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दहेज उत्पीड़न मामला: केरल हाईकोर्ट ने पति की दोषसिद्धि बरकरार रखी, सजा घटाकर 6 महीने की

Shivam Y.

प्रवीण कुमार @ कन्नन बनाम केरल राज्य - केरल उच्च न्यायालय ने दहेज क्रूरता के लिए आईपीसी की धारा 498ए के तहत पति की दोषसिद्धि की पुष्टि की, लेकिन कारावास की सजा को एक वर्ष से घटाकर छह महीने कर दिया।

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दहेज उत्पीड़न मामला: केरल हाईकोर्ट ने पति की दोषसिद्धि बरकरार रखी, सजा घटाकर 6 महीने की
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केरल हाईकोर्ट ने दहेज उत्पीड़न के एक मामले में पति की दोषसिद्धि को बरकरार रखते हुए उसकी सजा में आंशिक राहत दी है। अदालत ने कहा कि पत्नी के साथ दहेज की मांग को लेकर हिंसा कोई साधारण पारिवारिक विवाद नहीं, बल्कि गंभीर अपराध है। हालांकि परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने सजा को एक वर्ष से घटाकर छह महीने कर दिया।

मामले की पृष्ठभूमि

मामले के अनुसार, आरोपी प्रवीण कुमार और उसकी मां पर पत्नी को दहेज के लिए प्रताड़ित करने का आरोप लगाया गया था। शिकायत के आधार पर नारक्कल पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई और जांच के बाद दोनों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 498A (पति या उसके रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता) के तहत आरोपपत्र दाखिल किया गया।

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ट्रायल के दौरान अभियोजन ने 10 गवाहों को पेश किया और कई दस्तावेज अदालत के सामने रखे। ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को दोषी मानते हुए दो वर्ष के कठोर कारावास और ₹10,000 जुर्माने की सजा सुनाई।

बाद में सेशन कोर्ट में अपील दाखिल की गई। अपीलीय अदालत ने आरोपी की मां को बरी कर दिया, लेकिन पति की दोषसिद्धि बरकरार रखते हुए सजा को संशोधित कर एक वर्ष की साधारण कैद और ₹5,000 जुर्माना कर दिया।

जस्टिस एम.बी. स्नेहलता की पीठ ने रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों का विश्लेषण करते हुए पाया कि पत्नी की गवाही विश्वसनीय और स्वाभाविक है। अदालत ने कहा कि घटना के समय महिला गर्भवती थी और उसके साथ मारपीट की गई, जिसके बाद वह पड़ोसी के घर शरण लेने को मजबूर हुई।

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चिकित्सकीय प्रमाण भी इस घटना की पुष्टि करते हैं। अदालत के समक्ष पेश घाव प्रमाण पत्र में शरीर के कई हिस्सों पर चोट और मांसपेशियों में दर्द दर्ज था।

पीठ ने कहा,

“वैवाहिक क्रूरता अक्सर एक निरंतर अपराध होती है, जिसमें पीड़िता लंबे समय तक उत्पीड़न सहने के बाद शिकायत दर्ज कराती है।”

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अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसी परिस्थितियों में शिकायत दर्ज करने में देरी अपने आप में मामले को कमजोर नहीं करती।

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जज ने कहा,

“दहेज की मांग से जुड़ी हिंसा कोई साधारण घरेलू विवाद नहीं है, बल्कि लालच और लैंगिक हिंसा से जुड़ा गंभीर अपराध है।”

सभी तथ्यों और साक्ष्यों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने आरोपी की दोषसिद्धि को बरकरार रखा।

हालांकि अदालत ने सजा में थोड़ी राहत देते हुए इसे एक वर्ष से घटाकर छह महीने की साधारण कैद कर दिया। साथ ही ₹5,000 जुर्माना बरकरार रखा गया और जुर्माना न देने की स्थिति में एक महीने की अतिरिक्त साधारण कैद का प्रावधान किया गया।

अदालत ने ट्रायल कोर्ट को आदेश दिया कि संशोधित सजा को लागू करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।

Case Title:- Praveen Kumar @ Kannan v. State of Kerala

Case Number:- Criminal Revision Petition No. 573 of 2018

Date of Judgment:- 19 February 2026

Advocates

For Petitioner: Vishnu Premkumar (Amicus Curiae)

For State: Maya M. N., Public Prosecutor

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