए और 26 जनवरी 2021 के भर्ती विज्ञापन के अनुसार सौरव राउत और बिस्वज्योति बेहरा को रिपोर्टर पद पर नियुक्ति पत्र चार सप्ताह के भीतर जारी किए जाएं। अदालत ने मामले में लागत (कॉस्ट) का कोई आदेश पारित नहीं किया।

Case Details:

Case Title: Sourava Rout & Anr. v. Odisha Legislative Assembly & Anr.

Case Number: W.P.(C) No. 23353 of 2023

Judge: Justice Sanjay Kumar Mishra

Decision Date: 03 July 2026

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