इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को संभल जामा मस्जिद के बाहरी हिस्से की सफेदी करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस कार्य का पूरा खर्च मस्जिद प्रबंधन समिति को उठाना होगा और यह कार्य एक सप्ताह के भीतर पूरा किया जाना चाहिए। यह फैसला मस्जिद प्रबंधन समिति द्वारा दायर एक याचिका के बाद आया है। कोर्ट इस मामले की पुनः समीक्षा 8 अप्रैल को करेगा, जिसमें एएसआई की रिपोर्ट में उल्लिखित शर्तों पर विचार किया जाएगा।
मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि मस्जिद की बाहरी दीवारों पर मौजूद उखड़ती हुई परतों की मरम्मत सफेदी के माध्यम से की जानी चाहिए। कोर्ट ने विशेष रूप से एलईडी या फोकस लाइट के उपयोग पर रोक लगाई है, जिससे ऐतिहासिक इमारत को कोई नुकसान न पहुंचे।
"मस्जिद की बाहरी दीवारों पर एलईडी या फोकस लाइट का उपयोग वर्जित होगा, ताकि संरचना को किसी प्रकार की क्षति न पहुंचे।" — इलाहाबाद हाई कोर्ट
Read Also:- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एएसआई को एक सप्ताह में संभल जामा मस्जिद की सफेदी पूरी करने का आदेश दिया
कोर्ट के निर्देश पर, एएसआई ने 10 मार्च को एक अनुपूरक हलफनामा प्रस्तुत किया था। इस हलफनामे में स्पष्ट किया गया कि क्या मस्जिद की बाहरी दीवारों को सफेदी, अतिरिक्त रोशनी या सजावटी लाइटों की आवश्यकता है या नहीं।
मस्जिद समिति के अधिवक्ता एसएफए नक़वी ने तर्क दिया कि एएसआई ने अपने हलफनामे में स्पष्ट रूप से यह नहीं कहा कि सफेदी या अतिरिक्त रोशनी की आवश्यकता नहीं है। दूसरी ओर, एएसआई के प्रतिनिधि मनोज कुमार सिंह ने कहा कि मस्जिद की बाहरी दीवारों पर कुछ स्थानों पर परत उखड़ रही है, लेकिन आवश्यक मरम्मत का पूरा आकलन केवल पुरातत्वविदों और संरक्षण विशेषज्ञों की विस्तृत जांच के बाद किया जा सकता है।
Read Also:- अलाहाबाद हाई कोर्ट ने मस्जिद में लाउडस्पीकर की याचिका खारिज की: "मौलिक अधिकार नहीं है"
इस मामले में कानूनी कार्यवाही कई हफ्तों से चल रही है। 27 फरवरी को कोर्ट ने एएसआई को स्थल का निरीक्षण करने और अगले दिन अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। एएसआई की रिपोर्ट के अनुसार, मस्जिद की दीवारों पर लगाया गया इनेमल पेंट अभी भी अच्छी स्थिति में है। इस पर कोर्ट ने एएसआई को आसपास के क्षेत्र की सफाई करने और घास की कटाई करने का निर्देश दिया।
इसके अतिरिक्त, कोर्ट ने मस्जिद प्रबंधन समिति को एएसआई की रिपोर्ट पर आपत्ति दर्ज करने की अनुमति भी दी है।
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 8 अप्रैल की तारीख निर्धारित की है। इस सुनवाई के दौरान, कोर्ट एएसआई की रिपोर्ट के निष्कर्षों के आधार पर मामले की समीक्षा करेगा और यह तय करेगा कि आगे कोई अतिरिक्त कार्य आवश्यक है या नहीं।
यह फैसला ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण के प्रति न्यायपालिका की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, साथ ही विभिन्न पक्षों की चिंताओं को संतुलित करने का प्रयास करता है। आगामी सुनवाई का परिणाम संभल जामा मस्जिद की मरम्मत और संरक्षण के लिए आगे की दिशा तय करेगा।