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वकील फीस का विवाद क्लाइंट के अधिकारों को नहीं रोक सकता: केरल हाईकोर्ट ने ₹50,000 का जुर्माना लगाया

Shivam Y.

केरल हाईकोर्ट ने कहा कि वकील फीस विवाद के आधार पर डिक्री की वसूली नहीं रोक सकते; याचिका खारिज, ₹50,000 जुर्माना लगाया गया।

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वकील फीस का विवाद क्लाइंट के अधिकारों को नहीं रोक सकता: केरल हाईकोर्ट ने ₹50,000 का जुर्माना लगाया
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केरल हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा कि कोई वकील फीस विवाद के आधार पर अपने पूर्व मुवक्किल की डिक्री (अदालती आदेश) की वसूली रोक नहीं सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि वकील का पेशेवर अधिकार उसके मुवक्किल के मामले को आगे बढ़ने से रोकने का अधिकार नहीं देता। अदालत ने याचिका खारिज करते हुए याचिकाकर्ताओं पर ₹50,000 का जुर्माना भी लगाया।

मामले की पृष्ठभूमि

दो अधिवक्ताओं ने दावा किया कि उन्होंने भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामले में दावेदारों को कानूनी सहायता दी थी और अवॉर्ड मिलने के बाद निष्पादन (Execution) कार्यवाही के दौरान उन्हें उनकी पेशेवर फीस नहीं मिली। उनका आरोप था कि दावेदारों ने बिना नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) लिए नए वकील नियुक्त कर लिए। इस पर उन्होंने अदालत से निष्पादन कार्यवाही रोकने की मांग की।

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दूसरी ओर, दावेदारों ने कहा कि पहले ही पर्याप्त भुगतान किया जा चुका है और आगे की कार्यवाही इसलिए रोकी नहीं जा सकती कि फीस को लेकर विवाद है।

मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति बेचु कुरियन थॉमस ने कहा, “किसी वकील को यह अधिकार नहीं है कि वह अपने पूर्व मुवक्किल के मामले को सिर्फ फीस विवाद के कारण रोक दे।” अदालत ने यह भी जोड़ा कि यदि किसी वकील को बकाया फीस की शिकायत है, तो उसके लिए वैधानिक उपाय उपलब्ध हैं, लेकिन वह निष्पादन कार्यवाही रोकने का आधार नहीं बन सकता।

अदालत ने बार काउंसिल के नियमों का हवाला देते हुए कहा कि वकील केवल वही राशि समायोजित कर सकता है जो उसके पास खर्च के रूप में बची हो, लेकिन मुकदमे की कार्यवाही रोकने या रिकॉर्ड रोककर दबाव बनाने की अनुमति नहीं है।

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अदालत का निर्णय

अदालत ने कहा कि वकील–मुवक्किल संबंध भरोसे पर आधारित होता है और मुवक्किल को वकील बदलने का अधिकार है।

अदालत ने माना कि इस मामले में याचिकाकर्ताओं की मांग न्यायिक रूप से टिकाऊ नहीं है।

परिणामस्वरूप, याचिका खारिज कर दी गई और याचिकाकर्ताओं पर ₹50,000 का जुर्माना लगाया गया, जो केरल राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (KELSA) को छह सप्ताह के भीतर जमा करना होगा।

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Case Details

Case Title: XXX & YYY and Ors.

Case Number: W.P.(C) No.28533 of 2025

Judge: Justice Bechu Kurian Thomas

Decision Date: 8 April 2026

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