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पटना उच्च न्यायालय ने आपसी तलाक की याचिका खारिज करने के फैसले को बरकरार रखा, कहा कि एक साल के अलगाव के नियम का पालन नहीं किया गया।

Rajan Prajapati
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पटना हाईकोर्ट ने आपसी सहमति तलाक की अपील खारिज की, कहा एक साल अलग रहने की शर्त पूरी नहीं हुई, इसलिए फैमिली कोर्ट का आदेश सही। - कुमारी वागीशा बनाम कुमार संगम

पटना उच्च न्यायालय ने आपसी तलाक की याचिका खारिज करने के फैसले को बरकरार रखा, कहा कि एक साल के अलगाव के नियम का पालन नहीं किया गया।

पटना हाईकोर्ट ने आपसी सहमति से तलाक (Mutual Divorce) के एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि कानून में तय शर्तों का पालन अनिवार्य है। कोर्ट ने कहा कि “एक वर्ष तक अलग रहने” की शर्त पूरी न होने पर तलाक की अनुमति नहीं दी जा सकती।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला कुमारी वागीशा बनाम कुमार संगम से जुड़ा है। दोनों की शादी 28 अप्रैल 2021 को हुई थी। विवाह के बाद दंपति के बीच मतभेद बढ़े और मार्च 2022 से वे अलग रहने लगे।

दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से तलाक लेने के लिए हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13(B) के तहत फैमिली कोर्ट, शिवहर में याचिका दायर की।

समझौते के तहत:

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• पति ने पत्नी को 20 लाख रुपये स्थायी गुजारा भत्ता देने पर सहमति दी

• बेटी के लिए 2 लाख रुपये फिक्स्ड डिपॉजिट की बात तय हुई

• आपसी मामलों को खत्म करने और भविष्य में कोई केस न करने का समझौता हुआ

हालांकि, फैमिली कोर्ट ने 6 जून 2023 को याचिका खारिज कर दी।

फैमिली कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए पत्नी ने पटना हाईकोर्ट में अपील दाखिल की।

अपील में कहा गया कि:

• दोनों पक्ष एक साल से अधिक समय से अलग रह रहे थे

• फैमिली कोर्ट ने केवल पति के बयान के आधार पर याचिका खारिज कर दी

• लिखित दस्तावेजों और संयुक्त याचिका के तथ्यों को नजरअंदाज किया गया

हाईकोर्ट की बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए धारा 13(B) की शर्तों को विस्तार से समझाया।

कोर्ट ने कहा:

“कानून के अनुसार, तलाक की याचिका दाखिल करने से पहले पति-पत्नी का लगातार एक वर्ष तक अलग रहना आवश्यक है।”

कोर्ट ने “अलग रहने” की परिभाषा भी स्पष्ट की:

“अलग रहने का मतलब सिर्फ अलग घर में रहना नहीं है, बल्कि पति-पत्नी के रूप में जीवन न जीना और वैवाहिक संबंध पूरी तरह समाप्त होना है।”

सुनवाई के दौरान यह महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया कि:

• पति ने अपने बयान में स्वीकार किया कि 15 मार्च 2023 को दोनों के बीच वैवाहिक संबंध बने थे

• जबकि तलाक की याचिका 11 मई 2023 को दायर की गई थी

कोर्ट ने इसे “एक वर्ष तक लगातार अलग रहने” की शर्त के विपरीत माना।

हाईकोर्ट ने कहा कि:

• याचिका में किए गए दावे और पति के बयान में स्पष्ट विरोधाभास है

• जब स्वयं पति ने हाल ही में वैवाहिक संबंध होने की बात मानी है, तो “लगातार अलग रहने” की शर्त पूरी नहीं होती

कोर्ट ने कहा:

“जब याचिका के तथ्यों और साक्ष्य में असंगति हो, तो अदालत को संतुष्ट होना जरूरी है कि कानूनी शर्तें पूरी हुई हैं।”

सभी तथ्यों और कानून की व्याख्या के बाद हाईकोर्ट ने पाया कि फैमिली कोर्ट का फैसला सही और कानूनी रूप से उचित था।

“इस न्यायालय को निचली अदालत के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं दिखता।”

इसके साथ ही, पटना हाईकोर्ट ने अपील को खारिज कर दिया।

case details

Case Title: Kumari Vagisha vs Kumar Sangam

Case Number: Miscellaneous Appeal No. 807 of 2024

Court: High Court of Judicature at Patna

Judges: Hon’ble Mr. Justice Nani Tagia and Hon’ble Mr. Justice Alok Kumar Pandey

Decision Date: 24 April 2026

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