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गुजरात हाईकोर्ट ने POSH मामले में ICC रिपोर्ट को बरकरार रखा, निजी सहकारी संस्था पर रिट याचिका पर उठाए सवाल

Shivam
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गुजरात हाईकोर्ट ने POSH मामले में ICC की रिपोर्ट को सही ठहराया और निजी सहकारी संस्था के खिलाफ रिट याचिका की वैधता पर सवाल उठाए।

गुजरात हाईकोर्ट ने POSH मामले में ICC रिपोर्ट को बरकरार रखा, निजी सहकारी संस्था पर रिट याचिका पर उठाए सवाल

गुजरात हाईकोर्ट ने कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न (POSH) मामले में एक महत्वपूर्ण आदेश देते हुए आंतरिक शिकायत समिति (ICC) की रिपोर्ट में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। अदालत ने यह भी कहा कि निजी सहकारी संस्था के खिलाफ सीधे रिट याचिका की वैधता पर गंभीर प्रश्न उठते हैं।

मामले की पृष्ठभूमि

याचिकाकर्ता, जो एक सहकारी संस्था में सहायक प्रबंधक के पद पर कार्यरत थीं, ने आरोप लगाया कि 28 मई 2025 को उनके साथ शारीरिक और मौखिक दुर्व्यवहार हुआ। इसके बाद उन्होंने POSH कानून के तहत शिकायत दर्ज कराई।

दूसरी ओर, एक सहकर्मी द्वारा भी याचिकाकर्ता के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई, जिसमें उन पर आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित करने का आरोप लगाया गया।

दोनों शिकायतों की जांच संस्था की आंतरिक शिकायत समिति (ICC) ने की और 25 सितंबर 2025 को अपनी अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत की।

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न्यायमूर्ति हेमंत एम. प्राच्छक ने रिकॉर्ड और ICC की रिपोर्ट का विस्तृत परीक्षण किया।

अदालत ने कहा:

“रिकॉर्ड से यह स्पष्ट है कि ICC ने सभी तथ्यों, साक्ष्यों और CCTV फुटेज का मूल्यांकन करते हुए विस्तृत कारणों के साथ अपनी रिपोर्ट दी है, जिसमें कोई स्पष्ट अवैधता नहीं दिखती।”

अदालत ने यह भी नोट किया कि:

• ICC ने याचिकाकर्ता की शिकायत को “गलत और भ्रामक” बताया

• दूसरी शिकायत को गंभीर मानते हुए पुलिस जांच के लिए भेजा गया

• समिति ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निष्कर्ष निकाले

कोर्ट ने यह महत्वपूर्ण प्रश्न भी उठाया कि क्या संबंधित सहकारी संस्था “राज्य” (Article 12 के तहत) की श्रेणी में आती है या नहीं।

अदालत ने कहा कि सहकारी संस्था एक निजी निकाय है और सामान्यतः उस पर सीधे रिट अधिकार क्षेत्र लागू नहीं होता, जब तक कि वह सार्वजनिक कर्तव्य का निर्वहन न कर रही हो।

साथ ही, अदालत ने यह भी माना कि:

• POSH अधिनियम के तहत अपील का वैकल्पिक उपाय उपलब्ध हो सकता है

• याचिकाकर्ता ने उस वैकल्पिक उपाय का उपयोग नहीं किया

अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि ICC की रिपोर्ट में कोई स्पष्ट कानूनी त्रुटि या प्रक्रिया में गंभीर अनियमितता नहीं है, जो हस्तक्षेप को उचित ठहराए।

इसलिए, अदालत ने याचिका में हस्तक्षेप से इनकार किया और ICC की रिपोर्ट को बरकरार रखा।

Case Details

Case Title: X and Y

Case Number: R/Special Civil Application No. 3285 of 2026

Judge: Justice Hemant M. Prachchhak

Decision Date: April 16, 2026

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