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पोर्टल बंद होने से वास्तविक किसान मुआवजे से वंचित नहीं रह सकते: पटना हाईकोर्ट ने बिहार सरकार को दिए निर्देश

Shivam
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पटना हाईकोर्ट ने बिहार सरकार को निर्देश दिया कि फसल नुकसान झेल चुके और प्रक्रिया में छूट गए किसानों की पहचान कर उन्हें कानून के अनुसार मुआवजा दिया जाए। - संजय कुमार बनाम बिहार राज्य और अन्य।

पोर्टल बंद होने से वास्तविक किसान मुआवजे से वंचित नहीं रह सकते: पटना हाईकोर्ट ने बिहार सरकार को दिए निर्देश

पटना हाईकोर्ट ने बिहार सरकार को निर्देश दिया है कि फसल नुकसान झेलने वाले ऐसे किसानों की पहचान कर उन्हें राहत देने की प्रक्रिया तेज की जाए, जो तकनीकी या प्रक्रियागत कारणों से अब तक मुआवजे से वंचित रह गए हैं।

अदालत ने कहा कि प्राकृतिक आपदा के बाद नुकसान झेल चुके किसानों को केवल तकनीकी अड़चनों के आधार पर राहत से वंचित नहीं किया जा सकता।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला संजय कुमार बनाम बिहार राज्य एवं अन्य से जुड़ा है, जिसमें मुजफ्फरपुर जिले के किसानों को फसल क्षति के बावजूद मुआवजा नहीं मिलने का मुद्दा उठाया गया था।

पूर्व सुनवाई के दौरान जिला प्रशासन ने अदालत को बताया था कि खरीफ 2025 में हुए फसल नुकसान का विस्तृत प्रतिवेदन 5 दिसंबर 2025 को कृषि विभाग को भेज दिया गया था। हालांकि, DBT आधारित पोर्टल बंद हो जाने के कारण कुछ किसानों के आवेदन प्रक्रिया में शामिल नहीं हो सके।

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इसके बाद हाईकोर्ट ने कृषि विभाग के निदेशक को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर यह बताने का निर्देश दिया था कि प्रभावित किसानों तक मुआवजा कैसे पहुंचाया जाएगा।

सुनवाई के दौरान कृषि विभाग के निदेशक ने अदालत को बताया कि अब तक 1,11,861 किसानों को फसल क्षति मुआवजा दिया जा चुका है और कुल 33.25 करोड़ रुपये वितरित किए गए हैं।

राज्य सरकार ने यह भी कहा कि गांव स्तर पर जागरूकता अभियान चलाए गए थे और किसानों को आवेदन प्रक्रिया की जानकारी देने के लिए स्थानीय अखबारों में सूचना प्रकाशित की गई थी।

सरकार ने अदालत को यह भी बताया कि अब एक तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है, जो प्रभावित पंचायतों में जाकर ऐसे किसानों की पहचान करेगी जिनके मामले अभी तक लंबित या अनदेखे रह गए हैं। समिति फील्ड जांच के आधार पर पात्रता तय करेगी।

अदालत ने राज्य सरकार की रिपोर्ट का अवलोकन करते हुए कहा कि मुआवजा योजना आवेदन, सत्यापन और पात्रता मानकों पर आधारित है, लेकिन वास्तविक पीड़ित किसानों को केवल प्रक्रियागत कठिनाइयों के कारण राहत से वंचित नहीं किया जा सकता।

खंडपीठ ने टिप्पणी की,

“जो किसान पूरे देश का पेट भरता है, उसे प्राकृतिक आपदा के समय अपने हाल पर नहीं छोड़ा जा सकता।”

अदालत ने यह भी कहा कि फसल नुकसान के बाद राहत नहीं मिलना किसानों के जीवन और आजीविका के अधिकार को प्रभावित कर सकता है, जो संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 से जुड़ा विषय है।

हाईकोर्ट ने तीन सदस्यीय समिति को निर्धारित समय के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। रिपोर्ट में ऐसे किसानों की संख्या, फसल नुकसान का विवरण और पात्रता की स्थिति बतानी होगी।

अदालत ने कृषि विभाग को अगली सुनवाई से पहले एक नया हलफनामा दाखिल करने का भी निर्देश दिया, जिसमें यह बताया जाए कि कितने छूटे हुए किसानों की पहचान हुई और कितनों को मुआवजा दिया गया।

मामले की अगली सुनवाई 24 जून 2026 को निर्धारित की गई है।

Case Details

Case Title: Sanjay Kumar vs The State of Bihar & Ors.

Case Number: Civil Writ Jurisdiction Case No. 3121 of 2026

Judge: Chief Justice Sangam Kumar Sahoo and Justice Harish Kumar

Decision Date: May 14, 2026

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